निवेदन।


समर्थक

रविवार, 25 अगस्त 2019

1500....क्या खोया,क्या पाया !


जय मां हाटेशवरी.....
मन हर्षित है......
क्योंकि आज हमारे इस ब्लॉग के.....

1500 अंक हो चुके हैं......
सदस्यों की संख्या भी बढ़ती जा रही है......
भविष्य में भी......
आप सब पाठकों का इसी तरह सहयोग व स्नेह मिलेगा......
कल जन्मष्टमी थी.....
श्रीकृष्ण जी के जीवनदर्शन की......
आज के समाज को बहुत आवश्यक्ता है......
अब पेश है.....
आज के लिये मेरी पसंद.....

नँद नन्दन कित गये
My photo
भ्रमित भई सुनि भँवरे की गुंजन,
ढूंढे सघन करील की कुंजन।
रे मनमोहन तेरे दर्शन बिन,


लिप्सा के शूल मुझे नहीं चुभते -

मुठ्ठी भर मजदूरी से
उदर आग बुझ जाती
चूं चूं करते चूजों देख
तपिस विपन्नता की बड़ जाती

चिकना पथ बनाते बनाते
खुरदरी देह दुखने लगी है
पथ के कंकर नगें पावों को
फूल जैसे लगने लगी है

हृदयी फूल पलाश का !
मेरी फ़ोटो
देखते ही देखते वो राख
शिराओं में पसरने लगी ,और
दहकती नारंगी घुमावदार
चपल पंखुड़ियाँ मानो
मरे सांप सी निस्तेजित हो गयीं 
प्राणरहित, रागरहित, बदरंग !
आखिर कब सह पाया है
स्नेही जीवंत किंशुक
तुषार निठुर विराग का
खिल खिल के बस युहीं
क्षय होता गया

यक्ष प्रश्न

मुरलीधर द्वापर में बड़े-बड़े लीला करने वाले।
कमलनाथ हर क्षण कृष्णा का साथ देने वाले।
सास-ननद का रूप बदल जाओ या सम्बोधन,
निर्गुण तुम्हें ढूंढ रहे अज्ञानी सर्वेश्वर बनने वाले।

देखो ! चरित्र-हत्या मत करो

देखो ! अहिल्या का सतीत्व समय के बहाव में और निखरता गया |
लाँछन न समझो जीवन में मिली अवेहलना को,
देखो !अवगुणों के थे वे सूखे पत्ते समय के साथ झड़ते गये,
बुद्ध ने त्यागा वैभव जली यशोधरा जीवनपर्यंत ,
देखो ! त्याग की बने दोनों मिशाल हमें धैर्य का पाठ पढ़ाते गये |

कृष्ण का प्रेम
मेरी फ़ोटो
घर परिवार,नाते-रिश्तेदारों
अड़ोसी- पड़ोसी
और देश को
वास्तविक प्रेम का पाठ पढ़ाओ
ताकि इस देश के लोग
जीवन में
वास्तविक प्रेम का अर्थ समझ सकें---

क्या खोया,क्या पाया !

घनघोर अंधेरा,
मूसलाधार बारिश,
तूफान,
और उफनती यमुना ...
मैं नारायण बन गया,
अपने लिए,
बाबा वासुदेव और माँ देवकी के लिए ।

धन्यवाद

शनिवार, 24 अगस्त 2019

1499... का 99

1499 के लिए इमेज परिणामहार्दिक आभार मुझे झेल लेने के लिए...

99 के लिए इमेज परिणाम 
पर आउट होने वाली
अनुभूति नहीं बता सकती... जाइए 


99 के लिए इमेज परिणाम
दिल्‍ली दल,होशंगाबादी समूह,एकलव्‍य परिवार तथा
विभिन्‍न स्‍थानों से आए सभी साथियों ने तुम्‍हारा स्‍नेह आमंत्रण सुना 
और प्रसन्‍न हुए। कहते हैं, ‘अपनी फसल लहलहाते देख 
कोई इतना प्रसन्‍न नहीं होता, जितना दूसरे की बर्बाद होते देख होता है।’ 
सभी प्रसन्‍न हैं कि एक और फंसा।

99

99 के लिए इमेज परिणाम

समय अवधि का मकसद जमीन के बार-बार यूज और
उसके ट्रांसफर पर लगाम लगाना है। शुरुआती दिनों में
इसे एक सुरक्षित समय अवधि के विकल्प के तौर पर देखा गया था,
जो लीज लाइफ को कवर करता है। साथ ही यह संपत्ति के
मालिकाना हक को सुरक्षित रखने के लिए सही अवधि मानी गई।
99 के लिए इमेज परिणाम
इहां तक ले की करज-पताई खोजी के भी रमायन
अपनी बलभर आपन इज्जत ढाँपें। ओन्ने चिखुरी के त अलगहीं हाल रहे।
अरे इहाँ तक की उ सबेरे-सबेरे उठी के अपनी मलिकाइन की संघे
रमायन की घरे चली जाँ अउरी चाय-वोय पियले की बादे अपनी घरे लौटें।
चिखुरी की घरे दाली-दही-तिउना कबो महीना-महीना तक नसीब नाहीं होखे
 जबकि रमायन की घरे एक-दू जूनी आँतर देके दाली-तिउना आदी बनिए जा।

निन्यानवे


99 के लिए इमेज परिणाम
एक राजा अपने महल के ऊपर मंत्री के साथ बैठा था।
महल के नीचे एक मजदूर गरीब पति-पत्नी रहते थे।
खूब हँसते तथा प्रसन्न थे। राजा ने मंत्री से कहा कि हमारे पास अनंत संपदा है,
सभी साधन हैं, परंतु जैसे यह जोड़ा खिलखिलाकर हँसता है
हमें कभी ऐसी हँसी नसीब नहीं हुई। क्या कारण है?

निन्यानवे

99 के लिए इमेज परिणाम

प्रात:काल का समय था. एक बलिष्ठ व्यक्ति पेड़ के नीचे बैठा हुआ था.
उसी समय एक  मठ के महंत जी हाथी पर सवार होकर उधर से निकले.
क्ति को जाने क्या सूझी कि उछल कर हाथी की पूंछ पकड़ ली.
पकड़ इतनी मजबूत थी कि हाथी एक पग भी आगे न चल सका.
सबके सामने बड़ी हंसी हुई कि एक व्यक्ति ने हाथी को रोक दिया.
मठ लौटने पर महंतजी बड़े बेचैन थे.  वह परेशान थे कि
कहीं कल भी वह व्यक्ति  ऐसी हरकत न दोहरा दे ?

><

Ninyaanve1499 के लिए इमेज परिणाम
है न हर्ष की बात .... झूमे नाचे गायें जीने की सौगात

हम-क़दम के अगले अंक (85 वें ) का विषय है -
शिला 
इस विषय पर आप अपनी रचनाएँ हम तक आगामी शनिवार 24 अगस्त 2019 सायं 3:30 बजे तक इस ब्लॉग पर बायीं ओर दिये गये संपर्क फ़ॉर्म के ज़रिए भेज सकते हैं- 

इस विषय पर 
उदाहरणस्वरूप प्रस्तुत है कविवर जयशंकर प्रसाद के महाकाव्य 'कामायिनी' से एक अंश-   

'हिमगिरि के उत्तुंग शिखर पर,
बैठ शिला की शीतल छाँह
एक पुरुष, भीगे नयनों से
देख रहा था प्रलय प्रवाह |

नीचे जल था ऊपर हिम था,
एक तरल था एक सघन,
एक तत्व की ही प्रधानता
कहो उसे जड़ या चेतन |

दूर दूर तक विस्तृत था हिम
स्तब्ध उसी के हृदय समान,
नीरवता-सी शिला-चरण से
टकराता फिरता पवमान |

तरूण तपस्वी-सा वह बैठा
साधन करता सुर-श्मशान,
नीचे प्रलय सिंधु लहरों का
होता था सकरूण अवसान।

उसी तपस्वी-से लंबे थे
देवदारू दो चार खड़े,
हुए हिम-धवल, जैसे पत्थर
बनकर ठिठुरे रहे अड़े।

अवयव की दृढ मांस-पेशियाँ,
ऊर्जस्वित था वीर्य्य अपार,
स्फीत शिरायें, स्वस्थ रक्त का
होता था जिनमें संचार।

चिंता-कातर वदन हो रहा
पौरूष जिसमें ओत-प्रोत,
उधर उपेक्षामय यौवन का
बहता भीतर मधुमय स्रोत।'

-जय शंकर प्रसाद 

आज बस यहीं तक 


शुक्रवार, 23 अगस्त 2019

1998....तब्दीलियों की बड़ी भूख है ज़िंदगी में

स्नेहिल नमस्कार
---------
मानव शरीर का अस्तित्व मिट जाता है
और 
आत्मा और कर्म सदैव 
स्मृतियों में अमर हो जाते है

 सूचना मिली है कि अयन प्रकाशन, नयी दिल्ली के मुखिया भूपी सूद नहीं रहे।

हंसमुख, मिलनसार और निहायत शरीफ़ इन्सान भूपी जी ने आज सुबह सीने में दर्द की शिकायत की और कुछ ही वक़्फ़े में उनकी आत्मा शरीर छोड़ गयी।
आदरणीय प्रभा जी को इन दुख के पलों में सांत्वना। भूपी जी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना।
इस वर्ष प्राकृतिक आपदा के रुप में बाढ़ के प्रलय से 
लगभग समूचा देश बेहाल है 
और जहाँ बाढ़ नहीं है वहाँ सूखे सी स्थिति हो रही।
कश्मीर का हाल, पाकिस्तान और चीन की बौखलाहट, 
राजनीतिक नाटकों और हलचलोंं का समाधान 
तो समयानुसार हो जायेगा
पर इन सबसे पृथक है-
देश में पाँव फैलाती आर्थिक मंदी जैसी
गंभीर समस्या,
जिसके समाधान के लिए
सर्वप्रथम ध्यान देने की आवश्यकता है।

आइये पढ़ते है आज की  रचनाएँ
★★★
सबसे पहले पढ़िये संवेदनशील बेहद उत्कृष्ट मनोभाव और समाज की रुढ़ियों पर 
कुठराघात करती सधे हुये शब्दों से गूँथी गयी कहानी



ये तुम्हारा कंकाल भी तो मेडिकल की पढ़ाई के काम आ जाएगा। और सोचो ना .. जरा ... 
कितना रोमांचक और रूमानी होगा वह पल जब युवा-युवती लड़के-लड़कियाँ 
यानि भावी डॉक्टर- डॉक्टरनी का नर्म स्पर्श मिलेगा इन हड्डियों को। 
है ना नुप्पू !? तुम्हे जलन होगी ना ? वही सौतन-डाह !? "
★★★★★★
मानवीय संबंधों की शब्दों की शिल्पकारी 
से सुंदरता से अभिव्यक्ति
बड़ी भूख है ज़िंदगी में

पापा, दिन, महीने
बीते बरस के
हर लम्हे ने मुझे आपके साथ
नहीं होने पर भी
हमेशा आपके साथ रखा
हर बार असंभव को
संभव किया
और कहा है मैंने
मुस्कराते हुए
जिसके सर पर अपनों का
हाथ होता है वो
इस बहते खारे पानी को

★★★★★★
अध्यात्म और मन के गहन चिंतन
से उत्पन्न सुंदर सृजन
उसने कहा था

अपने ही विरुद्ध किया जाता है यूँ तो हर पाप
यह पाप भी खुद को ही हानि पहुंचाता है
इसका दंड भी निर्धारित करना है स्वयं ही
'असजगता' के इस पाप को नाम दें 'प्रमाद' का
अथवा तो स्वप्नलोक में विचरने का
जहाँ जरूरत थी... जिस घड़ी जरूरत थी...
वहाँ से नदारद हो जाने का

★★★★★
प्रकृति और प्रेम का सुंदर संगीत

इश्क़ में इतने पागल हो तुम,
दिन में चाँद को बुला रहे हो ।

तूफानों से तो डर लगता था,
दरिया में नाव चला रहे हो।
★★★★★★★
अपने अंदाज़ में लिखी गयी 
व्यवस्था पर प्रश्न उठाती 
सुंदर अभिव्यक्ति
चाँद सूरज की मिट्टी की कहानी नहीं

कौन सा
पढ़ लेने
वालों को
भी
समझ में

सारा
सब कुछ
इतनी जल्दी
ही
आ जायेगा 

★★★★★★

और चलते-चलते बेहद सराहनीय 
अपनत्व के भावों से भरी
एक पुस्तक की मनमोहक समीक्षा


प्रिज्म से निकले रंग ” 
मुझे भी  इसे पढ़ने का अवसर मिला तो  पाठक के रूप में मुझे इन्हें पढ़कर बहुत  अच्छा  लगा 
और  आदरणीय रवीन्द्र जी के लेखन पर बहुत गर्व भी हुआ | जैसा  कि नाम  से  ही  पता चल  जाता है, 
संग्रह  में भावों और कल्पनाओं के इन्द्रधनुषी रंगो  को विस्तार मिला है | अलग-अलग  विषयों पर  
रचनाएँ अपनी  कहानी आप कहती हैं | इन रचनाओं में समाज, नारी, प्रेम, राष्ट्र, प्रकृति, इतिहास और 
जीवन में   अहम्  भूमिका  अदा करने वाले करुण-पात्रों  को  बहुत ही सार्थकता से प्रस्तुत किया गया है।   
एक पाठिका के रूप  में  इस संग्रह को पढ़ने का अनुभव  
मैं  दूसरे  साहित्य प्रेमियों  के  साथ बांटना चाहती हूँ |
★★★★★★

आज का अंक आपको कैसा लगा?
आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रियाओं की
सदैव प्रतीक्षा रहती है।

हमक़दम का विषय है-


कल का अंक पढ़ना न भूलें
कल आ रही हैं विभा दी
अपनी विशेष प्रस्तुति के साथ।

गुरुवार, 22 अगस्त 2019

1497...हाँ अच्छी लड़कियाँ हैं हम.


सादर अभिवादन। 

ख़ुशख़बरी !
'पाँच लिंकों का आनन्द' परिवार की एक चर्चाकारा आदरणीया पम्मी जी का नाम 
'ग्लोबल बुक ऑफ़ लिटरेचर रिकॉर्ड्स' 2019 में दर्ज़ किया गया है। विश्व की सर्वाधिक लोकप्रिय 111 महिला साहित्यकारों की सूची में एक नाम आदरणीया पम्मी सिंह 'तृप्ति' का भी शुमार किया गया है। 
इस शानदार उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएँ।  
इस विषय पर और अधिक प्रकाश डालने का आदरणीया पम्मी जी से अनुरोध किया जाता है।  

आइए अब आज की पसंदीदा रचनाओं पर नज़र डालें-   


 My Photo

विद्रोही औरतें   

यूँ मुस्कुराना   
ख़ुद से विद्रोह सा लगता है   
पर समय के साथ चुपचाप   
विद्रोही बन जाती हैं औरतें   
अपने उन सवालों से घिरी हुई   
जिनके जवाब वे जानती हैं   
और वक्त पर देती हैं   
विद्रोही औरतें।   


 
कँधों पर हमारे  टिका है
समाज की अच्छाई का स्तम्भ,
हृदय जलाकर दिखाती हैं,
रौशनी समाज के भविष्य को
त्याग के तल पर जलाती हैं,
 दीप स्नेह का ,
हाँ अच्छी लड़कियाँ हैं  हम |


एक साँस में कितने आस,

बांधता है आदमी,

ज़मीनें कम...पर ना जाने कितने,
आकाश बांधता है आदमी I




राजस्थान का लोहार्गल धाम, जहां पांडवों के हथियार गले थे..... गगन शर्मा 


 

लोहार्गल से भगवान परशुराम का भी नाम जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि क्षत्रियों के संहार के पश्चात क्रोध शांत होने पर जब उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ तो पश्चाताप स्वरुप उन्होंने यहां यज्ञ किया तथा नरसंहार के पाप से मुक्ति पाई थी। यहां एक विशाल बावड़ी भी है जिसका निर्माण महात्मा चेतनदास जी ने करवाया था। यह राजस्थान की बड़ी बावड़ियों में से एक है। पास ही पहाड़ी पर एक प्राचीन सूर्य मंदिर बना हुआ है। इसके साथ ही वनखण्डी जी का मंदिर है। कुण्ड के पास ही प्राचीन शिव तथा हनुमान मंदिर तथा पांडव गुफा भी स्थित है। इनके अलावा चार सौ सीढ़ियां चढने पर मालकेतु जी के दर्शन भी किए जा सकते हैं। 



अनामिका एक अस्तित्व के रूप में स्त्री होने को कभी नकाराती
 नहीं बल्कि गरिमा के साथ स्त्री होने को स्वीकारती हैं क्योंकि एक
 रचनाकार के रूप में स्त्री का व्यक्तित्व अपनी अस्मिता के होने
 को सभी भेद-प्रभेदों के बीच से निकलकर गुजरकर अपनी पहचान
 पाता है और फिर एक विशिष्ट मनोविज्ञान को रचता है   जिसे
 समग्रता से अनुभव किए बिना न तो कोई अहसास होता है न 
विचारन कल्पना न अतंर्दृष्टि. इसलिए एक कविता में अनामिका
 जी ने कहा था-


हम-क़दम का नया विषय
यहाँ देखिए
❄️❄️

आज बस यहीं तक 
फिर मिलेंगे अगली प्रस्तुति में। 

रवीन्द्र सिंह यादव 

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...