सादर अभिवादन
पाँच लिंकों का आनन्द
दिन भर ब्लॉगों पर लिखी पढ़ी जा रही 5 श्रेष्ठ रचनाओं का संगम[5 लिंकों का आनंद] ब्लॉग पर आप का ह्रदयतल से स्वागत एवं अभिनन्दन...
निवेदन।
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शनिवार, 6 जून 2026
4765 ..हिंदू-मुस्लिम पुड़िया लेकर, भानुमती ये खोले पिटारा।
शुक्रवार, 5 जून 2026
4764...प्रेम वह नहीं जो आपको किसी का गुलाम बना दे
कौन जानता है
कि मौन भी एक भाषा होता है—
जिसकी वर्णमाला में
पत्तों की थरथराहट,
धूप की धीमी चाल
और जल की अनकही स्मृतियाँ लिखी होती हैं।
मैंने देखा है—
आख़िर क्या-क्या देखेगी
बेचारी सरकार।
बीता जो वह कब रहा, भावी से अनजान
जो पल अपने सामने, उसकी कीमत जान
यह जग एक सराय है, पक्का नहीं मुकाम
आना-जाना अटल है, रहने का ना काम
बिन बैटरी
रोबोट बना सूर्य
रात व दिन
चकरघिन्नी बन
मन न चाहे
चलता ही रहता,
हे यायावर!
एक दिन तो करो
ज़रा विश्राम
तुमसे ही तो जग
सोता-जागता
"प्रेम वह नहीं है जो आपको किसी का गुलाम बना दे। प्रेम वह है जो आपको एक बेहतर इंसान बना दे। अगर किसी से जुड़कर आप खुद से और इस दुनिया से नफरत करने लगें, तो वह प्रेम नहीं है। प्रेम तो वह है जो आपके भीतर की करुणा को जगा दे।"
और फिर वह रात आई, जब आरव के जीवन का सफर पूरा होने को था। वह अपने बिस्तर पर लेटा था, सांसें उखड़ रही थीं। कमरा अंधेरे में डूबा था। लेकिन तभी आरव को लगा कि उस अंधेरे में एक जानी-पहचानी चमक पैदा हुई है।
गुरुवार, 4 जून 2026
4763 ..नौतपा शेष हो गया बस कुछ दिनों की बात है
सादर अभिवादन
बस कुछ दिनों की बात है
बुधवार, 3 जून 2026
4762..देखा जाए तो...
।।प्रातःवंदन।।
" पंथ पर चलना तुझे तो मुस्कुराकर चल मुसाफिर!
वह मुसाफिर क्या जिसे कुछ शूल ही पथ के थका दें?
हौसला वह क्या जिसे कुछ मुश्किलें पीछे हटा दें?
जिन्दगी की राह पर केवल वही पंथी सफल है,
आँधियों में, बिजलियों में जो रहे अविचल मुसाफिर!
पंथ पर चलना तुझे तो..."
गोपालदास नीरज
इसी वैचारिक रूप को संजोए चलते हैं बुधवारिय प्रस्तुतिकरण पर..
निकट भविष्य के श्रम-संघर्ष से,
तुम बिल्कुल ही अनजान हो।
या स्वयं को समझो पूर्ण समर्थ,
या चंद दिवस के मेहमान हो।
भूतकाल का अनुभव पथदर्शक,
वर्तमान कठिन या आसान हो।
मगर भविष्य कब ठहरा है,..
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दो जून की या छह जून की...कौन सी रोटी है अच्छी!!
आज दो जून है तो सुबह से शाम तक सोशल मीडिया में ‘दो जून की रोटी’ छाई हुई है। हर कोई दो जून की रोटी का महत्व/संघर्ष गिनवा रहा है लेकिन मेरी समस्या यह है कि बदलते वक्त में किसे सही माने.. दो जून की रोटी को या छह जून की रोटी को। अब आप सोच रहे होंगे कि दो जून तो ठीक है पर ये छह जून क्या बला है?..
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देखा जाए तो.............
देखा जाए तो
बातें वही हैं
हम सबकी
जिन्हें कोई एक कहता है
दूसरा भी
अपने शब्द देकर
सिर्फ दोहराता है।
देखा जाए तो ..
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फूलों की चाह है तो काँटों को चुनना होगा
उड़ने की चाह है तो पंखों को खुलना होगा ..
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एकता व्यास की कहानी ‘स्लीपिंग पार्टनर’
यह कहानी अपने शीर्षक के कारण प्रथम दृष्टया पाठक को एक ऐसे भ्रम में डालती है, मानो यह किसी यौन सम्बन्ध अथवा देहात्मक निकटता की कथा हो। किंतु कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, यह स्पष्ट होता जाता है कि लेखिका का सरोकार शरीर से अधिक उस गहरे अकेलेपन से है, जो आधुनिक जीवन-शैली और बदलते पारिवारिक ढाँचों ने बुज़ुर्गों के हिस्से में छोड़ दिया है। यही इस कहानी की सबसे बड़ी सफलता भी है कि वह एक भ्रामक शीर्षक के भीतर अत्यंत मार्मिक मानवीय संवेदना को छिपाकर रखती है।..
।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह ' तृप्ति '..✍️
मंगलवार, 2 जून 2026
4761...झूठे आश्वासनों का थक्का
ख़ुद को तपाना है
जीवन हरेक के योगदान से बना है
एक घास का तिनका भी उतना ही ज़रूरी है
जितना आकाश में कोई वृक्ष तना है
एक पत्थर भी नदी के तल को
मज़बूत बनाना है
थी शहर के हर एक गलि
कूचों में, वही आज
चेहरा छुपाए
बैठा है
गुमनाम दरीचों में,
आसपास, मिलता
नहीं किसी
को
सोमवार, 1 जून 2026
4760...दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे...
शीर्षक पंक्ति: आदरणीया फ़िज़ा जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
सोमवारीय अंक में पढ़िए पाँच रचनाएँ-
तिलचट्टे तिलचट्टे तिलचट्टे बस तिलचट्टे
इंसानों में इंसान तो पाया नहीं जाता ...

















