पाँच लिंकों का आनन्द
दिन भर ब्लॉगों पर लिखी पढ़ी जा रही 5 श्रेष्ठ रचनाओं का संगम[5 लिंकों का आनंद] ब्लॉग पर आप का ह्रदयतल से स्वागत एवं अभिनन्दन...
निवेदन।
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सोमवार, 30 मार्च 2026
4697 ..कुछ उनकी सुनी होती, कुछ अपना कहा होता.
रविवार, 29 मार्च 2026
4696..यादों की महफ़िल में फिर कहीं सितार बजे
सादर अभिवादन
29th March Special Day
29 मार्च को रविवार के दिन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है।
29 मार्च का इतिहास भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि 1857 में इसी दिन मंगल पांडे ने बैरकपुर में ब्रिटिश शासन के खिलाफ पहली सशस्त्र क्रांति की चिंगारी सुलगाई थी। इसके अलावा, 1953 में हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे ने माउंट एवरेस्ट पर फतह हासिल की थी।
हर साल 29 मार्च को 'विश्व पियानो दिवस' के रूप में भी मनाया जाता है
यही प्रक्रिया तो प्रकृति की भी है, तब इंड्यूस्ड क्यों?
क्षमता उन बच्चों से अधिक होती है जो हाइजीन का बहुत अधिक पालन करते हैं।
यह निर्धन देशों के लिए प्रकृति की निःशुल्क व्यवस्था है।
यह बिल गेट्स प्रायोजित जैविक युद्ध तो नहीं?
शनिवार, 28 मार्च 2026
4695 ..होश है या कोई ख़ुमारी है, है सुकूँ या कि बेक़रारी है,,,
सादर अभिवादन
और मार्च मास की विदाई
इस मार्च में, अप्रैल मास में होने वाले उत्सव
इन दो-तीन दिनो ं सम्पन्न हो गया
शुक्रवार, 27 मार्च 2026
4694...उस अनचाही युद्ध की दास्तां...
शीर्षक पंक्ति: आदरणीय दिग्विजय अग्रवाल जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
शुक्रवारीय अंक में पढ़िए पाँच पसंदीदा रचनाएँ-
जब प्रिया ने बताया कि वह कोटा से है तो कहने लगे, “बिटिया आप तो हमारी भतीजी हुई, कोटा और हमारा गाँव दोनों
चम्बल किनारे हैं, बस पचास किलोमीटर की दूरी है.” उन्होंने थाली के पैसे लेने
से भी इन्कार कर दिया. “आज पैसे नहीं लूंगा, फिर कभी आओगी तब देखूंगा.” रामजी ने खुद को प्रिया का
चाचा घोषित कर दिया. कहने लगे, “बिटिया आते रहना अच्छा लगेगा.” रामजी ने उससे पैसे नहीं ही
लिए. इतनी दूर ऐसा अपनापन देख उसकी आँखें नम हो गईं.
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सौरभ की मां को जरूर उसके बारे में सब कुछ पता था। लेकिन उन्होंने कभी सौरभ के पिता को इस बारे मे कुछ नहीं बताया था और आगे भी बताने का कोई इरादा नहीं रखती थी।
अब जबकि पूरे तीन साल बाद सौरभ लौटकर शहर वापस आ चुका था, तब सौरभ की मां को लगा कि शायद अब वह अपना अतीत भूल चुका होगा और एक नई शुरुआत करने के लिए वह वापस आया है।
लेकिन उसने तो पहले ही दिन अपनी मां के विचारों को गलत साबित कर दिया था।
हमने तो ज़िन्दगी को बड़े करीब से देखा
है
शायद इतनी खूबसूरत मुस्कान भी न होती
गुरुवार, 26 मार्च 2026
4693 रीति-नीति हर आयातित है भागें कहां,
सादर अभिवादन
बुधवार, 25 मार्च 2026
4692..मतभेद तो होते रहे हैं..
"उषा सी स्वर्णोदय पर भोर
दिखा मुख कनक-किशोर;
प्रेम की प्रथम गदिरतम-कोर
दृगों में दुरा कठोर !
छा दिया यौवन-#शिखर अछोर
रूप किरणों में बोर;
सजा तुमने सुख-स्वर्ण-सुहाग,
लाज-लोहित-अनुराग..!!"
सुमित्रानंदन पंत
सुभाषितवाणी लिए आज फिर हाजिर हूँ बुधवारिय प्रस्तुतिकरण के साथ..
अंधेरे के हिमायती
उजाले के लिए सुरक्षित खेतों में
चुपचाप अंधेरा बो गए।
जब फसल लहलहाई,
तो पहरे पर खड़े कर दिए गए
असंख्य प्रवक्ता—
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इंसान आपस में लड़ते ही रहेंगे |
तब तक , जब तक तीन टांगी वाले एलियंस धरती पर नहीं आ जाते और इंसानो को एक साझा दुश्मन नहीं मिल जाता |
जैसे प्रेम है , भूख है , लालच है , वैसे ही इंसान के वजूद में नफरत भी है |
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करथे अलकरहा बात कभू
दिन ला वो कहिथे रात कभू
जिनगी के पोनी उरकत हे
तँय सूत करम के कात कभू..
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अक्सर देखती हूं कि सोशल मीडिया पर कुछ मित्रों की शिकायत होती है कि लोग सुप्रभात, शुभ रात्रि भेजते रहते हैं और हमें इस बात से बहुत ही चिढ़ होती है। अगर इसे भेजने की जरूरत को समझा जाय तो इस जीवन की आपाधापी में हम न तो अपने बहुत करीबियों से ..
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हमारी सनातन संस्कृति ने विमर्श की परंपरा का पोषण किया है। विवादों के कलह से दूर शास्त्रीय परंपरा में समालोचना ही हमारी आलोचना-संस्कृति रही है। यहाँ परस्पर विरोधी विचारों के संघर्ष नहीं, अपितु समीक्षा का विधान रहा है। शास्त्रार्थ के बिंदु विचारधारा नहीं विचार रहे हैं। मतभेद होते रहे हैं, किंतु मनभेद किंचित नहीं। दर्शनों की धारा में विचार आस्तिक और ..
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।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह ' तृप्ति '..✍️
मंगलवार, 24 मार्च 2026
4691... आरंभ हुआ नवीन अध्याय
कपड़ा, जेवर, शान-शौक और सुविधाओं से वंचित, जीवन की गाड़ी को मरुस्थल में भी हँस कर खींचने वाली ये ग्रामीणाएं जिस सहिष्णुता से जीवन की विसंगतियों से जूझती हैं ,सम्बन्धों का उत्सव भी उतने ही उल्लास से मनातीं है । स्नेह का ऐसा उदार और गहरा रूप अन्यत्र मिलना दुर्लभ है । हालाँकि उनके स्नेह व उदारता की कभी कोई कहानी नही बनती ।


















