पाँच लिंकों का आनन्द
दिन भर ब्लॉगों पर लिखी पढ़ी जा रही 5 श्रेष्ठ रचनाओं का संगम[5 लिंकों का आनंद] ब्लॉग पर आप का ह्रदयतल से स्वागत एवं अभिनन्दन...
निवेदन।
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शनिवार, 31 अक्टूबर 2026
4911 पाश्चात्य देशों में भूतोत्सव (हैलोवीन फेस्टिवल)
शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026
4910...छोड़ जगत यह वापस जाते मधुर याद बनकर रह जाते...
शीर्षक
पंक्ति: आदरणीय अनीता जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
शुक्रवारीय अंक में पढ़िए पाँच
रचनाएँ-
छोड़ जगत यह वापस जाते
मधुर याद बनकर रह जाते!
जग मेले में आकर मिलते
सँग-सँग खुशियां सोग बांटते,
इक दूजे का स्नेह पात्र बन
बढ़ते, पलते, और पनपते!
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ये सुहागिन
औरतों का व्रत
निर्जला, पति की उमर की कामना
थाल पूजा की
सजा कर कर रहीं
पार्वती शिव की सघन आराधना,
आज इनके
पुण्य के फल से
हम मृत्यु से भी नहीं हारेंगे।
*****
तपती दुपहरी के ताप से तुम्हें बचा सकूँ
प्यार से दुलार से तुम्हारा माथा सहला सकूँ
अनगिनत झंझावातों से लड़ सकूँ
सुख दु:ख को सम हो सह सकूँ।
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फ़िल्म जो भारतीय लोकरुचि का अंग बन गई
गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
4909 ..तेरा ओ चुपके से सपना मा आणा
सादर अभिवादन
बुधवार, 28 अक्टूबर 2026
4908..उँगलियों पर पुराना स्पर्श..
भोर वंदन
तिमिर को भेद कर अब
जगमगाने कौन आया है?
बहुत लम्बी निशा बीती
अंधेरी कालिमा वाली
बहुत ही दूर लगती थी
उषा वह लालिमा वाली
मगर अब प्राची को अरुणिम
बनाने कौन आया है?
उर्मिल सत्यभूषण
बुधवार भोर की अभ्यर्थना और हम हाजिर है..
मैंने
स्मृति की तह में हाथ डाला,
उँगलियों पर
एक पुराना स्पर्श लगा रह गया।
उसे धोने के लिए
मैं कुएँ तक गई,
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जहाँ पहुँच जाएँ मतवाली
हर सोसाइटी में महिलाओं का एक न एक ऐसा समूह होता है जो भजन, जाप आदि में रुचि लेता है और उत्सव के दिनों में अधिक सक्रिय हो जाता है। ऐसे ही एक समूह की ...
तैरती हुई रोटियाँ / बलराम अग्रवाल
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पति निकम्मा नहीं था, लेकिन कोरोना के चलते सभी तरह के निर्माण-कार्य बन्द थे। इसलिए घर में ही पड़े रहने को विवश था।
“सुनो,” भूख से विह्वल बच्चों को देखकर एक दोपहर पत्नी ने उससे कहा, “नहर पार वाले खेतों में खीरा, ककड़ी और टमाटर..
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ओ शरद की
पूर्णिमा
स्वागत तुम्हारा है.
आज का
मौसम अलौकिक
और प्यारा है.
खीर के
सुंदर कटोरे
छतों पर रखना,..
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पम्मी सिंह ' तृप्ति '
मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026
4907 ..जीवन में ढलते रंग, जीवन को ढालते रंग
सोमवार, 26 अक्टूबर 2026
4906 ..नहीं छिटकन और विघटन, नहीं अब कुछ और क्षति हो
सादर अभिवादन
रविवार, 25 अक्टूबर 2026
4905...ऐसे स्वाभिमान-शून्यों को, टके को भी न पूछता कोई...
शीर्षक पंक्ति: आदरणीया कविता रावत जी की
रचना से।
सादर अभिवादन।
रविवारीय अंक में पढ़िए पाँच+ रचनाएँ-
की गई छेड़-छाड़ क़ुदरत से,
यूँ ही थोड़ी बिफर गया मौसम।
खिल उठा दिल, जब उनकी यादों का-
सहने-दिल में उतर गया मौसम।
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'ट' से शुरू होने वाले हिंदी मुहावरों की कविता (भाग-1)
ज़िम्मेदारी से मुँह मोड़कर, टाँग पसारकर सोते हैं,
समय निकलने पर फिर अपनी, किस्मत को वो
रोते हैं।
ऐसे स्वाभिमान-शून्यों को, टके को भी न पूछता कोई,
उनकी हस्ती बाज़ार में बिकती, जैसे टके सेर हो कोई।
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तब रोती हुई पोती को समझाते हुए दादी बोली - न तो भारत की सरकार फेल है ना ही
विपक्ष फेल है. फेल केवल भारत की जनता है, जिसमें इस समय नेतृत्व चयन की समझ ही खत्म हो गई है.
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पापा! मुझे क्यूँ नहीं?-एक लघुकथा
817
..भाई इधर तुम्हारे गार्डन में झूले पे बैठा हूँ
"शराबी भी इंसान होते है, बेचारे ने बड़ी उम्मीद से बेल बजायी होगी...
उसे तुम्हारे रूप में भगवान नजर आ रहे होंगे..
उसके बीवी बच्चे घर पर उसका इंतज़ार कर रहे होंगे,
तुम्हें उसकी मदद करनी चाहिये" पत्नी ने समझाया..
पत्नी के समझाने पर पति दोबारा बाहर गया..
तब तक अंधेरा और गहरा हो गया था, बारिश और तेज हो चुकी थी,
कुछ नजर नहीं आ रहा था ..
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फिर मिलेंगे।
रवीन्द्र सिंह यादव






































