निवेदन।


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शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026

4896 ...वृंदावन गोकुल का ग्वाला कनेर कुण्डल वाला

सादर अभिवादन

हमारा नवरात तो प्रतिपदा से शुरु होता है

पर पश्चिम बंगाल नें उत्सव छठी से प्रारंभ होता है, 
तदनुसार आज छठ है, जिसे वहां महा षष्ठी कहते हैं

अब देखिए रचनाएं

नया ब्लॉग पहली बार


आजिमला शिव मंदिर  के लिए जहां शिव जी गंगाधरेश्वर की विशालतम प्रतिमा में विराजमान है
दीप जलाकर दीप दान किया। प्रसाद लिया और गुड़ की खीर का एक टीन पैक्ड प्रसाद भी घर के लिए लिया। अंदर विभिन्न देवी देवताओं की कलाकृतियाँ हैं।
हम रेस्टोरेंट मैँ ब्रेकफ़ास्ट के लिए आगए, स्वादिस्ट नाश्ते में साउथ इंडियन के साथ साथ नोर्थे इंडियन पूरी सब्जी, फ्रूट्स, जूस, लाजवाब , लजीज और बाहर समंदर का दिलकश नजारा और खुला नीला आसमान दोनों एक होते हुये , कोवलम बिच 





फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ में गुजराती खाने को लेकर करीना कपूर का एक डायलॉग बड़ा चर्चित हुआ था- “तुम्हारे खाने के नाम ऐसे होते हैं जैसे कोई मिसाइल फटने वाली हो... ढोकला, फाफड़ा, हांडवा, थेपला... ऐसा लगता है जैसे कोई बम ब्लास्ट होने वाला है!"...शायद करीना या इस फिल्म के संवाद लेखक का कभी हिमाचली खानपान से सामना नहीं हुआ होगा वरना वे गुजरात की बजाए हिमाचल की पृष्ठभूमि को फिल्म में रखते। 





बंसी   का  स्वर   मधुर  प्यारा
विहान   का   नीलांबर  पीलाभ   को   समेटे
चुपचाप   आ   जाता  गोधूलि   की  धूल  उड़ाता
वृंदावन  गोकुल का ग्वाला  कनेर  कुण्डल  वाला







तभी दरवाज़े पर जमादारनी आ खड़ी हुई ! 
“बीबी जी, कुछ हो बचा खुचा तो दे दो मुझे भी आज तो बच्चों के मुँह में दाना भी नहीं गया है ! बड़ी आस लेकर आई हूँ !” 
शालिनी की त्योरियाँ चढ़ गईं, “देख नहीं रही हो मेहमान आये हैं घर में ! देवी को न देवता को नकटा भूत को पहले दे दो ! जाओ अभी ! सुबह आना तब देखेंगे !” 
अपूर्वा हतप्रभ हो उठी थी ! उसने आवाज़ देकर रोका जमादारनी को ! 
“रुको अम्माँ !” तीखी नज़रों से शालिनी को घूरते हुए मेज़ पर रखे सारे बचे हुए पकवान उसने एक थैली में डाल कर जमादारनी को दे दिए ! 






सादर समर्पित
वंदन

गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026

4895...कौन ऐसा है जिसके ज़िन्दग़ी की नहीं कोई कहानी...

शीर्षक पंक्ति: आदरणीया शैल सिंह जी की रचना से।

सादर अभिवादन।

गुरुवारीय अंक में पढ़िए पाँच रचनाएँ-

871. सीमाएं

जो मैं कर पाया,

वह बहुत अच्छा था,

पर जो कर नहीं पाया,

उसको कर न पाने से

मैं उदास रहता हूँ।

*****

अहंकार का भोजन दुख है

नहीं सरल समर्पण की राह

पीड़ा से होकर जाती है,

पर इक दिन बन जाती क्रीड़ा

दुनिया सुखमय हो जाती है!

*****

जादुई झोला

नियति उसे

डाँटती-फटकारती है।

एक उम्र तक

दोनों खूब झगड़ते हैं।

फिर

एक दिन

कवि झोले में हाथ डालता है।

*****

खुल कर जियो आज में ज़िन्दगी

कौन ऐसा है जिसके ज़िन्दग़ी की नहीं कोई कहानी

धुवें के छल्ले की तरह उड़ा दें हंस के सारी परेशानी

ज़िन्दगी के तजुर्बात सीखा देते ठोकरों से सावधानी

अपनी मौज में रह सीखें सलीका जीने का आसानी।

*****

व्यक्ति पूजा

व्यक्ति पूजा का जैसा हाल वर्तमान में है, वैसा शायद ही कभी रहा हो ! आज अधिकांश लोग किसी के भी नाम, दाम या व्यक्तित्व के मायाजाल में फंस कर उसके मुरीद बन जाते हैं ! उन्हें सामने वाले की मानसिकता, उसकी नैतिकता, उसके चरित्र से कोई मतलब नहीं होता, उनके लिए अपने आदर्श के मुख से निकली बात ही ब्रह्म-वाक्य होती है !  ये लोग उसके विरुद्ध कोई सच्ची बात भी सुनना भी गवारा नहीं करते ! इतना ही नहीं अपने अगड़े का प्रतिद्वंद्वी उन्हें दुश्मन सरीखा नजर आने लगता है। यह बात आज चहूं ओर नजर आ रही है ! 

  *****

फिर मिलेंगे। 

रवीन्द्र सिंह यादव 


बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

4894 ..नौ दिन माँ के नाम और दसवां दिन विजयादशमी

 सादर अभिवादन


नवरात्रि , नवरात्रि , नवरात्रि , नवरात्रि 
नौ दिन माँ के नाम
और दसवां दिन 
विजयादशमी
सिर्फ नै दिन क्यों ,
सारी उमर माँ के नाम ही तो है
और फिर दीपावली
फिर साल खतम

देखिए रचनाएं...

आज पम्मी जी को आना को आना था
नहीं आई तो...क्या हुआ
हम और आप हैं न
ओह आह क्यों ...




आज एक  बूंद ओस मिली है,
प्यासे को बस बरबस मिली है I 
आज शाख पे कली खिली है,
आज राख में रौशनी मिली है I




हमसे मत पूछो कैसे चलता है आंदोलन सब का
वोटों की बात नहीं है ये किस्सा है हसरत का
जिन्हें काम है काज है करना वो न भीड़ लगाए
जो भीड़ को आग में झोंके उन्हें कौन जिताए





खिलाड़ी को पहली बार अपनी हार का अंदेशा होने लगा। उसने अपने गुंडों को रास्ते में तैनात कर दिया। प्रतिद्वंद्वी जिस विमान से आ रहा था, लैंड होते ही उसे घेर लिया गया और एक गुप्त स्थान पर पहुँचा दिया गया।

निर्धारित समय पर प्रतियोगिता शुरू हुई। प्रतिद्वंद्वी का स्थान खाली था। खिलाड़ी ने स्वायंभू ढंग से खुद को विजेता घोषित कर दिया। उसके पाले हुए लोग तालियाँ बजाने लगे और उसकी 'अजेय छवि' का गुणगान करने लगे।








सादर समर्पित
वंदन

मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026

4893....जग के भीषण कोलाहल में...

मंगलवारीय अंक में
आप सभी का स्नेहिल अभिवादन।
------------

देवी का आह्वान करने से तात्पर्य  मात्र विधि-विधान से मंत्रोच्चार पूजन करना नहीं, अपितु अपने अंतस के विकारों को प्रक्षालित करके दैवीय गुणों के अंश को दैनिक आचरण में जागृत करना है।



व्रत का अर्थ अपनी वृत्तियों को संतुलित करना और उपवास का अर्थ है अपने इष्ट का सामीप्य।
अपने व्यक्तित्व की वृत्तियों अर्थात् रजो, तमो, सतो गुण को संतुलित करने की प्रक्रिया ही दैवीय उपासना है।
देवी के द्वारा वध किये दानव कु-वृत्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं जैसे-
महिषासुर शारीरिक विकार का द्योतक है
चंड-मुंड मानसिक विकार,
रक्तबीज वाहिनियों में घुले विकार,
ध्रूमलोचन दृश्यात्मक वृत्तियों का प्रतिनिधित्व करता है,
शुम्भ-निशुम्भ भावनात्मक एवं अध्यात्मिक।
प्रकृति के कण-कण की महत्ता को आत्मसात करते हुए
ऋतु परिवर्तन से सृष्टि में उत्पन्न सकारात्मक ऊर्जा का संचयन करना और शारीरिक मानसिक एवं अध्यात्मिक विकारों का नाश करना नवरात्रि का मूल संदेश है।


आज की रचनाऍं- 

आज के लिए इतना ही
मिलते हैं अगले अंक में
सादर।

सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

4892..मोही के संग पढ़ते दद्दू, होकर उसके संग...

शीर्षक पंक्ति: आदरणीय विश्वमोहन जी की रचना से।

सादर अभिवादन।

सोमवारीय अंक में पढ़िए पाँच पसंदीदा रचनाएँ-

भार्गव राम खण्डकाव्य - 62

निराश  कर्ण अब जा पहुँचा,

गिरि महेंद्र विप्र राम के पास।

वेश बनाये था सरल विप्र का,

जँह पाया  ज्ञान दिव्यास्त्र का।।

*****

1533 आज की स्त्री / डॉ. कनक लता 

पर उतना ही या उससे भी अधिक निर्मित करती है,

सृजित करती है,

सजाती है, सँवारती है, आकार देती है,

उस पर अपने प्रेम, घृणा, नफ़रत, प्रतिस्पर्धा की मुहर लगाती है,

और लौटा देती है

आपको,

आपके समाज को।

*****

निशान

मिट्टी को छू उस चुनर का श्रृंगार बन गया साँझ का गुलाब l

अँगीठी की राख लिख रही कच्चे घड़े उस चाँद का ही नाम ll

मोरनी सी पायलों की झंकार बज रही उड़ते पतंगों के साथ l

गुल गुलमोहर दरख्तों कर रही आसमाँ चाँदनी की ही बात ll

*****

मोही और दद्दू

किशोर जी के अट्ठाईस बाल गीतों का यह संग्रह सम्वेदना के इसी बीज तत्व को शिशु मन में अँखुआने, उगाने और अगोरने का अनोखा यज्ञ है –

‘हर शब्द में जैसे नयी कहानी,

हर पंक्ति में रंग।

मोही के संग पढ़ते दद्दू,

होकर उसके संग।

*****

 नक्षत्रों ने दीप जलाए: जिज्ञासा सिंह के गीत-संग्रह की समीक्षा

"यही समय है निज निर्णय का

गॉठे ढ़ीली करनी हैं

ले संकल्प सकल कर अर्पित

लंम्बित राह पकड़नी है"

*****

 फिर मिलेंगे। 

रवीन्द्र सिंह यादव 


रविवार, 11 अक्टूबर 2026

4891 ..किससे कहता, मेरी किश्ती को डूबने से बचा लो

 सादर अभिवादन

आज अग्रसेन जयंती है

अग्रकुल शिरामणि महाराजा अग्रसेन
11 अक्टूबर, रविवार (आश्विन शुक्ल प्रतिपदा) को मनाई जा रही है

देखिए रचनाएं....



किससे कहता, मेरी किश्ती को डूबने से बचा लो,
मैं बिगड़ी क़िस्मत और नौका लिए उतर समंदर गया था।
पकड़नी थी मुझे खोई रफ्तार और बिखरे सपने,
जिसे मेरी लापरवाही ही निगल बन भंवर गई थी। 




दोपहर के आसपास
साइकिल की घंटी बजाते
आते थे डाक बाबू..
खाकी यूनिफॉर्म पहने
खाकी टोपी लगाए,
खाकी बस्ते में लिए 
चिट्ठियों के पुलिंदे ।





"बेटे! मैं उसके साथ आ जरूर रहा हूं, पर तुम करना वही जो तुम्हें करना है।”




जब  सबकुछ  प्रतिकूल  नजर  आए 
प्रंशसा - निंदा  का   धुँआ  दर्पण  को  ढ़क  जाए 
नियति  भाग्य   विश्वास  की  परीक्षा  लेने  आए 
तब  जीत  किसकी  होगी  ?  सदैव  तुम्हारी  
हे  मेरे  पथिक  !   




कान्हा मैं Gen zee हूँ, 
मैं मंदिरों से ज़्यादा कैफ़े जाती हूँ। 
कान्हा मैं तुमसे मंदिर में नहीं, 
कैफ़े में मिलना चाहती हूँ।
तुम मंदिर में मिलोगे, मैं तुम्हारी स्तुति करुँगी।
तुम मौन खड़े रहोगे, मैं अपनी अपूर्णताएं गिनूंगी।



सादर समर्पित
वंदन

शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

4890 ..दिल की बातें कह दें, ऐसे लोग कहाँ मिलते हैं .....

 सादर अभिवादन




एक नटखट किरण बच्चे-सी
खड़ी जंगला पकड़ कर,
किलकती है, "मुझे देखो !"
 
साँस रोके ---
बाँह फैलाए खड़ा गुलमुहर ...
कब वह कूद कर आ जाए उसकी गोद में !
-कुंवर नारायण सिंह

देखिए रचनाएं....























 श्वेता और दिग्विजय के सोच में फर्क
किसी नैन सुख को आसानी से नज़र आजाएगा



सादर समर्पित
वंदन


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