सादर अभिवादन
पाँच लिंकों का आनन्द
दिन भर ब्लॉगों पर लिखी पढ़ी जा रही 5 श्रेष्ठ रचनाओं का संगम[5 लिंकों का आनंद] ब्लॉग पर आप का ह्रदयतल से स्वागत एवं अभिनन्दन...
निवेदन।
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गुरुवार, 28 मई 2026
4756 बरस रहा है पसीना टप टप, टप टप.
बुधवार, 27 मई 2026
4755..छूट गयी जब “मैं”
।।प्रातःवंदन।।
लहू-लुहान नज़ारों का ज़िक्र आया तो,
शरीफ़ लोग उठे, दूर जा के बैठ गए।
~ दुष्यंत कुमार
बुधवार भोर और हम हाजिर है चिरपरिचित अंदाज में लिंकों के संग...✍️
अज फिर चर्चा में है इलीट ग्रुप की 'मीटिंग्स' का आलीशान ठिकाना... जिमखाना क्लब
केंद्र सरकार ने लुटियंस दिल्ली के ऐतिहासिक दिल्ली जिमखाना क्लब पर बड़ा फैसला लेते हुए 5 जून तक उन्हें कैंपस खाली करने का आदेश दिया है. इसी आदेश के बाद अब आमजन के लिए कौतूहल का विषय बना जिमखाना क्लब अब चर्चा के केंद्र में आ गया है और साथ ही चर्चा में आ गए हैं वो लोग भी जो इस क्लब और इसकी रवायतों की आड़ में ना जाने क्या क्या कुचक्र रचते रहे हैं।.
✨️
एक गीत -मैं अपनी वंशी को टेरूंगा
गाओ कुछ
मैं अपनी
वंशी को टेरूंगा.
खेत हुए
अग्निकुण्ड
✨️
प्रचण्ड गर्मी
***
1.
धरा उबल रही
सूर्य अलाव।
2.
तपती धरा
हाहाकार है मचा..
✨️
कोई टूटा हुआ बल्ला भी मौसम बदल रहा है
किसी वीरान से लम्हे में जैसे कुछ मचल रहा है
✨️
छूट गयीं सहज
सारी व्यस्तताएँ
छूट गयी जब मैं,
सारे जहान का समय
✨️
।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह ' तृप्ति '..✍️
मंगलवार, 26 मई 2026
4754.... ये परिस्थितियॉं चिर-परिचित हैं...
युद्धजनित ऊर्जा-संकट से
हाहाकार कर रही है,
प्रेम के लिए तो
ये परिस्थितियाँ
चिर-परिचित हैं;
वह तो अक्सर
अभाव, प्रतिबंध
और प्रतिरोध की अँधेरी सुरंगों में ही
सबसे अधिक परिपुष्ट होता है।
सोमवार, 25 मई 2026
4753...मानो यक़ीन, मुझको कभी घर नहीं मिला...
शीर्षक पंक्ति: आदरणीया डॉ.(सुश्री) शरद सिंह जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
सोमवारीय अंक में पढ़िए ताज़ा-तरीन प्रकाशित रचनाएँ-
कभी घर नहीं मिला, डॉ (सुश्री) शरद सिंह, शायरी
प्रिया ने उठकर दरवाज़ा खोला. सामने पैकिंग बैग में खाना लिए आकाश खड़ा था. उसने अंदर प्रवेश किया. प्रिया ने दरवाजा बंद कर खाने का बैग उसके हाथ से लेकर किचन में चली गई. कणिका भी उसी के साथ किचन की ओर बढ़ गई. प्रशांत बाबू ने अपनी कुर्सी से उठकर मुस्कुराते हुए गर्मजोशी के साथ आकाश का हाथ थाम लिया.
*****
क्या हम बंदरों की संतानें हैं?
विज्ञान के अनुसार, मनुष्य सीधे तौर पर आज के बंदरों की संतान नहीं है। इसके बजाय, दूसरे शब्दों में कहें कि इंसान और आज के बंदर (जैसे चिम्पांजी) दोनों एक ही विलुप्त हो चुके प्राचीन 'वानर (Ape)' प्रजाति के वंशज हैं। लाखों वर्ष के क्रमिक विकास (Evolution) के बाद दोनों अलग-अलग दिशाओं में विकसित हुए हैं। मानव उत्पत्ति और विकास के बारे में वैज्ञानिक दृष्टिकोण इस प्रकार है:*****फिर मिलेंगे।
रवीन्द्र सिंह यादव
रविवार, 24 मई 2026
4752 भीतर ही तो तू मिलता है
सादर अभिवादन
शनिवार, 23 मई 2026
4751 ..मैं रेत हूँ— हर बार आँखों में किरकिरी
सादर अभिवादन
मैं हां या ना में जवाब दूंगा" ।
वह व्यक्ति कुछ सोचते हुए बोला
"हुजूर, नहीं दे पाओगे।"
इससे जज और अधिक गुस्सा हो गया ।
"क्यों नहीं दे पाऊंगा ? जरूर दूंगा, तुम पूछो तो सही"
उस व्यक्ति ने पूछा
"क्या आपकी पत्नी ने आपको पीटना बंद कर दिया है" ?
अदालत में सन्नाटा व्याप्त हो गया।
शुक्रवार, 22 मई 2026
4750...आदत कब सुधरेगी रे...
लेकिन अभ्यास से इसे वश मे किया जा सकता है ।
कण-कण में आस जगी, नयन में उजास भरा
हुलसा है पोर-पोर, उर मनहर गीत जगा,
बाहर इक लय बिखरी, जीवन संगीत बहा
कदमों में थिरकन भर, गह्वर में नृत्य जगा !
मुस्काई हर धड़कन, लहराया जब यौवन
अपने ही आंगन में, प्रियतम का द्वार खुला,
लहरों सी बन पुलकन, उसकी ही बात कहे
बिन बोले सब कह दे, अद्भुत यह राग उठा !
न इसे भोग का विषय समझो,
न भय का अंधकार कहो।
यह तो चेतन दीप शाश्वत,
जिससे जीवन राह गहो।
संतुलित दृष्टि ही धर्म सच्चा,
बाकी सब अनुमान यहाँ।
स्वीकारों से जग चलता है,
घृणा बने श्मशान यहाँ।



















