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शनिवार, 10 मार्च 2018

967... घमंड





सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष


मिले चाह रहे थे... मांग नहीं रहे थे...
आड़े आ रहा था नाक और झूठा

घमंड

फलों का ठेला सड़क पर ही छोड़ कर उन्होंने दूसरे ठेले वालों को बुलाया
और सभी ने मिलकर चोरों को दबोच लिया। दबोचने से पहले
शहीद के पिता ने 100 नंबर पर फोन मिला कर चोरों के बारे में
पुलिस को सूचना दी। इसी वजह से पुलिस भी मौके पर जल्दी पहुंच गई।
शफीक के पिता के कंधे पर एक चोर ने चाकू से वार किया।


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घमंड

शरीर से दुर्बल होने के कारण जब
उसे विपत्ति आती दिखी, तो ईश्वर का
 नाम लेकर पहाड़ से नीचे कूद पड़ी
ईश्वर ने उसकी रक्षा की।
उसे जरा भी चोट न लगी
और प्रसन्नतापूर्वक घर चली गई।


घमंड

हम मोटापा घटाने के लिए जिम जाते हैं,
ये प्राकृतिक रूप से चुस्त-दुरस्त हैं |
 हमारे ए.सी. की हवा में वो शीतलता नहीं,
जो यहाँ की शुद्ध प्राकृतिक हवा में है |
हमारे रिश्ते पैसे और फायदे से जुड़े रहते हैं,
इनके रिश्ते दिल से जुड़े हैं | धन्यवाद पापा,
 मुझे यहाँ लाकर यह अहसास दिलाने के लिए
कि अमीरी धन-दौलत से नहीं आती,
ये तो बिना धन-दौलत के भी बहुत अमीर हैं |

दोहे

कविता के जबसे हुए अलग -अलग उपनाम ।
कवियों में छिड़ने लगा नित-नवीन संग्राम ।
अपने -अपने ज्ञान पर सबको घोर घमंड ।
मौक़ा पाकर दे रहे कवि इक दूजे को दंड ।

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घी देखने मात्र से ही अच्छा लगता है
पर
तेल मुॅुह में डालने पर भी अच्छा नहीं लगता है।
संतो से झगड़ा भी अच्छा है
पर
दुष्टों से मेल-मिलाप मित्रता भी अच्छा नहीं है।

फिर मिलेंगे... जरा ठहरिये

हम-क़दम 
सभी के लिए एक खुला मंच
आपका हम-क़दम नवें क़दम की ओर
इस सप्ताह का विषय है
:: परिक्रमा (फेरा) ::
उदाहरणः
क्या?
सुख दु:ख का
पाठ पढ़ा रही हो!
या व्यर्थ ही
चक्कर लगा रही हो!
कभी तो तुम
दो दिलों को
एक करने के लिये
अग्नि के फेरे लगा रही हो
कभी विरह व्यथा में जलते हुए
पिता का पुत्र से वियोग दिला रही हो

आप अपनी रचना शनिवार 10  मार्च 2018  
शाम 5 बजे तक भेज सकते हैं।
चुनी गयी श्रेष्ठ रचनाऐं आगामी सोमवारीय अंक 
12 मार्च 2018  को प्रकाशित की जाएगी । 
इस विषय पर सम्पूर्ण जानकारी हेतु हमारे पिछले गुरुवारीय अंक 
11 जनवरी 2018  का अवलोकन करें



9 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात दीदी
    बेहतरीन प्रस्तुति
    आभार
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुप्रभात विभा दी,
    क्या लाज़वाब विषय चुना है आपने...रचनाएँ भी बेहद लाज़वाब हैंं....।👌👌👌
    हमेशा की तरह एक शानदार प्रस्तुति।
    आभार आपका
    सादर।

    उत्तर देंहटाएं
  3. प्रेरणास्पद प्रस्तुति ! घमंड या अहंकार अधिक समय तक टिक नहीं पाता, इतिहास इसका गवाह है। एक ही विषय पर सारी रचनाएँ, किंतु विविधतापूर्ण ! बहुत बहुत आभार आदरणीया विभा दी ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर प्रस्तुति धारा प्रवाहता लिये।
    सभी रचनाऐं आकर्षक।

    उत्तर देंहटाएं
  5. अलग विषय पर अलग प्रस्तुति
    बहुत बढिया.. रचनाएँ उम्द
    धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  7. आदरणीय विभा दीदी -- सादर प्रणाम | आज के लिंकों में सार्थक संदेश '' घमंड और पेट का बढना '' वाह ----- कितमा गहरा चिंतन और सीख | सभी रचनाये घमंड को ध्वस्त कर विनम्रता का आह्वान करती है | मैं भी प्रसंगवश एक बात कहने से खुद को रोक नहीं पा रही | कई ब्लॉग ऐसे हैं जिन पर टिपण्णी के बाद कभी कोई आभार या जवाब या पसंद करने का संकेत तक नहीं आता | ब्लॉग हमारा वैचारिक सदन है | मेरा विनम्र आग्रह है कि इस पर आ कर पढने वाले और अपने कीमती समय से समय निकल कर शब्दों के माध्यम से हमारा उत्साहवर्धन कर ने वालों को आभार या धन्यवाद कहना हमारा नैतिक कर्तव्य है | यह एक साहित्यिक शिष्टाचार है | ब्लॉगर मित्रों इसका सहृदयता से निर्वहन करना चाहिए | इसी में उनके लेखन की सार्थकता है | बाकि आज के सभी रचनाकार साथियों को शुभकामनाये | आपको इस अतुलनीय प्रस्तुती के लिए हार्दिक बधाई | सादर सस्नेह |

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपकी बातों से पूरी तरह सहमत हूँ... जिस ब्लॉग का लिंक यहाँ लगाया जाता है वे ही जब समय नहीं निकाल पाते हैं तो दूसरे उनके ब्लॉग पर कैसे जाएं
      सस्नेहाशीष

      हटाएं

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