मंगलवारीय अंक में
संक्रमित पेड़ के
एक डाल के कीड़ों
पर कीटनाशक छिड़ककर
ख़ुश होना कि पेड़
संक्रमण मुक्त हुआ
जबकि सच तो जड़
को खोखला कर रहा
भ्रम में जीना
अच्छा लगता है हमें।
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दिन भर ब्लॉगों पर लिखी पढ़ी जा रही 5 श्रेष्ठ रचनाओं का संगम[5 लिंकों का आनंद] ब्लॉग पर आप का ह्रदयतल से स्वागत एवं अभिनन्दन...
मंगलवारीय अंक में
संक्रमित पेड़ के
एक डाल के कीड़ों
पर कीटनाशक छिड़ककर
ख़ुश होना कि पेड़
संक्रमण मुक्त हुआ
जबकि सच तो जड़
को खोखला कर रहा
भ्रम में जीना
अच्छा लगता है हमें।
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शीर्षक पंक्ति: आदरणीया साधना वैद जी
की रचना से।
सादर अभिवादन।
आइए पढ़ते हैं सोमवारीय अंक में पाँच चुनिंदा
रचनाएँ-
कवि दैनिक जीवन के बेहद सूक्ष्म बिंबों से
मनुष्य की अंधी तृष्णा और संतोष के अंतर को उघाड़ते हैं।
"गौरैया" कविता में पक्षी और मनुष्य के
चरित्र की तुलना दृष्टव्य है:
"गौरैया /
रोज आती है / एक मुट्ठी चावल से / बस चार दाने ही उठाती है..."
"आदमी /
चावल के बोरों की गिनती करते हुए / कभी नहीं थकता है" कवि दैनिक जीवन के बेहद सूक्ष्म
बिंबों से मनुष्य की अंधी तृष्णा और संतोष के अंतर को उघाड़ते हैं।
"गौरैया" कविता में
पक्षी और मनुष्य के चरित्र की तुलना दृष्टव्य है:
"गौरैया /
रोज आती है / एक मुट्ठी चावल से / बस चार दाने ही उठाती है..."
"आदमी /
चावल के बोरों की गिनती करते हुए / कभी नहीं थकता है"
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जीवन भी ऐसा ही है
कभी धूप,
कभी घनघोर घटाएँ,
कभी उजास,
कभी अनंत प्रतीक्षा ।
नेह के घट से
अमृत छलकता है,
तो उसी प्रेम की गहराई में
अश्रु भी जन्म
लेते हैं ।
प्रवासी पंछी
अनजान देश में
ढूँढे बसेरा
छूटे माँ बाप
छूटा कुल कुनबा
गाँव शहर
*****
कोई इधर गया, कोई उधर गया
कोई भी न मेरी जानिब हुआ
जब से वो शख़्स साहिब हुआ
*****
इस्मत चुगताई: बागी तेवरों वाली लेखिका, जिन्होंने मौत के बाद दफ्न होने के
बजाय दाह-संस्कार को चुना
शीर्षक पंक्ति: आदरणीया साधना वैद जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
आइए पढ़ते हैं रविवारीय अंक की चुनिंदा पाँच रचनाएँ-
(अंक प्रस्तुतकर्त्ता का रचनाओं की विषय-वस्तु से वैचारिक रूप से सहमत-असहमत होना ज़रूरी नहीं है बल्कि ब्लॉगर डॉट कॉम पर जो स्तरीय एवं पठनीय प्रकाशित हो रहा है वह पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है क्योंकि 'पाँच लिंकों का आनंद' परिवार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करता है।)
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आया सावन, सुन कर पुकार, धरा मुस्काई
फूल ही फूल, चूनर में अपनी, टाँक ले आई
बरसी बूँदें, गरजे घन घटा, तड़पे जिया
हर्षित धरा, लहरा के आँचल, ले अँगड़ाई !
*****
बनाने लगती है
अपने बेटे के लिए
बेसन के लड्डू,
उसकी पसंद की सब्ज़ी,
झाड़ने लगती है
उसका साफ़-सुथरा बिस्तर।
*****
सूखे आषाढ़ के बाद सावन का हरा होना
केवल
कल्पना है
किसान
बोएगा फिर भी धान
इस
उम्मीद में कि भादो जरूर बरसेगा
और
भादो है कि
कई
सालों से या तो खूब बरसा है
या
एकदम ही नहीं
*****
तराश तेरी
तस्वीर कल्पनाओं के तिरपाल पे
प्रायः कर
लेती दीदार तूलिका के इमदाद से ,
समीर के
झोंकों सा सुवास बन आ जा प्रिये
तुझे मिल
जाऊंगी खड़ी तले तरू पलाश के ।
*****
फिर मिलेंगे।
रवीन्द्र सिंह यादव
सादर अभिवादन
चार दिन की बारिश में
गंदला जल हर सीमा लाँघ चुका,
नक्शे पर बनी रेखाएँ डूब गई।
खेत, आँगन, चौखट और सड़क—
सब एक ही विशाल, निष्ठुर नदी बन चुके हैं।
पेड़ों की डालियों से लटके
प्लास्टिक के डिब्बे, कपड़े, और भूली-बिसरी यादें।
दूर बहती जाती है किसी बच्चे की आधी डूबी गेंद,
पीछे छूट जाती है
सालों की हाड़-तोड़ कमाई।
राहत की प्रतीक्षा में टकटकी लगाए
छतों पर कैद इंसान,
जहाँ भूख से ज़्यादा बड़ा है डर—
धीरे-धीरे चढ़ते पानी का।
पानी जब उतरता है,
अपने पीछे छोड़ जाता है
बदबूदार कीचड़, बीमारियॉं,
एक थका हुआ शहर और
शून्य के घेरे में छटपटाता
मजबूर आदमी...।
तन यह माटी, मन पानी सा
दोनों आते-जाते रहते,
आत्म ज्योति से टिके हुए हैं
जिससे हम अनजाने रहते !
मन के पीछे चलता है तन
तन की सेवा में रहता मन,
सेवक बाहर, मालिक भीतर
कैसे पूर्ण लगेगा जीवन !
सादर अभिवादन
।।प्रातःवंदन।।
एक किरण आई छाई,
दुनिया में ज्योति निराली,
रंगी सुनहरे रंग में
पत्ती-पत्ती डाली डाली।
एक किरण आई लाई,
पूरब में सुखद सवेरा,
हुई दिशाएं लाल
लाल हो गया धरा का घेरा।
एक किरण बन तुम भी
फैला दो दुनिया में जीवन..!!
सोहनलाल द्विवेदी
बुधवारिय प्रस्तुति में पढिए..
नीले नभ में देख तिरंगा
हर भारतवासी को गर्व है,
वीरों के बलिदानों से ही
आया आज़ादी का पर्व है !..
✨️
अनवरत यात्रा है,
यह जिंदगी हर पल।
नई आदतों के बनने और
पुरानी आदतों के ढहने की ।
जमती जाती हैं हर,
परवर्ती परत-दर-परत।
✨️
एक लड़की है...
जो हर पाँच मिनट में कुछ न कुछ भूल जाती है,
कभी फ़ोन कहाँ रखा, कभी चश्मा कहाँ छोड़ा,
कभी खुद ही पूछकर अपना सवाल तक भूल जाती है।
✨️
याद तो आई थी माँ
अपने जन्मदिन पर
तुझे याद कर मेरी
आँख भी भर आई थी,
जब यारों ने बाज़ार से लाकर
रेडीमेड केक खिलाया था..
✨️
अच्छा जिसका नसीब होता है, दोस्त उसके करीब होता है,
जो साथ हँसता और रोता है, सच्चा दोस्त वही होता है,
राह में पड़ते हो काँटे अगर, हटा के उन्हें फूल वो बोता है
दिल गर कभी उदास हो तो, साथ अपना भी चैन खोता है,
✨️
।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह ' तृप्ति '..✍️