निवेदन।


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शनिवार, 9 मई 2026

4737 ...मुल्क का आम जन बहरा है। हो गई पंगु, पन्नों पर लेखनी

 सादर अभिवादन


असीमित शब्दों से भी पूरी
नहीं होती मां की परिभाषा
कई निराशाओं को धूमिल कर देती
मां की एक आशा
बिन कहे, बिन सुने समझ लेती
बच्चों के मन की भाषा

कल अंतर्राष्ट्रीय मातृ दिवस है
रचनाएं



मुल्क का आम जन बहरा है।
हो गई पंगु, पन्नों पर लेखनी,
संशय का तम गहरा है।
साफ साफ कह न! सच बोल!
कि स्याही सूख रही,
क्योंकि
कलम पर पहरा है।




ब्रह्मा जी ने ग्यारह हज़ार वर्षों तक ध्यान करने के पश्चात अपनी आँखें खोलीं, तो उन्हें अपने समक्ष एक तेजस्वी पुरुष दिखाई दिया, जिसके हाथ में कथित तौर पर कलम और स्याही की दवात थी। ब्रह्मा जी की काया से उत्पन्न होने और उसमें गुप्त रूप से स्थित रहने के कारण उस पुरुष को तथाकथित चित्रगुप्त और उनके वंशजों को तथाकथित कायस्थ कहा गया है। इस प्रकार मान्यता है कि कायस्थ जाति की उत्पत्ति भगवान ब्रह्मा रूपी नर के काया से हुई है।




ख़ुद ढूँढ के पीना जो समुंदर की तलब है,
नदिया को नमक डाल के खारा न करो तुम.

अब हो जो गया इश्क़ तो फिर क्या ही करोगे,
पर कर के वही काम दुबारा न करो तुम.




कुलकर्णी जी ने चव्हाण साहब की और देखा. तब खुद चव्हाण साहब बोल पड़े. “ लिटिगेशन कॉस्ट एप्रूव करने का काम आपका है, आप जो भी फरमा देंगे वह यूनियन को मंजूर होगा.”लॉ सेक्रेटरी ने एमडी की और मुखातिब होकर कहा. “मिस्टर एमडी, आप यह कॉस्ट कब तक अदा कर देंगे?”
“सर हम विवाद को शेष नहीं रखना चाहते. हम अभी दस मिनट में चैक आपको सौंप देंगे, 
आप इन्हें तुरन्त दे सकते हैं.” एमडी के चेहरे पर शांति थी, अब वह कुछ राहत महसूस कर रहा था. 
तभी कुलकर्णी जी बोल पड़े.“एमडी साहब, अभी तो ट्रक सिस्टम की समाप्ति और फेयर वेजेज का विवाद इंडस्ट्रियल ट्रिबुनल में शेष है. बेहतर है कि उसे यूनियन से बात करके सैटल कर लें.”
“कुलकर्णी जी, आपकी बात सही है. मिस्टर एमडी, आपको इस पर सोचना चाहिए. मैं कुलकर्णी जी को जानता हूँ. उस मामले में आपको निगोशिएट करने में कोई परेशानी नहीं होगी. सचिव ने सलाह दी.
“जरूर, हम कोशिश करेंगे. यदि आपकी इजाजत हो तो मैं बाहर जाकर अपने असिस्टेंट को चैक बनाने के लिए कह दूँ. बात यहीं खत्म हो तो बेहतर है.” एमडी ने लॉ सेक्रेटरी को कहा. चैम्बर में मौजूद वकील भट्ट सहित सभी मुस्कुरा उठे.






सादर समर्पित
सादर वंदन

शुक्रवार, 8 मई 2026

4736...कुछ कविताओं में जले भात की गंध लौटती है...

शीर्षक पंक्ति: आदरणीया अनीता सैनी जी की रचना से।

सादर अभिवादन।

शुक्रवारीय अंक में पढ़िए पसंदीदा रचनाएँ-

भात की गंध

कुछ कविताओं में

जले भात की गंध लौटती है,

कुछ में

अधपके दानों की कड़वाहट।

 पर है

धीमे-धीमे देर तक

सबसे अधिक जलता है,

और सबसे कम दर्ज होता है।

*****

आलिंगन

बेमिसाल नादानियाँ तेरी गिली रेत बनाते महल चित्र आकारों की l

अमिट छाप मोहर बन गयी इस शागिर्द के बचपन मुलाक़ातों की ll

तू ही मेरा आसमाँ तू ही चाँदनी इस बंजर पहेली आरज़ू की l

अनछुआ स्पर्श भीगते बारिश तेरी बनाई कागज कश्ती की ll

*****

वेद प्रकाश शर्मा और सुभाष चंद्र बोस

क्रांति दल अंग्रेज़ सरकार के पिट्ठू बने हुए लोगों के पीछे पड़ा रहता है। स्वभावतः वह गगन के पिता के भी पीछे पड़ता है। इधर एक अनजान व्यक्ति जो स्वयं को बिच्छू के नाम से संबोधित करता है, भी गगन के पिता के पीछे पड़ जाता है। गगन स्वयं क्रांति दल में सम्मिलित है। एक दिन अचानक उसकी मुलाक़ात धरा से भी हो जाती है। इधर अंग्रेज़ सरकार नेताजी सुभाष चंद्र बोस को नज़रबंद कर लेती है तथा वे देश से भागकर विदेश जाने की योजना बनाते हैं जिसमें क्रांति दल का सरदार उन्हें सहयोग देता है। देश से बाहर निकलते समय सरदार के कहने से वे गगन और धरा को भी साथ ले जाते हैं। कथानक के अंत में एक ओर तो गगन एवं धरा सुभाष बाबू के साथ-साथ ही विमान-दुर्घटना में फंसकर (सुभाष बाबू को बचाते हुए) शहीद हो जाते हैं जबकि दूसरी ओर संपूर्ण क्रांति दल अंग्रेज़ों के साथ हुई मुठभेड़ में समाप्त हो जाता है।

*****

चले मरुत उनचास... इन उनचास मरुत का क्या अर्थ है

दरअसल, जल के भीतर जो वायु है उसका वेद-पुराणों में अलग नाम दिया गया है और आकाश में स्थित जो वायु है उसका नाम अलग है। अंतरिक्ष में जो वायु है उसका नाम अलग और पाताल में स्थित वायु का नाम अलग है। नाम अलग होने का मतलब यह कि उसका गुण और व्यवहार भी अलग ही होता है। इस तरह वेदों में 7 प्रकार की वायु का वर्णन मिलता है।

*****

नाशिक-शिर्डी-औरंगाबाद

हमने कहा-"पुलिस वाले तो मना कर रहें हैं फिर पैसे क्यों..?"आपको जाना है या नहीं "वह बोला।जाना तो था ,साथ में और लोग भी थे ,दे दिए चार सौ रूपए और इस बार पुलिसवालों ने नहीं रोका तब सारा माजरा समझ आ गया। भ्रष्टाचार हमारे जीवन में इस तरह समा गया है कि हर स्तर पर यह ना जाने कितने रूपों में दिखाई देता है।

 *****

फिर मिलेंगे। 

रवीन्द्र सिंह यादव 


गुरुवार, 7 मई 2026

4735 ...' जनरल चौधरी लाहौर में प्रवेश कर रहे हैं। '

 सादर अभिवादन

7 मई ..

आज ही के दिन अलेक्जेंडर ग्राहम बेल को
अपने आविष्कार का पेटेंट मिला
जिसे उन्होंने टेलीफ़ोन (दूरभाष) का नाम दिया था।


रचनाएं



एमडी ने कुछ कहना चाहा, पर मुख्यमंत्री ने हाथ के इशारे से उसे चुप करा दिया. "मुझे आपके घाटे की बैलेंस शीट में कोई दिलचस्पी नहीं है. मेरी दिलचस्पी अक्टूबर में होने वाले चुनावों में है. अगर ये 350 मजदूर बेरोजगार हुए, तो अंधेरी पूर्व से लेकर आपके इंडस्ट्रियल बेल्ट तक जो आग लगेगी,
उसे बुझाने की ताकत आपमें नहीं है."
मुख्यमंत्री की आवाज़ अब और ठंडी और मारक हो गई. "मैनेजमेंट को तरजीह चाहिए थी, वह मैंने दे दी—सीधे आपको यहाँ बुलाकर. अब फैसला आपका है. या तो यूनियन के साथ बैठकर समझौता कीजिए और दीवाली तक कारखाना चालू रखिए, वरना मैं अभी इसी वक्त इस एप्लिकेशन को रिजेक्ट करने का आदेश दे रहा हूँ. आज ही आपको कम्युनिकेशन मिल जाएगा. और याद रखिए, एक बार रिजेक्ट हुआ तो अगली एप्लिकेशन के लिए पूरे एक साल का इंतजार करना होगा.
एक साल का करोड़ों का मुनाफा छोड़ने के लिए तैयार हैं?"
एमडी के माथे पर पसीना चमकने लगा. उसका सारा अहंकार भाप बनकर उड़ रहा था.




रामकृष्ण ठाकुर की महिमा 
फिर से वापस आए,
अमार सोनार बांग्ला फिर से 
बच्चा बच्चा गाए,
हर बेटी की करे सुरक्षा 
माँ काली विकराल.





अंततः
हर उम्मीद से परे जाकर
उसने खुद का हाथ पकड़ा
और
आहिस्ता-आहिस्ता
सशरीर खड़ा हो गया




राम !  आपका कल्याण हो, 
अतीव प्रसन्न हूँ मैं आप पर 
लक्ष्मण से भी संतुष्ट बहुत, 
मिलने आये मुझे यहाँ पर 

लंबा मार्ग तय करके आये, 
कष्ट और थकावट होगी 
दूर थकावट करने सीता, 
हृदय से उत्सुक जान पड़ती 

हैं अति ही सुकुमारी सीता, 
इससे पहले कष्ट न जाने 
पति प्रेम से प्रेरित होकर, 
वन प्रांतर में कई दुख झेले 




छः बजे के स्थान पर सुबह 5 बजे पाकिस्तान पर हमला कर दिया । क्योंकि उनकी नजर में यही सही समय था, छः बजे तो सूर्योदय हो जाएगा, लोग जाग जायेंगे। सुबह पांच बजे का समय एकदम उपयुक्त था - सब लोग सो रहे थे – वे लोग हक्के बक्के हो गए । और उसने जैसा कहा था, बैसा ही हुआ - उसने पूरे पाकिस्तान को थरथरा दिया । देखते ही देखते भारतीय सेनायें पाकिस्तान से सबसे बड़े शहर लाहौर से सिर्फ 15 मील दूर रह गईं |
तब तक राजनेता क्या कर रहे थे ? पूरी रात नेहरू और उनकी कैबिनेट विचार विमर्श में उलझी रही - ऐसा करने का क्या नतीजा होगा, बैसा करने से क्या होगा और सुबह 6 बजे तक भी वे किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच पाए । तभी उन्होंने रेडियो पर सुना - 'जनरल चौधरी लाहौर में प्रवेश कर रहे हैं।'
यह स्थिति राजनेताओं के लिए असहनीय थी | 


सादर समर्पित
सादर वंदन

बुधवार, 6 मई 2026

4734..कोई न कोई तो बात है..

प्रातःवंदन 
चलिए आज सीधे बुधवारिय प्रस्तुतिकरण पर..✍️


इक ही धुन बजती धड़कन में

इक ही राग बसा कण-कण में,

एक ही मंजिल, एक रस्ता..
✨️

***

लग रही है बेलगाम बोली 
राजपथ असहाय है
आज़ादी पूर्व का एहसास हो रहा
राजपथ बेचैन है
चंद सरमायेदारों  
✨️

“कारखाने की घड़ियों की टिक-टिक मेरे सिर में हथौड़ों की तरह बज रही थी। मेरे पेडू का दर्द किसी तेज़ धार वाले चाकू की तरह उसे भीतर से काटता लग रहा था। मेरे माथे पर पसीने की बूँदें चमक रही थीं, जबकि मैं काँपते हाथों से सिलाई मशीन पर कपड़े की तह लगा रही थी। मैंने हिम्मत जुटाकर सुपरवाइजर के पास जाने का फैसला किया। ‘स्साब, साहब! बहुत तेज़ दर्द है... क्या मैं आज एक घंटे जल्दी जा..
✨️
 किसी को चलाती है ख़ुशी , किसी को सब्र चलाता है ,किसी को ज़िद चलाती है 

पी कर के कोई ईंधन जैसे सब चल पड़ते हैं 

मुझे मेरा ग़मे-यार चलाता है

मंगलवार, 5 मई 2026

4733 ...मेरा गाँव अब गाँव कम, खंडहर अधिक नज़र आने लगा है

 सादर अभिवादन



रचनाएं
 



यूनियन सरकार से मांग करेगी कि ई सी आई की क्लोजर की परमिशन वाले आवेदन को तुरंत निरस्त किया जाए. यदि फैक्ट्री के मालिक क्लोजर चाहते हैं तो यूनियन के साथ समझौते के माध्यम से ही संभव हो सकता है, अन्यथा नहीं. लेबर कमिश्नर खुद मजदूरों के बीच जाकर उनके 'ट्रक सिस्टम' के 
दावों की जांच करें और रिपोर्ट सरकार को दें.
 यदि 8 मई तक ठोस जवाब नहीं मिलता, तो 11 मई को श्रम मंत्री के निवास पर प्रदर्शन और घेराव होगा.

कुलकर्णी जी ने कहा कि, “मैं व्यक्तिगत रूप से प्रयास करूंगा कि
श्रम मंत्री 6 या 7 मई को मिलने का समय दें.”

मीटिंग खत्म हुई, तो रात के साढ़े आठ बज रहे थे. कुलकर्णी जी ने प्रिया के कंधे पर हाथ रखा. "प्रिया, तुमने आज हमारी लड़ाई का रूप बदल दिया है, जो अधिक मानवीय है. लेकिन याद रखना, जो रास्ता हमने अब चुना है वह कांटों भरा है. मैनेजमेंट और लॉ डिपार्टमेंट अब और भी शातिराना चालें चलेंगे."

प्रिया ने अपनी डायरी बैग में रखी. "सर, 6 दिन बचे हैं. 11 मई तक हमें कुछ न कुछ हासिल करना होगा.




जब फसल लहलहाई,
तो पहरे पर खड़े कर दिए गए
असंख्य प्रवक्ता—
अंधेरे के फायदे गिनाने के लिए।
उसकी फैलती विकरालता देख
उजाले भी सहम गए,
सामने आने से कतराने लगे।
मौका देखकर
उजाले को “अफवाह” करार दिया गया,
और हर दीये की लौ पर
ठोंक दी गई मुहर—
“एक्सपायरी डेट”  की।




मुर्दा दिलों में उमंग है बिहू में,
बेरंग चेहरों पर रंग है बिहू में।

ढोल जो बजा ,तो थिरकने लगे पाँव,
शराब में नहीं, जो नशा है बिहू में।

भटकते रहोगे जंगलों में कब तक,
लौट आओ बस्ती में इस साल बिहू में।




चिलचिलाती धूप में 
घंटों श्रम करता 
काट कर चट्टानों को 
सुरंगें बिछाता
श्रमिक रखता नींव 
आलीशान अट्टालिकाओं की 
श्रावक घंटों ध्यान साधना कर 
अपने भीतर जाता 
प्रेम और करुणा के 
स्रोत छिपे हैं जहाँ 



धक-धक, धीरे-धीरे, साथ-साथ, कुछ-कुछ
लखि-लखि, तीरे-तीरे, सांस-सांस, सचमुच

आप कई आवरण के प्रकरण परे हैं विद्यमान
थाप जिंदगी के कई आवरण धरे हैं निदान
मति-मति, दौड़े-दौड़े, आस-आस, हँसमुख
लखि-लखि, तीरे-तीरे, सांस-सांस सचमुच





सांसों की माला
धड़कन की सरगम 
टूट गई तो चल दिए
कहाँ गए, कौन गया
वेद-पुराण न कुछ कह सके





मेरा गाँव अब गाँव कम,
खंडहर अधिक नज़र आने लगा है;
हर दूसरे घर ने नींव को नंगा कर दिया है।
खिड़कियाँ अंदर से बंद हैं,
पर समय ने उन्हें बाहर से खोल दिया है;
दरवाज़े पर ताला किसी
बूढ़े के हाथ में लाठी की तरह पड़ा है।




सादर समर्पित
सादर वंदन

सोमवार, 4 मई 2026

4732..वे लहराना चाहते हैं

 ।।प्रातःवंदन। ।

जीवन में हजारों लड़ाइयां जीतने से बेहतर स्वयं पर विजय प्राप्त कर लो। फिर जीत हमेशा तुम्हारी होगी, जिसे तुमसे कोई नहीं छीन सकता।"

 गौतम बुद्ध

प्रस्तुतिकरण लिए आज फिर हाजिर हूं..लिंक कुछ इस प्रकार से है..✍️

औज़ार नहीं, इंसान हैं ये


आज मजदूर दिवस है,

पर

मजदूर को

आज भी काम पर जाना है—

उसे यह दिन

कैलेंडर में नहीं,

पेट में महसूस होता है।

✨️

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया दिल्ली ! देश की राजधानी। इसकी लाखों कहानी । एक दिल्ली में अनेक दिल्ली है। हवाई अड्डे से निकल कर कुलीन क्षेत्र की एक दिल्ली है। लुटियंस जोन में एक दिल्ली है। झुग्गी झोपड़ियों में एक अलग दिल्ली। रेलवे स्टेशन पर एक अलग दिल्ली। और प्रेस क्लब में एक अलग दिल्ली..! खैर, बड़े भाई पवन भैया के सानिध्य में प्रेस क्लब जाना हुआ। पहली बार कई चीजों को देखा। एक अलग अनुभूति हुई। जैसे देश की राजधानी के इस हृदयस्थली में देश, विदेश की चिंताओं में उलझते हुए भी घूंट घूंट में चिंता मुक्त होने के कौशल में सभी सिद्धहस्त ..!

✨️

बतकाव बिन्ना की  

जबे भैयाजी खों बेताल मिलो  

- डॉ. (सुश्री) शरद सिंह

‘‘देख तो बिन्ना का हो गओ तुमाए भैयाजी खों?’’ भौजी घबड़ानी सी मोसे बोलीं।

मैंने देखी के भैयाजी को मों पीलो सो दिखा रओ तो औ बे कोनऊं सोंस-फिकर में डूबे हते..

✨️

सभ्यता को नष्ट करने की जिद्द

 सभ्यता को नष्ट करने की जिद्द पाले

वे लहराना चाहते हैं अपना झंडा

पहाड़ों पर

रेगिस्तानों में..

✨️

धन्यवाद

पम्मी सिंह ' तृप्‍ति '..✍️

रविवार, 3 मई 2026

4731...सभी कोचिंग सेंटर, जिम, बुटीक, और डांस क्लास में CCTV कैमरे और DVR सिस्टम लगाना अनिवार्य है...

शीर्षक पंक्ति: आदरणीया एडवोकेट शालिनी कौशिक जी की रचना से।

सादर अभिवादन।

आइए पढ़ते हैं रविवारीय अंक में पाँच पसंदीदा रचनाएँ-

असमाप्त इंतज़ार--

आज भी है जारी रेत के नीचे जल की खोज,
कई दशक गुज़रे लेकिन हालत न सुधर पाई,

झर चुके महुआ पलाश, प्राण में अधूरी प्यास,
ज़रा कोई बताए जीने की ख़बर कहाँ से आई,

*****

वर्तमान का व्यथित समय ये

विप्लव और विध्वंस की

भ्रम-द्वंद और संघर्ष की

दुर्भावनाएँ अति हुई है

तनाव-हिंसा और बैर-द्वेष की।

*****

बेड़ियाँ

दो मई को दोपहर बाद ही असिस्टेंट सेक्रेटरी लेबर के यहाँ से कार्यवाही समाप्त हुई थी. उसी दिन उसे सेक्रेटरी को रिपोर्ट देनी थी लेकिन तीन मई की दोपहर ट्रैकिंग से पता लगा कि रिपोर्ट सुबह सेक्रेटरी को मिली थी और शाम को यह जानकारी कि फाइल को सेक्रेटरी ने राय देने के लिए लॉ सेक्रेटरी को भेज दिया है. अगले दो दिन अवकाश होने के कारण फाइल को वहीं रहना था, जिससे ट्रैकिंग से कुछ हासिल नहीं हो सकता था.

*****

विभाजन के पहले और बाद

यदि आप हमारे देश के उस कठिन समय तथा विभाजन के पूर्व एवं पश्चात् के समयकाल को ठीक से जानना चाहते हैं तो यह काल्पनिक कहानी कहने वाली पुस्तक किसी भी इतिहास की पुस्तक से अधिक उपयोगी हो सकती है क्योंकि यह एक स्वतंत्रता-सेनानी द्वारा अपने भोगे हुए यथार्थ के आधार पर लिखी गई है जिसका दृष्टिकोण पूर्णरूपेण निष्पक्ष एवं वस्तुपरक है। सच पूछिये तो यह एक कालजयी कृति है। इसका अंग्रेज़ी अनुवाद भी 'This  is  not  that  dawn' के नाम से प्रकाशित हो चुका है। किसी ऐतिहासिक दस्तावेज़ के समकक्ष होने के बावजूद यह केवल शुष्क इतिहास नहीं है वरन एक मनोरंजक पुस्तक है जिसमें साहित्य के सभी रसों को समाहित करती हुई पूरी तरह से मानवीय कहानी कही गई है।

*****

 अब महिलाओं का होगा नया संसार

आयोग ने इन निर्देशों को सख्ती से लागू करने के लिए राज्य के मुख्य सचिव को निर्देशित किया है। महिला सुरक्षा के लिए ये निर्देश सराहनीय कहे जा सकते हैं, इसके अतिरिक्त महिला आयोग को मन्दिरों और बाजारों की व्यवस्था पर भी ध्यान देना चाहिए क्योंकि महिलाओं और बच्चियों का वहां भी पूजा पाठ और सामान लाने के लिए काफी आवागमन रहता है और समय समय पर इन स्थानों पर भी महिलाओं और बच्चियों के साथ बदसलूकी के समाचार आते रहते हैं. ऐसे में इन स्थानों पर कम से कम महिला पुलिस की ड्यूटी अनिवार्य की जानी चाहिए.

*****

फिर मिलेंगे।

रवीन्द्र सिंह यादव


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