सादर अभिवादन
आज छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस है।
'पाँच लिंकों का आनन्द' परिवार की ओर से
ढेरों शुभकामनाएँ!
लंबे आंदोलनों और संघर्ष के उपरांत मध्य प्रदेश राज्य से विभक्त होकर एक नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य बनाये जाने की घोषणा तत्कालीन अटल बिहारी बाजपेयी सरकार द्वारा की गयी जिसे छत्तीसगढ़ निवासियों ने तहेदिल से स्वीकार करते हुए केन्द्र सरकार का धन्यवाद किया था। छतीसगढ़ केवल अपनी प्राकृतिक संपदा के लिये ही नहीं जाना जाता बल्कि आदिवासी संस्कृति और छत्तीसगढ़ी बोली के साथ-साथ अनेक सांस्कृतिक उपलब्धियों के लिये विख्यात है। हिंदी भाषा के स्वनामधन्य श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल जी ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवांवित किया है। खनिज संपदा से समृद्ध यह प्रदेश अपनी अनुपम हरीतिमा के लिये सुविख्यात है। नक्सल समस्या का अंत भी सन् 2025-26 मे समूल उन्मूलन हो चुका है
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रविवारीय अंक में
पढ़िए पाँच चुनिंदा रचनाएँ-
किसी रोचक कहानी की तरह
मेरी कल्पनाओं को, मेरे सपनों को
कल्पना के पंख देकर
उड़ान भरने के लिए
आसमान में पहुँचा देती हो!
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गुंजित
मउमाछी की गुनगुन
पुष्प-
पुष्प के कर्णों में
जैसे
तुम खुसफुस हो करते
मधु
मिश्रित से वर्णो में
झंकृत
सुर में होकर गुम
पथ पर
बिखरे हृदय कुसुम
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अभिलाषा उत्सर्ग होना तिरंगे कफ़न के लिए
शहीदों की शहादत का, क़र्ज़ उतारने के लिए
वीर
प्रसूता वसुधा का, फ़र्ज़ निबाहने के लिए ,
सुख-शान्ति
अमन रहे चमन में वतन के लिए
अभिलाषा
उत्सर्ग होना तिरंगे कफ़न के लिए ।
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“मुझे अपनी जमा की हुई याद
वापस चाहिए।” उसने कहा।
“लेकिन क्यों? आपने तो दर्द से छुटकारा पाने के लिए उसे जमा किया था।”
अजित की आँखें भर आईं। “दर्द चला गया, पर उसके साथ मेरा बेटा भी चला गया।
अब मैं रोता नहीं, लेकिन मुस्कुराता भी नहीं। समझ आया कि कुछ दु:ख बोझ नहीं होते, वे हमारे अपनों के आखिरी निशान होते हैं।”बैंक ने उसकी याद लौटा
दी।
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“अभी शहर से गाँव जा रहे
हर मुश्किल से लड़ने बाबू
!
ख़त लिखना फिर आ जाएंगे
देश की मूरत गढ़ने बाबू !”
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