सादर अभिवादन
फिर वे बारी-बारी से अपनी जगह बदल रही थीं ताकि हर किसी को आराम मिल सके।
दिन भर ब्लॉगों पर लिखी पढ़ी जा रही 5 श्रेष्ठ रचनाओं का संगम[5 लिंकों का आनंद] ब्लॉग पर आप का ह्रदयतल से स्वागत एवं अभिनन्दन...
सादर अभिवादन
सादर अभिवादन
।।प्रातःवंदन।।
अलि रचो छंद !
आज कण-कण कनक कुंदन,
आज तृण-तृण #हरित चंदन,
आज क्षण-क्षण चरण वंदन
विनय अनुनय लालसा है।
आज वासन्ती उषा है।
अलि रचो छंद !
सोहनलाल द्विवेदी
बुधवारिय प्रस्तुतिकरण के क्रम को आगे बढाते हुए..
जब नयनों में नींद नहीं थी
उसका ही तो ख़्वाब बसा था,
सुमधुर स्मृतियों के पत्तों से
मन का आँगन पूर्ण भरा था !
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अस्सी के दौर की लोकप्रिय फिल्म थोड़ी सी बेवफाई फिल्म का प्रसिद्ध गीत "मौसम मौसम... लवली मौसम..." लिखते समय गुलज़ार साहब निश्चित ही शिमला या ऐसे ही किसी पहाड़ी इलाके से गुजरे होंगे क्योंकि मौसम को महसूस किए बिना उसे शब्दों में उतारना तभी संभव है जब आपने उसका पूरा लुत्फ़ उठाया हो । बहरहाल, यह गीत इन दिनों शिमला की फिज़ाओं पर बिल्कुल सटीक बैठता है..
✨️
बादल भरी
उमस से भरपूर सुबह।
छोटे बच्चे
अपनी मस्तियों को
लगा चुके हैं तह ..
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लूडो के सांप-सीढ़ी सी ज़िंदगी...
कभी-कभी ज़िंदगी सांप-सीढ़ी के खेल जैसी होती है।
एकबारगी दो-तीन चाल में
हम सांपों से बचकर,
छोटी-बड़ी सीढ़ियां चढ़कर
लाल होने तक पहुंच जाते
और रख चुके हैं
बीते जून ..
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।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह ' तृप्ति '..✍️
मंगलवारीय अंक में
जीना आसान नहीं है,
यह कॉंटों का बिछौना है
मखमली कोई दालान नहीं है।
हर सुबह एक नया इम्तिहान लाती है,
उम्मीदों की पोटली पीठ पर बांधे,
हमें दौड़ना है अंधाधुंध
जिसकी कोई अंतिम रेखा ही नहीं।
ख्वाब कांच की तरह टूटते हैं,
और उनकी किरचें पैरों में नहीं,
सीधे रूह में चुभती हैं।
अपनों के बदले चेहरे,
और वक्त की बेरुखी,
कभी-कभी भीतर तक सब सुखा देती है।
पर शायद,
इस मुश्किल में ही जिंदगी का असली स्वाद है।
आंसुओं से भीगे चेहरे पर
जब एक छोटी सी मुस्कान खिलती है,
जीना आसान तो नहीं है, बिल्कुल नहीं,
लेकिन इस कांटों भरे रास्ते पर
अपने पैरों के निशान छोड़ जाना ही...
जिंदगी है शायद...।
अलगनी पर दिन भर टँगी
धूप सेंकती रही कमीज़
जेब में रखी छाँह कमाई
रात भर चैन की नींद आई ।
भोर उजियारी चुनौती लाई
आँचल में तारे भर ले आई
तारों को बो कर धूप उगाई
छाँव बिन धूप रास न आई ।
उस दिन भी रोज की तरह नशे में झूमता शराबी आया और मंदिर का घंटा बजाने लगा। घंटा बजाने से पहले वह एक क्षण के लिए रुका। उसने एक नजर सामने देखा और फिर घंटा बजाने लगा। फिर वही सारी क्रिया दुहराई जो वह रोज करता था। मंदिर से निकलने से पहले उसने गणेश जी की ओर देखा और बोला, छोटू पप्पा आएं तो बता देना कि अंकल आए थे। इतना कहकर वह निकल गया।
सादर अभिवादन
सादर अभिवादन
सादर अभिवादन