सादर अभिवादन
पाँच लिंकों का आनन्द
दिन भर ब्लॉगों पर लिखी पढ़ी जा रही 5 श्रेष्ठ रचनाओं का संगम[5 लिंकों का आनंद] ब्लॉग पर आप का ह्रदयतल से स्वागत एवं अभिनन्दन...
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शनिवार, 9 मई 2026
4737 ...मुल्क का आम जन बहरा है। हो गई पंगु, पन्नों पर लेखनी
शुक्रवार, 8 मई 2026
4736...कुछ कविताओं में जले भात की गंध लौटती है...
शीर्षक पंक्ति: आदरणीया अनीता सैनी जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
शुक्रवारीय अंक में पढ़िए पसंदीदा रचनाएँ-
कुछ कविताओं में
जले भात की गंध लौटती है,
कुछ में
अधपके दानों की कड़वाहट।
धीमे-धीमे देर तक
सबसे अधिक जलता है,
और सबसे कम दर्ज होता है।
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बेमिसाल नादानियाँ तेरी गिली रेत बनाते महल चित्र आकारों की l
अमिट छाप मोहर बन गयी इस शागिर्द के बचपन मुलाक़ातों की ll
तू ही मेरा आसमाँ तू ही चाँदनी इस बंजर पहेली आरज़ू की l
अनछुआ स्पर्श भीगते बारिश तेरी बनाई कागज कश्ती की ll
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वेद प्रकाश शर्मा और सुभाष चंद्र बोस
क्रांति दल अंग्रेज़ सरकार
के पिट्ठू बने हुए लोगों के पीछे पड़ा रहता है। स्वभावतः वह गगन के पिता के भी पीछे
पड़ता है। इधर एक अनजान व्यक्ति जो स्वयं को बिच्छू के नाम से संबोधित करता है, भी गगन के पिता के पीछे
पड़ जाता है। गगन स्वयं क्रांति दल में सम्मिलित है। एक दिन अचानक उसकी मुलाक़ात धरा
से भी हो जाती है। इधर अंग्रेज़ सरकार नेताजी सुभाष चंद्र बोस को नज़रबंद कर लेती है
तथा वे देश से भागकर विदेश जाने की योजना बनाते हैं जिसमें क्रांति दल का सरदार
उन्हें सहयोग देता है। देश से बाहर निकलते समय सरदार के कहने से वे गगन और धरा को
भी साथ ले जाते हैं। कथानक के अंत में एक ओर तो गगन एवं धरा सुभाष बाबू के साथ-साथ
ही विमान-दुर्घटना में फंसकर (सुभाष बाबू को बचाते हुए) शहीद हो जाते हैं जबकि
दूसरी ओर संपूर्ण क्रांति दल अंग्रेज़ों के साथ हुई मुठभेड़ में समाप्त हो जाता है।
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चले मरुत उनचास... इन उनचास मरुत का क्या अर्थ है
दरअसल, जल के भीतर जो वायु है
उसका वेद-पुराणों में अलग नाम दिया गया है और आकाश में स्थित जो वायु है उसका नाम
अलग है। अंतरिक्ष में जो वायु है उसका नाम अलग और पाताल में स्थित वायु का नाम अलग
है। नाम अलग होने का मतलब यह कि उसका गुण और व्यवहार भी अलग ही होता है। इस तरह वेदों
में 7 प्रकार की वायु का वर्णन
मिलता है।
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हमने कहा-"पुलिस वाले तो मना कर रहें हैं फिर पैसे
क्यों..?"आपको जाना है या नहीं
"वह बोला।जाना तो था ,साथ में और लोग भी थे ,दे दिए चार सौ रूपए और इस
बार पुलिसवालों ने नहीं रोका तब सारा माजरा समझ आ गया। भ्रष्टाचार हमारे जीवन में
इस तरह समा गया है कि हर स्तर पर यह ना जाने कितने रूपों में दिखाई देता है।
गुरुवार, 7 मई 2026
4735 ...' जनरल चौधरी लाहौर में प्रवेश कर रहे हैं। '
सादर अभिवादन

आज ही के दिन अलेक्जेंडर ग्राहम बेल को
अपने आविष्कार का पेटेंट मिला
जिसे उन्होंने टेलीफ़ोन (दूरभाष) का नाम दिया था।
उसे बुझाने की ताकत आपमें नहीं है."
एक साल का करोड़ों का मुनाफा छोड़ने के लिए तैयार हैं?"
बुधवार, 6 मई 2026
4734..कोई न कोई तो बात है..
मंगलवार, 5 मई 2026
4733 ...मेरा गाँव अब गाँव कम, खंडहर अधिक नज़र आने लगा है
सादर अभिवादन
श्रम मंत्री 6 या 7 मई को मिलने का समय दें.”
सोमवार, 4 मई 2026
4732..वे लहराना चाहते हैं
।।प्रातःवंदन। ।
जीवन में हजारों लड़ाइयां जीतने से बेहतर स्वयं पर विजय प्राप्त कर लो। फिर जीत हमेशा तुम्हारी होगी, जिसे तुमसे कोई नहीं छीन सकता।"
गौतम बुद्ध
प्रस्तुतिकरण लिए आज फिर हाजिर हूं..लिंक कुछ इस प्रकार से है..✍️
आज मजदूर दिवस है,
पर
मजदूर को
आज भी काम पर जाना है—
उसे यह दिन
कैलेंडर में नहीं,
पेट में महसूस होता है।
✨️
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया दिल्ली ! देश की राजधानी। इसकी लाखों कहानी । एक दिल्ली में अनेक दिल्ली है। हवाई अड्डे से निकल कर कुलीन क्षेत्र की एक दिल्ली है। लुटियंस जोन में एक दिल्ली है। झुग्गी झोपड़ियों में एक अलग दिल्ली। रेलवे स्टेशन पर एक अलग दिल्ली। और प्रेस क्लब में एक अलग दिल्ली..! खैर, बड़े भाई पवन भैया के सानिध्य में प्रेस क्लब जाना हुआ। पहली बार कई चीजों को देखा। एक अलग अनुभूति हुई। जैसे देश की राजधानी के इस हृदयस्थली में देश, विदेश की चिंताओं में उलझते हुए भी घूंट घूंट में चिंता मुक्त होने के कौशल में सभी सिद्धहस्त ..!
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जबे भैयाजी खों बेताल मिलो
- डॉ. (सुश्री) शरद सिंह
‘‘देख तो बिन्ना का हो गओ तुमाए भैयाजी खों?’’ भौजी घबड़ानी सी मोसे बोलीं।
मैंने देखी के भैयाजी को मों पीलो सो दिखा रओ तो औ बे कोनऊं सोंस-फिकर में डूबे हते..
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सभ्यता को नष्ट करने की जिद्द पाले
वे लहराना चाहते हैं अपना झंडा
पहाड़ों पर
रेगिस्तानों में..
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धन्यवाद
पम्मी सिंह ' तृप्ति '..✍️
रविवार, 3 मई 2026
4731...सभी कोचिंग सेंटर, जिम, बुटीक, और डांस क्लास में CCTV कैमरे और DVR सिस्टम लगाना अनिवार्य है...
शीर्षक पंक्ति: आदरणीया एडवोकेट शालिनी कौशिक जी की
रचना से।
सादर अभिवादन।
आइए पढ़ते हैं रविवारीय अंक में पाँच पसंदीदा रचनाएँ-
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विप्लव और विध्वंस की
भ्रम-द्वंद और संघर्ष की
दुर्भावनाएँ अति हुई है
तनाव-हिंसा और बैर-द्वेष की।
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यदि आप हमारे देश के उस कठिन समय तथा विभाजन के पूर्व एवं
पश्चात् के समयकाल को ठीक से जानना चाहते हैं तो यह काल्पनिक कहानी कहने वाली
पुस्तक किसी भी इतिहास की पुस्तक से अधिक उपयोगी हो सकती है क्योंकि यह एक
स्वतंत्रता-सेनानी द्वारा अपने भोगे हुए यथार्थ के आधार पर लिखी गई है जिसका
दृष्टिकोण पूर्णरूपेण निष्पक्ष एवं वस्तुपरक है। सच पूछिये तो यह एक कालजयी कृति
है। इसका अंग्रेज़ी अनुवाद भी 'This
is not that dawn' के नाम से प्रकाशित हो चुका है। किसी ऐतिहासिक दस्तावेज़ के
समकक्ष होने के बावजूद यह केवल शुष्क इतिहास नहीं है वरन एक मनोरंजक पुस्तक है
जिसमें साहित्य के सभी रसों को समाहित करती हुई पूरी तरह से मानवीय कहानी कही गई
है।
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आयोग ने इन निर्देशों को सख्ती से लागू करने के लिए राज्य के मुख्य सचिव को
निर्देशित किया है। महिला सुरक्षा के लिए ये निर्देश सराहनीय कहे जा सकते हैं, इसके अतिरिक्त महिला आयोग को
मन्दिरों और बाजारों की व्यवस्था पर भी ध्यान देना चाहिए क्योंकि महिलाओं और
बच्चियों का वहां भी पूजा पाठ और सामान लाने के लिए काफी आवागमन रहता है और समय
समय पर इन स्थानों पर भी महिलाओं और बच्चियों के साथ बदसलूकी के समाचार आते रहते
हैं. ऐसे में इन स्थानों पर कम से कम महिला पुलिस की ड्यूटी अनिवार्य की जानी
चाहिए.
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फिर मिलेंगे।
रवीन्द्र सिंह यादव










