सादर अभिवादन
पाँच लिंकों का आनन्द
दिन भर ब्लॉगों पर लिखी पढ़ी जा रही 5 श्रेष्ठ रचनाओं का संगम[5 लिंकों का आनंद] ब्लॉग पर आप का ह्रदयतल से स्वागत एवं अभिनन्दन...
निवेदन।
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फ़ॉलोअर
मंगलवार, 28 अप्रैल 2026
4726 ..जिसने आसमान को ही अपनी छत मान लिया है।
सोमवार, 27 अप्रैल 2026
4725 ...नई मंजिलें राह देखतीं, रस्ते कुछ नव बुला रहे हैं
सादर अभिवादन
रविवार, 26 अप्रैल 2026
4724 ..जादुई किताबें ! बारहखड़ी सिखातीं । शब्द ज्ञान करवातीं
सादर अभिवादन
शनिवार, 25 अप्रैल 2026
4723...बाहर खेल रहे रेणुका नंदन, साथ था छौना वनराज का...
शीर्षक पंक्ति: आदरणीय अशर्फी लाल मिश्र जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
आइए पढ़ते हैं पाँच पसंदीदा रचनाएँ शनिवारीय अंक में-
बाहर खेल रहे रेणुका नंदन,
साथ था छौना वनराज का।
एक क्षण थी मातु अचंभित,
सचमुच छौना वनराज का?
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घौर बौड़ि आ, बेटा! | पलायन की पीड़ा और अपनों का इंतज़ार
छोटा भाई
तेरु दिनभर खटदु,
ब्याखुनि
नशे मा धुत्त ह्व़े आवै।
कैकू बि
ड़र-धौंस नी च अब,
नशे मा अपणु
परिवार भुलावे।
भुलि ग्यों
ऊं घर की मर्यादा,
ह्व़े ग्युं
छार-छार यो परिवार च,
सारु घौर आज
बीमार च।,
*****
"बैठो प्रिया, हड़ताल खत्म हो गयी है, मजदूरों को हड़ताल अवधि का वेतन एडवांस रूप में भी मिल गया है, वे फिर से काम पर हैं. फैक्ट्री को बंद करने की अनुमति के आवेदन की सुनवाई में प्रबंधन पूरी तरह नंगा हो गया है. फिर भी मजदूरों के हाथ में जो वेतन वही ट्रक सिस्टम वाला है जिससे छुटकारा पाने और फेयर वेजेज प्राप्त करने के लिए उन्होंने लड़ाई शुरू की थी.”
प्यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ा धर्म
शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026
4722 ..विदा होता अप्रैल कुछ-कुछ कहता है
सादर अभिवादन
गुरुवार, 23 अप्रैल 2026
4721 ..एक नब्बे वर्ष का जर्मन बूढ़ा चीनी भाषा सीख रहा था।
सादर अभिवादन
बुधवार, 22 अप्रैल 2026
4720..खामोशी जो सब कह गई ..
।।प्रातःवंदन।।
"है वहाँ कोई चल रहा है
कभी आगे कभी पीछे
कभी मेरे बराबर पर।
सुबह की फूटी किरन
बस पास मेरे
है उजाला औ' क्षणिक
उल्लास मेरे ..."
दूधनाथ सिंह
जीवन के गहन रूप को इंगित करती पंक्तियों संग नज़र डालें लिंको पर..
फासलों के उस पार....
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बहुत दिनों से देखते चले आ रहे है कि प्राकृतिक आपदा हो या फिर मानव जनित - लोगों को कमाई के अवसर मिलने लगते हैं। भौतिक रूप से मिला तो लोगों ने संचयन करना शुरू कर दिया, ताकि आगे चलकर उसको ब्लैक में बेचकर धनवान बना जा सके। इस काम से आम आदमी के लिए संकट पैदा होने लगता है। यहाँ तक तो ..
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खामोशी जो सब कह गई | अनकही भावनाओं की भावुक हिंदी कहानी
"शब्दों की एक सीमा होती है, पर संवेदनाएँ असीम हैं।"
अक्सर हमें लगता है कि मन की उलझनों को शब्दों के धागे में पिरोकर बाहर निकाल देने से हृदय का बोझ कम हो जाएगा। हम सोचते हैं कि कह देने से मन खाली हो जाएगा। लेकिन क्या वाक़ई ऐसा होता है ? ..
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सुनो
पता है तुम्हें
कोई-कोई इंसान
किसी के लिए बोझ हो जाता है
कुछ को नापसंद हो जाता है
और
बहुतों की आंखों की किरकरी बन जाता है. ..
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तनाव
तनाव
हिस्सा है
जीवन का
प्रकृति का
कल्पना का
सोच का..
।। इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह ' तृप्ति '..✍️


























