सादर अभिवादन
पाँच लिंकों का आनन्द
दिन भर ब्लॉगों पर लिखी पढ़ी जा रही 5 श्रेष्ठ रचनाओं का संगम[5 लिंकों का आनंद] ब्लॉग पर आप का ह्रदयतल से स्वागत एवं अभिनन्दन...
निवेदन।
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गुरुवार, 26 मार्च 2026
4693 रीति-नीति हर आयातित है भागें कहां,
बुधवार, 25 मार्च 2026
4692..मतभेद तो होते रहे हैं..
"उषा सी स्वर्णोदय पर भोर
दिखा मुख कनक-किशोर;
प्रेम की प्रथम गदिरतम-कोर
दृगों में दुरा कठोर !
छा दिया यौवन-#शिखर अछोर
रूप किरणों में बोर;
सजा तुमने सुख-स्वर्ण-सुहाग,
लाज-लोहित-अनुराग..!!"
सुमित्रानंदन पंत
सुभाषितवाणी लिए आज फिर हाजिर हूँ बुधवारिय प्रस्तुतिकरण के साथ..
अंधेरे के हिमायती
उजाले के लिए सुरक्षित खेतों में
चुपचाप अंधेरा बो गए।
जब फसल लहलहाई,
तो पहरे पर खड़े कर दिए गए
असंख्य प्रवक्ता—
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इंसान आपस में लड़ते ही रहेंगे |
तब तक , जब तक तीन टांगी वाले एलियंस धरती पर नहीं आ जाते और इंसानो को एक साझा दुश्मन नहीं मिल जाता |
जैसे प्रेम है , भूख है , लालच है , वैसे ही इंसान के वजूद में नफरत भी है |
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करथे अलकरहा बात कभू
दिन ला वो कहिथे रात कभू
जिनगी के पोनी उरकत हे
तँय सूत करम के कात कभू..
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अक्सर देखती हूं कि सोशल मीडिया पर कुछ मित्रों की शिकायत होती है कि लोग सुप्रभात, शुभ रात्रि भेजते रहते हैं और हमें इस बात से बहुत ही चिढ़ होती है। अगर इसे भेजने की जरूरत को समझा जाय तो इस जीवन की आपाधापी में हम न तो अपने बहुत करीबियों से ..
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हमारी सनातन संस्कृति ने विमर्श की परंपरा का पोषण किया है। विवादों के कलह से दूर शास्त्रीय परंपरा में समालोचना ही हमारी आलोचना-संस्कृति रही है। यहाँ परस्पर विरोधी विचारों के संघर्ष नहीं, अपितु समीक्षा का विधान रहा है। शास्त्रार्थ के बिंदु विचारधारा नहीं विचार रहे हैं। मतभेद होते रहे हैं, किंतु मनभेद किंचित नहीं। दर्शनों की धारा में विचार आस्तिक और ..
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।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह ' तृप्ति '..✍️
मंगलवार, 24 मार्च 2026
4691... आरंभ हुआ नवीन अध्याय
कपड़ा, जेवर, शान-शौक और सुविधाओं से वंचित, जीवन की गाड़ी को मरुस्थल में भी हँस कर खींचने वाली ये ग्रामीणाएं जिस सहिष्णुता से जीवन की विसंगतियों से जूझती हैं ,सम्बन्धों का उत्सव भी उतने ही उल्लास से मनातीं है । स्नेह का ऐसा उदार और गहरा रूप अन्यत्र मिलना दुर्लभ है । हालाँकि उनके स्नेह व उदारता की कभी कोई कहानी नही बनती ।
सोमवार, 23 मार्च 2026
4690...छाये हैँ परमाणु के बादल, आज दहशत में मानवता...
शीर्षक पंक्ति:आदरणीय अशर्फी लाल मिश्र जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
सोमवारीय अंक में पढ़िए पाँच पसंदीदा रचनाएँ-
छाये हैँ परमाणु के बादल,
आज दहशत में मानवता।
किस क्षण टकरायें बादल,
अरु हो जाये घनघोर वर्षा।।
*****
पानी के घूंट हलक से उतारती है,
उठकर खिड़की तक जाती है,
चुपके से गली में झाँकती है,
सब कुछ ठीक पाती है लड़की।
*****
जनश्रुति के कोहरे में घिरा, माडूं का नीलकंठ मंदिर (वीडियो सहित)
इस मंदिर के गर्भ-गृह में स्थित शिवलिंग का एक प्राकृतिक झरने से सतत जलाभिषेक होता रहता है, जो मंदिर को खास बनाता है। अब हिंदुओं का कोई खास धर्म स्थान हो और विधर्मियों की कुदृष्टि उस पर ना पड़े, यह तो हो ही नहीं सकता, सो यहां भी वही सब दोहराया गया जो पहले से होता आया है ! साथ ही हमारे तथाकथित इतिहासकारों ने अपने कुठिंत विचारों से इसके बारे में भी सदा की तरह एक मनघड़ंत कहानी गढ़ी और फैला रखी है ! उसीको यहां के स्थानीय निवासी और गाइड वगैरह आने वाले पर्यटकों-श्रद्धालुओं को सुनाते-बताते रहते हैं !*****1499-जल-दिवस
6झील है सोई
कविमन खोजता
रूपक कोई।
7
खिली है धूप
स्वर्णमयी हो रहा
झील का रूप।
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रविवार, 22 मार्च 2026
4689 ...मेरे चारों ओर बिखर गया था प्रेम का लाल रंग
सादर अभिवादन
शनिवार, 21 मार्च 2026
4688 इतिहास केवल मंच को नहीं देखता, वह बंकरों के अंधेरे में छिपी कायरता को भी पढ़ना जानता है
सादर अभिवादन
"महाराज एक वातानुकूलित अभेद्य बंकर की ओर भागे. जाते-जाते उन्होंने
चिल्लाकर वह अंतिम पाखंड किया, "मैं ध्यान मुद्रा में हूँ! सैनिकों की बलवृद्धि और
उनकी विजय के लिए साधना-रत हूँ."
शुक्रवार, 20 मार्च 2026
4687.... चुनौतियों से डिगता नहीं ध्रुव तारा
यदि उस शुभ्र पुष्प पर मन अटकातो बदल जाएगी सोच की धाराहर नाव ढूँढती है सुरक्षित किनाराचुनौतियों से डिगता नहीं ध्रुव तारा




















