शीर्षक पंक्ति: आदरणीया एडवोकेट शालिनी कौशिक जी की
रचना से।
सादर अभिवादन।
आइए पढ़ते हैं रविवारीय अंक में पाँच पसंदीदा रचनाएँ-
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विप्लव और विध्वंस की
भ्रम-द्वंद और संघर्ष की
दुर्भावनाएँ अति हुई है
तनाव-हिंसा और बैर-द्वेष की।
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यदि आप हमारे देश के उस कठिन समय तथा विभाजन के पूर्व एवं
पश्चात् के समयकाल को ठीक से जानना चाहते हैं तो यह काल्पनिक कहानी कहने वाली
पुस्तक किसी भी इतिहास की पुस्तक से अधिक उपयोगी हो सकती है क्योंकि यह एक
स्वतंत्रता-सेनानी द्वारा अपने भोगे हुए यथार्थ के आधार पर लिखी गई है जिसका
दृष्टिकोण पूर्णरूपेण निष्पक्ष एवं वस्तुपरक है। सच पूछिये तो यह एक कालजयी कृति
है। इसका अंग्रेज़ी अनुवाद भी 'This
is not that dawn' के नाम से प्रकाशित हो चुका है। किसी ऐतिहासिक दस्तावेज़ के
समकक्ष होने के बावजूद यह केवल शुष्क इतिहास नहीं है वरन एक मनोरंजक पुस्तक है
जिसमें साहित्य के सभी रसों को समाहित करती हुई पूरी तरह से मानवीय कहानी कही गई
है।
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आयोग ने इन निर्देशों को सख्ती से लागू करने के लिए राज्य के मुख्य सचिव को
निर्देशित किया है। महिला सुरक्षा के लिए ये निर्देश सराहनीय कहे जा सकते हैं, इसके अतिरिक्त महिला आयोग को
मन्दिरों और बाजारों की व्यवस्था पर भी ध्यान देना चाहिए क्योंकि महिलाओं और
बच्चियों का वहां भी पूजा पाठ और सामान लाने के लिए काफी आवागमन रहता है और समय
समय पर इन स्थानों पर भी महिलाओं और बच्चियों के साथ बदसलूकी के समाचार आते रहते
हैं. ऐसे में इन स्थानों पर कम से कम महिला पुलिस की ड्यूटी अनिवार्य की जानी
चाहिए.
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फिर मिलेंगे।
रवीन्द्र सिंह यादव


















