कौन जानता है
कि मौन भी एक भाषा होता है—
जिसकी वर्णमाला में
पत्तों की थरथराहट,
धूप की धीमी चाल
और जल की अनकही स्मृतियाँ लिखी होती हैं।
मैंने देखा है—
आख़िर क्या-क्या देखेगी
बेचारी सरकार।
बीता जो वह कब रहा, भावी से अनजान
जो पल अपने सामने, उसकी कीमत जान
यह जग एक सराय है, पक्का नहीं मुकाम
आना-जाना अटल है, रहने का ना काम
बिन बैटरी
रोबोट बना सूर्य
रात व दिन
चकरघिन्नी बन
मन न चाहे
चलता ही रहता,
हे यायावर!
एक दिन तो करो
ज़रा विश्राम
तुमसे ही तो जग
सोता-जागता
"प्रेम वह नहीं है जो आपको किसी का गुलाम बना दे। प्रेम वह है जो आपको एक बेहतर इंसान बना दे। अगर किसी से जुड़कर आप खुद से और इस दुनिया से नफरत करने लगें, तो वह प्रेम नहीं है। प्रेम तो वह है जो आपके भीतर की करुणा को जगा दे।"
और फिर वह रात आई, जब आरव के जीवन का सफर पूरा होने को था। वह अपने बिस्तर पर लेटा था, सांसें उखड़ रही थीं। कमरा अंधेरे में डूबा था। लेकिन तभी आरव को लगा कि उस अंधेरे में एक जानी-पहचानी चमक पैदा हुई है।















