सादर अभिवादन
यह जुम्मा (शुक्रवार) से एक दिन पहले आता है।
अत: इस दिन को गुरुवार भी कहा जाता है।
ने लिखना कम कर दिया है
कुछ जूनी रचनाएं उनकी इस अंक में है
उनको कृपया लिखने पर मजबूर करें
दिन भर ब्लॉगों पर लिखी पढ़ी जा रही 5 श्रेष्ठ रचनाओं का संगम[5 लिंकों का आनंद] ब्लॉग पर आप का ह्रदयतल से स्वागत एवं अभिनन्दन...
सादर अभिवादन
।।भोर वंदन।।
"एक किरण आई छाई,
दुनिया में ज्योति निराली
रंगी सुनहरे रंग में
पत्ती-पत्ती डाली डाली !
एक किरण आई लाई,
पूरब में सुखद सवेरा
हुई दिशाएं लाल
लाल हो गया धरा का घेरा !
~ सोहनलाल द्विवेदी
आज की पेशकश में शामिल रचनाए ✍️
कुछ इस तरह फुसफुसाती है हवा,
शायद कोई ग़ज़ल सुनाती है हवा।
सुकून फिर भला कैसे नसीब हो,
ज़ख्मों को रोज़ छेड़ जाती है हवा।
यादों की राख अब भी गर्म है कहीं,
धीरे-धीरे फिर सुलगाती है हवा।
✨️
अमेरिकी जादूगर के नीले जादू की क़ैद में
दुनिया भर के लोगों को अपने श्वेत-बर्फीले हुस्न, आकाश छूते चीड़-देवदार और प्रकृति के हरियाली भरे श्रृंगार से अपनी ओर खींचने वाला हिमाचल प्रदेश इन दिनों एक अमेरिकी जादूगर के नीले जादू के मोहपाश में बंधा हुआ है। आमतौर पर जादूगर वैसे तो काला जादू करते हैं लेकिन इस विदेशी..
✨️
अगाध होते हैं रिश्ते दिलों के,
इक ज़माना था जो हम गाते,
तय पथ था और सफ़र अटल,
उम्मीदों पे कब तक ठहर पाते।..
✨️
विषयों की तलाश में
भटकता हुआ
किसी कोने में
कहीं अटकता हुआ
बेसुध सा मन
यहाँ-वहाँ ..
✨️
।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह 'तृप्ति'..✍️
शीर्षक पंक्ति: आदरणीय ओंकार जी
की रचना से।
सादर अभिवादन।
मंगलवारीय अंक में पढ़िए पसंदीदा रचनाएँ-
कौन हो तुम-एक दार्शनिक प्रेम कविता
स्वयं के अस्तित्व से बेखबर
दुर्गम पथ की बाधाओं से अनजान,
कठोर धरातल पर कुसुम-राह तलाशती।
जीवन के इस विस्तृत क्षितिज को
अदम्य उत्साह और चटख सुर्ख रंगों से
रंगने को आतुर-व्याकुल—
कौन हो तुम!
*****
कोई पूछे—
“आज तुमने क्या खाया?”
जैसे वह बरसों पूछती रही है सबसे।
वह प्रतीक्षा करती है
कि बच्चे जब सफल हों
तो परिचय में सिर्फ़ पिता का नाम नहीं,
उसकी जागी रातें भी दिखाई दें।
*****
उसका घर उसका देश
है,
देहरी देश की सीमा,
बच्चे देश के
नागरिक,
उसके होने भर से
महफ़ूज़ रहता है
उसका देश,
चैन
से सोते हैं उसके बच्चे।
*****
सोशल मीडिया में मैडिटेशन का शोर
माँ ! जैसे विशाल, अद्वितीय, अप्रतिम, दैवीय व्यक्तित्व के लिए एक दिन का निर्धारण ! इस बात को लेकर कई बार हम भावुक और आक्रोशित भी हो जाते हैं ! पर मई माह के दूसरे रविवार को मातृ दिवस मनाने के पीछे भी एक बेटी की अपनी माँ के प्रति अटूट प्रेम, सम्मान और सामाजिक सुधार की भावना काम कर रही थी ! उस बेटी का नाम है, एना मारिया जार्विस ! एना की मां का निधन 9 मई 1905 को हुआ था, जो उस वर्ष मई का दूसरा रविवार था, इसीलिए मई के दूसरे रविवार को ही ''मदर्स डे'' मनाने की परंपरा शुरू हुई!
फिर मिलेंगे।
रवीन्द्र सिंह यादव
शीर्षक पंक्ति: आदरणीया रेणु बाला जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
रविवारीय अंक में पढ़िए पसंदीदा रचनाएँ-
पहला तारा
माँ सिखला रही है
गाँठ खोलना
*****
जब माँ- बेटी ने
मिल कर
कुछ रातें संग
बिताई होंगी
जी भर गुरबत कर
बेटी से
माँ खुल कर
मुस्काई होगी।
*****
और तब लगता है
दुनिया में उतरना नहीं,
उतरने का अभिनय करना भर ही
अब शेष रह गया है।
*****
मेरी चोट का मरहम माँ ही तो है
सबसे प्यारी हमेशा मेरी ही चिंता में घुलने
वाली
माँ देखती हूँ जो
तेरा प्यार मैं भी बड़ी बच्ची
तेरी स्नेह छाँव में ही हर पल जीवन का गुजारु
अभिलाषा मन की,
*****
सादर अभिवादन