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रविवार, 4 मार्च 2018

961...इस बार भी चढ़ जायेगा रंग कहाँ कुछ नहीं बतायेगा

होली का तीसरा दिन
ऐसा तो कहीं नही लगता कि
होली आई थी...
लिखना-पढ़ना बदस्तूर जारी है
चलिए शार्टकट लेते हैं.....

उड़े होली के रंग बहुत
 तूम मेरा रंग लगाओ न
चढ़े होली के भंग बहुत
होठो से भंग पिलाओ न।


रंग....पुरुषोत्तम सिन्हा
कहीं सूखते पात,
बिछड़ते डाली से छूटते हाथ,
कहीं टूटी डाल,
कहीं नव-कलियों का ताल,
कहीं खिलते हँसते फूल,
वहीं मुरझाए से फूल,
जमीं पर औंधे छाए से फूल,
वहीं झूलती डाली पर विहँसते शूल,


लिखा जाना बाकी है अभी!..अपर्णा वाजपेई
जानता हूँ जब भी लिखेगी मुझको वो
शर्म से खुद में ही बार-बार सिमट जायेगी 
हर एक हर्फ़ के बाद खुद से पूछेगी 
कोरे कागज़ को एहसास बताना गुस्ताख़ी तो नहीं? 


दर्द का हर डंक...अभिलाषा (अभि)
दर्द का पर्यायवाची बन गया ये जीवन
और हर पर्याय पर
भिनभिना रही हैं मधुमक्खियां 
कि हर आहट पर
डंक मारने को आतुर,
बेतरतीब सी दौड़ती जा रही हैं
हज़ारों गाड़ियां सड़क पर


गावै कोयलिया कुहू कुहू ...पुष्पेन्द्र द्विवेदी
अमिया अमराई पीहू पीहू गावै कोयलिया कुहू कुहू ,
तन गीला कैसे धीज धरूँ मैं बिरहन तपती जलती मरू ।

पी पी भांग धतूरा अब तो चम्म हो गए सारे ,
मटका में मट्ठा घुलवाओ कोई निमकी चटवाओ अब तो ।

मेरी फ़ोटो
कश्मकश!......अनीता लागुरी (अनु)
मेरे हाथों में कांपते मेरे सपने भी हैं ...!
कुछ कहने को उतावला  मेरा मन भी है
हाँ  वो गोले आग के,मेरे अंदर भी हैं ।

उलूक की खबर
उलूक टाइम्स
रंग को रंग 
ही रहने दे 
अगर मिलायेगा 
समझ ले बाद में 
तेरे ही सर 
चढ़ के बोलेगा 
होली का होला 
कब हो गया 
“उलूक” तू बस 
ऊपर से नीचे 
देखता रह जायेगा ।
...........
आज बस
दिग्विजय









14 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात...
    वाह...
    बेहतरीन
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. हमेशा की तरह सुन्दर प्रस्तुति, उम्दा लिंकों का चयन तधा इक लम्बे अन्तराल के पश्चात मेरी रचनाएँ भी शामिल करने हेतु बहुत बहुत धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर एवं सराहनीय रचनाओं से सजी आज की प्रस्तुति बहुत अच्छी लगी आदरणीय सर।

    जवाब देंहटाएं
  4. आदरणीय, जीवन के विभिन्न रंगों को समेटे सुंदर लिंक संयोजन ।सुबह खुशनुमा हो गई ।धन्यवाद ।
    सादर ।

    जवाब देंहटाएं
  5. आज का अंक पढ़कर लगा कि जीवन पटरी पर कितनी जल्दी लौट आता है न होली के रंग रहे न ही गुझिया की मिठास ज़िन्दगी की तल्खियाँ बरकरार हैं। साथी रचनाकारों की प्रस्तुति बहुत अच्छी हैं।
    साधुवाद सभी रचनाकारों को एवम प्रस्तुतकर्ता को।

    जवाब देंहटाएं
  6. सुन्दर प्रस्तुतिकरण..उम्दा लिंक संकलन....

    जवाब देंहटाएं
  7. सच, ऐसा तो कहीं लगा नहीं कि होली आई थी ! कितनी तैयारी, बस दो दिनों के त्योहार को मनाने के लिए...दिवाली में भी ऐसे ही लगता है। सोचने को मजबूर कर देता है कि जो अच्छा है,उल्लास उमंग, उत्साह से भरा है, वो इतनी जल्दी क्यों बीत जाता है सुख स्वप्न की तरह....जीवन में कुछ ऐसा किया जाए कि ये उल्लास,उमंग और उत्साह कभी खत्म ही ना हो!
    अब आज की रचनाओं पर... सभी रचनाएँ एक से बढ़कर एक हैं। शानदार प्रस्तुति के लिए बधाई एवं धन्यवाद ! सादर ।

    जवाब देंहटाएं
  8. शानदार प्रस्तुति। मेरे रंग लगाने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया

    जवाब देंहटाएं
  9. शानदार प्रस्तुति। मेरे रंग लगाने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया

    जवाब देंहटाएं
  10. बहुत सुंदर संयोजन। समय तो चलता ही जायेगा , ये हमारे हाँथ में है कि हम इस समय को किस रंग से रंगते है .....
    मेरी रचना को शामिल करने के लिए सादर आभार । सभी साथी रचनाकारों को बधाई।
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  11. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  12. ख़ूबसूरत विविधता से परिपूर्ण सुन्दर रचनाओं से सजी प्रस्तुति. सभी चयनित रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनायें.

    जवाब देंहटाएं

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