।।प्रातःवंदन।।
जंग… आखिर देती ही क्या है?
जंग जीतने वाले शायद जश्न पर हार तो इंसानियत की होती है..बचे मासूम चेहरों को न राजनीति समझ आती, न ही सरहदें…उन्हें बस विवशता भरी नजर और भूख लगती है और थोड़ा सा सुकून की आस।बहुत दुखद है यह देखना..
यह गुंजार कहाँ से आयी
चौंक पड़ा, मैं बोल उठा,
कँपने लगा हृदय, हरि जाने
मैं भय-विह्वल डोल उठा !
माखनलाल चतुर्वेदी
इन्हीं कशमकश के बीच बुधवारिय प्रस्तुतिकरण लिए आज फिर हाजिर हूं..
कितनी पूनम जागेंगे हम
कितने सूरज और देखने,
छुपा गर्भ में यह भावी के
किंतु सजा सकते हैं सपने !
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अस्पताल के बाहर कार और बाइक के स्टैंड अलग अलग बने थे और दोनों तरफ वाहन खड़े थे कि इतने में हड़बड़ी में एक साइकिल वाला आया और जल्दी से साइकिल खड़ी करके अंदर की तरफ भागा।
जल्दी में साइकिल डगमगा गयी,
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आज इंसान खुद को भगवान बना बैठा है
अब AI (आर्टिफिशियल इन्टेलिजेंस) का जमाना है। बनाने वाले ने तो न जाने क्या सोच कर बनाया होगा मगर इस्तेमाल करने वालों के तो क्या कहने।
बनाया तो भगवान ने भी ..
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पर आ न सकी कभी इकट्ठी..
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तुम भुला दो मुझे बचपन की तरह
मिलेंगे अब तो सिर्फ़ दुश्मन की तरह
तुम भुला दो मुझे बचपन की तरह
।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह ' तृप्ति '..✍️


















