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सोमवार, 19 मार्च 2018

976....हम-क़दम का दसवां क़दम.....उम्मीद

उम्मीद
 शब्द में सकारात्मकता और अलौकिकता 
से पूर्ण ऊर्जा प्रवाहित होती है।  जब तक मानव का अस्तित्व है तब तक सृष्टि के कण-कण में उम्मीद के स्पंदन को महसूस किया जा सकता है। 
मेरी लिखी कुछ पंक्तियाँ-
जब दुनिया तम की डिबिया बन जाती है
जब टूट के हिम्मत पाँवों में चुभ जाती है
कभी पतझड़ और वीरानी से
कभी कुहरा और सुनामी से
जब जीवन पथ पर आँखें धुँधलाती है
दो पग बढ़ना कठिन लगे
जीवन प्रश्न-सा जटिल लगे
जब खुशी नीड़ की तिनकों-सी उड़ जाती है
तब हौले से थाम कर हाथ
 देकर हौसलों का साथ
एक नन्हीं किरण "उम्मीद"की नेह से मुस्काती है।
बनके बाती चीर के तम अंधियारा दूर भगाती है।।

ये पंक्तियाँ जीवन में कभी मुझे निराश होने नहीं देती।
 चाहे परिस्थिति कुछ भी हो उम्मीद की एक किरण,सब अच्छा होगा जैसा सांत्वना के शब्द मन और विचारों में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करते है।
ये तो सच है जीवन से जो चाहो वो मिल ही जाए जरुरी नहीं होता है। विपरीत परिस्थितियों में, टूटते जीवन डोर और घने अंधकार में भी जीवन की एक झलक पाने की उद्दाम ललक उम्मीद अर्थात् आशा कहलाती है।
 सादर नमस्कार 
आप सभी हमक़दम के सहभागी रचनाकार और पाठकों  की अद्भुत रचनात्मकता ने हमक़दम की राह में उम्मीद के दीप प्रज्ज्वलित किये है। 
निश्चय ही इतनी सारी सकारात्मक रचनाओं का रसपान साहित्य प्रेमियों के लिए भी अद्भुत अनुभव होगा। आप सभी के कलम से निसृत प्रेरक,सारगर्भित, संदेशात्मक रचनाओं ने इस मंच को अपूर्व ज्योति प्रदान की है। आप सभी रचनाकारों को नमन है जो हर विषय पर अपनी लेखनी से इंद्रधनुषी रंग बिखेरना नहीं छोड़ते।

विशेष सूचना:
रचनाएँ क्रमानुसार नहीं सुविधानुसार लगायी गयी है।
चलिए आप सभी की सृजनात्मकता के संसार में
◆◆◆★◆◆◆
पल्लवी गोयल

परम  उद्धारक गीता के गायक 
नीति ,धर्म के कुशल धनिक । 

पांचाली के चीर प्रदायक ,
राधा ,रुक्मणि की घनेरी प्रीत। 

घन ,जल,थल ,जन के पालक ,
वही मेरी प्रीत , वही उम्मीद !

◆◆◆★◆◆◆

आदरणीय पुरुषोत्तम जी की दो रचना

एक उम्मीद लिए बैठा वो मन में,
दीदार-ए- तसव्वुर में न जाने किसके,
हसरतें हजार उस दिल की,
ख्वाहिशें सपने रंगीन सजाने की।
★■★
टिमटिम जलती वो आशा!
इक उम्मीद, टूट गई थी सहसा!
व्याप्त हुई थी खामोशी,
सहमी सी वो, सिहर गई जरा सी!
दामन आशा का फिर फैलाकर,
लेकर संग कुछ निशाचर,
तम की राहों से गुजरे वो सारे,
उम्मीद की लड़ी, फिर जुड़ सी गई.....

◆◆◆★◆◆◆

शुभम सिसौदिया जी

मंद मंद आंसू,आंखो में प्यास,सरकारी चिट्टी
सूखा बदन,माथे से लगाए अपने खेत की मिट्टी

दिल में उम्मीद,सीने में दर्द,भूखा और प्यासा
कल दिखा इक किसान मुझे ओढ़े निराशा

◆◆◆★◆◆◆
 आदरणीया आशा जी
आज की दुनिया टिकी है 
प्रगति के सोच पर
नन्हीं  सी  आशा पर
उसके विस्तार पर
रहता है हर मन में
एक छोटा सा बालक
जब भी आगे चलना सीखता है 

◆◆◆★◆◆◆

आदरणीया नीतू जी
मिटती है बारम्बार मगर
हर रोज जन्म ये लेती है
उद्देश्य हिन हर जीवन को
उद्देश्य नया ये देती है
उम्मीद का कोई अंत नहीं
संसार भले ही मिट जाये
नामुमकिन है की सृष्टि से
उम्मीद कभी भी हट जाये

◆◆◆★◆◆◆
आदरणीया रश्मि जी
जीवन भर 
पूरी ठसक के साथ जिए
जानते हुए कि तिरस्कार मिलेगा
परंतु कहोगे
अपनी छोटी सी इच्छा, औरों के आगे
इस उम्मीद में
कि सामने सबके बात रख ली जाएगी
◆◆◆★◆◆◆
आदरणीया इन्दिरा जी
अब तलवार उठानी है 
सिंह नाद कर उठे सिंहनिया 
वो ललकार लगानी है 
नारी अब अबला कहलाये 
ये मुझको मंजूर नही 
उम्मीदों को राख बनाना
अब मुझको मंजूर नही ....

◆◆◆★◆◆◆
आदरणीय पंकज प्रियम् जी
उम्मीद

बड़ी उम्मीद से यूँ लहरा के
इसबार फिर पार उतरा के
दिल जो साहिल पे आया है।
उम्मीदों ने आँचल लहराया है।

◆◆◆★◆◆◆
आदरणीया कुसुम जी
दिल को जीने का सहारा भी न दे

माना उम्मीद पर जीने से हासिल कुछ नही लेकिन 
पर ये भी क्या,कि दिल को जीने का सहारा भी न दें।

उजडने को उजडती है बसी  बसाई बस्तियां 
पर ये भी क्या के फकत एक आसियां भी ना दे। 
◆◆◆★◆◆◆
तरसते है जो भूखे, दो जून की रोटी को......
मधुमास आये या जाये, क्या जाने वे तुझको,
आने वाले कल की,उम्मीद नयी दे दो.........
ऐ बसंत ! तुम सबको खुशियों की वजह दे दो ।


◆◆◆★◆◆◆

आदरणीया सुधा सिंह जी

प्रतिकूल परिस्थितियाँ हो तो भी
निर्वेद न हो, न शिथिल पड़ो
उम्मीद का दामन थाम कर
यलगार करो और आगे बढ़ो

रोशन होगी,  दिल की मशाल
 फिर देखना होगा कमाल
 फिर  देखना होगा कमाल...
◆◆◆★◆◆◆

आदरणीया शुभा जी की दो रचनाएँ
My Photo
खेलता था 
हवाई जहाज से 
कहता उडना है इसमें बैठकर
तब क्या पता था 

सच में छोड़ ये बसेरा 
उड़ जाएगा ....दू.....र...।
◆◆◆★◆◆◆

हसरतों की दुनियाँ
   उम्मीदों का दामन पकडे़
चली जा रही हैंं
मंजिल की ओर 

सफलता, असफलता 
आशा ,निराशा 
सभी को साथ लिए
◆◆◆★◆◆◆

हमक़दम का अगला विषय जानने के लिए
देखिये कल का अंक।
आज का अंक कैसा लगा
कृपया अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रियाओंं के द्वारा जरुर बताए।
आप सभी के सुझावों की प्रतीक्षा में

-श्वेता सिन्हा



17 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही उम्मीद से भरा बहुत ही उम्दा संकलन।
    सभी रचनाएँ बहुत ही सुंदर हैं सुबह सुबह पढ़ कर मन में एक नई उम्मीद जाग उठी है

    उत्तर देंहटाएं
  2. शुभ प्रभात
    उम्मीद
    उम्मीद पर
    बिलकुल खरी
    उतरी...पूरी तरह से
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुबह की पहली किरणों ने उनींदी आँखों में उम्मीदें जगा दी।

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर प्रस्तुति श्वेता जी,
    उम्मीद पर बढिया भूमिका के साथ संकलन
    सभी रचनाकारों को बधाई एवम् धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत शानदार प्रस्तुति। दिल से आभार मेरी उम्मीद को बरकरार रखने हेतु।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत शानदार प्रस्तुति। दिल से आभार मेरी उम्मीद को बरकरार रखने हेतु।

    उत्तर देंहटाएं
  7. मन में उम्मीदें जगा दी....उम्मीद पर बढिया संकलन
    सभी रचनाकारों को बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह!!श्वेता ,बहुत सुंंदर भूमिका .....मेरी रचनाओं को सम्मिलित करनें हेतु ह्रदयतल से आभारी हूँ ...ईश्वर करे सभी की उम्मीदें कायम रहे.....

    उत्तर देंहटाएं
  9. वाह...
    दस क़दम चल लिया बालक
    खिलाफ़त की सारी अवधारणाएँ विलोपित हो गई
    शुभ कामनाएँ
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  11. लाजवाब प्रस्तुतिकरण ....उम्मीदों से भरे उम्दा पठनीय लिंक्स...
    मेरी रचना को स्थान देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद श्वेता जी !

    उत्तर देंहटाएं
  12. उम्मीद को उम्मीद के पंख लगाता बेहतरीन अंक। सार्थक काव्यात्मक भूमिका के साथ निखरी हुई प्रस्तुति। उम्मीद पर अलग-अलग दृष्टिकोण से सुसज्जित भावाभिव्यक्ति प्रभावशाली है। सभी रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाऐं।

    उत्तर देंहटाएं
  13. उम्मीदों भरा संकलन.. लाजवाब प्रस्तुतिकरण.

    उत्तर देंहटाएं
  14. बेहतरीन प्रस्तुति .....सार्थक लिंक संयोजन । आभार ।
    सादर ।

    उत्तर देंहटाएं

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