।।प्रातःवंदन।।
" अरुणिमा आते ही देखो,
विहग वृन्द उड़ान भरते,
शक्ति पंखों में समेटे,
नाप लेते दिशा चारों।
अब उठो कुंठा बुहारो।"
डॉ.मृदुल कीर्ति
आइए एक बार फिर साहित्यिक कृतियों से परिचित होतें हैं..✍️
आ ! नंगे पैर रेत पर चलें
खुशबू से हवाओं में घुलें,
बाँसुरी की तान पर झूमें
आहिस्ता से फूलों को चूमें,..
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रामकथा को आधार बना कर अभिव्यक्ति के कौन-कौन से अनूठे आयाम का संधान संभव है इसका उदाहरण है भगवान सिंह की यह पुस्तक ‘अपने अपने राम‘। राम का चरित्र वर्ण कुव्यवस्था के खिलाफ और समावेशी राजनय के व्याख्याकार ..
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झूठे-झूठे सपने, झूठे-झूठे वादे
मन ख़ुद से करता है
सच्ची-सच्ची बातों, सच की राहों
से शायद डरता है !..
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अरसे
से गुम थी
पर अंततः
एक तबेले में
खुद अधमरी होते हुए भी
अधमरी गाय को
घास डालती मिली—
शिक्षा।
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जालों से उलझनों के ,जैसे हो उबर जाएं
चौराहे से निकलकर , कोई तो डगर पाएं ।
थामे रहें न छोड़ें कभी हौसलों का दामन ।
चाहे भले ही कितनी चलती रहें हवाएं ।
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।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह ' तृप्ति '..✍️








