निवेदन।


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रविवार, 3 मई 2026

4731...सभी कोचिंग सेंटर, जिम, बुटीक, और डांस क्लास में CCTV कैमरे और DVR सिस्टम लगाना अनिवार्य है...

शीर्षक पंक्ति: आदरणीया एडवोकेट शालिनी कौशिक जी की रचना से।

सादर अभिवादन।

आइए पढ़ते हैं रविवारीय अंक में पाँच पसंदीदा रचनाएँ-

असमाप्त इंतज़ार--

आज भी है जारी रेत के नीचे जल की खोज,
कई दशक गुज़रे लेकिन हालत न सुधर पाई,

झर चुके महुआ पलाश, प्राण में अधूरी प्यास,
ज़रा कोई बताए जीने की ख़बर कहाँ से आई,

*****

वर्तमान का व्यथित समय ये

विप्लव और विध्वंस की

भ्रम-द्वंद और संघर्ष की

दुर्भावनाएँ अति हुई है

तनाव-हिंसा और बैर-द्वेष की।

*****

बेड़ियाँ

दो मई को दोपहर बाद ही असिस्टेंट सेक्रेटरी लेबर के यहाँ से कार्यवाही समाप्त हुई थी. उसी दिन उसे सेक्रेटरी को रिपोर्ट देनी थी लेकिन तीन मई की दोपहर ट्रैकिंग से पता लगा कि रिपोर्ट सुबह सेक्रेटरी को मिली थी और शाम को यह जानकारी कि फाइल को सेक्रेटरी ने राय देने के लिए लॉ सेक्रेटरी को भेज दिया है. अगले दो दिन अवकाश होने के कारण फाइल को वहीं रहना था, जिससे ट्रैकिंग से कुछ हासिल नहीं हो सकता था.

*****

विभाजन के पहले और बाद

यदि आप हमारे देश के उस कठिन समय तथा विभाजन के पूर्व एवं पश्चात् के समयकाल को ठीक से जानना चाहते हैं तो यह काल्पनिक कहानी कहने वाली पुस्तक किसी भी इतिहास की पुस्तक से अधिक उपयोगी हो सकती है क्योंकि यह एक स्वतंत्रता-सेनानी द्वारा अपने भोगे हुए यथार्थ के आधार पर लिखी गई है जिसका दृष्टिकोण पूर्णरूपेण निष्पक्ष एवं वस्तुपरक है। सच पूछिये तो यह एक कालजयी कृति है। इसका अंग्रेज़ी अनुवाद भी 'This  is  not  that  dawn' के नाम से प्रकाशित हो चुका है। किसी ऐतिहासिक दस्तावेज़ के समकक्ष होने के बावजूद यह केवल शुष्क इतिहास नहीं है वरन एक मनोरंजक पुस्तक है जिसमें साहित्य के सभी रसों को समाहित करती हुई पूरी तरह से मानवीय कहानी कही गई है।

*****

 अब महिलाओं का होगा नया संसार

आयोग ने इन निर्देशों को सख्ती से लागू करने के लिए राज्य के मुख्य सचिव को निर्देशित किया है। महिला सुरक्षा के लिए ये निर्देश सराहनीय कहे जा सकते हैं, इसके अतिरिक्त महिला आयोग को मन्दिरों और बाजारों की व्यवस्था पर भी ध्यान देना चाहिए क्योंकि महिलाओं और बच्चियों का वहां भी पूजा पाठ और सामान लाने के लिए काफी आवागमन रहता है और समय समय पर इन स्थानों पर भी महिलाओं और बच्चियों के साथ बदसलूकी के समाचार आते रहते हैं. ऐसे में इन स्थानों पर कम से कम महिला पुलिस की ड्यूटी अनिवार्य की जानी चाहिए.

*****

फिर मिलेंगे।

रवीन्द्र सिंह यादव


शनिवार, 2 मई 2026

4730..आये हो, तो जाओगे। फिर सोचते हो क्या?

शीर्षक पंक्ति: आदरणीय विश्वमोहन  जी की रचना से। 

सादर अभिवादन.

शनिवारीय प्रस्तुति में पढ़िए पाँच पसंदीदा रचनाएँ-

आये हो, तो जाओगे।

न रहा अपवाद कोई,

द्युलोक, अंतरिक्ष, पृथ्वी।

समय चक्र सब नाचते,

ग्रह गोचर और रवि।

*****

भक्त वत्सल भगवान

नख पर गिरि गोवर्धन उठा लिया ।

नख से ही हिरण्यकशिपु को तारा ।

ना नर, ना मानव, नृसिंह रुप धरा ।

*****

जिंजर की अदा ..

ना ताज चाहिए उसको, ना कोई बड़ी फरमाइश,

बस थोड़ा प्यार मिल जाएयही उसकी हुकूमत है।

घर के हर कोने में उसकी मासूम चाल बसती,

जिंजर नहीं, वो दिल की धड़कन, मेरी राहत है।

*****

द्वारका -सोमनाथ

देखा सामने तीन शेर अलसाए से पड़े थे।बस को देखकर भी कोई हरकत नहीं की उन्होंने,शायद वह भी जान गए थे कि इंसान उन्हें देखने आता है और खुश होता है,शायद उन्हें भी इंसान पर तरस आ रहा होगा इसलिए वे वैसे ही लेटे रहे ।थोड़ी देर बाद बस चल पड़ी, खिड़की से देखा तो शेर उठ गए थे।सोच रहे होंगे....चलो पीछा छूटा....आगे चलकर थोड़ी ही दूर पर चीते दिखाई दिए....वो भी छाया में लेटे हुए थे,शायद उन्हें भी आदत थी कि इंसान उन्हें देखने आता है इसलिए उनका स्वभाव भी ऐसा बन गया था कि कोई प्रतिक्रिया नहीं करते।बस में लोग वीडियो बना रहे थे और खुश हो रहे थे। करीब दो घंटे में हमने जो भी देखा वो बस यही था।हिरण भी दिख गए थे।नीलगाय भी थी।यह गिर राष्ट्रीय उद्यान का एक हिस्सा था ।गिर राष्ट्रीय उद्यान बहुत बड़ा है। देवलिया पार्क को बाड़ लगाकर बनाया गया है जिससे पर्यटक कम समय में भी गिर राष्ट्रीय उद्यान का आनंद उठा सकें ।

*****

जेठ की दुपहरी

 अग्नि लपटें

लप-लप झपटे

तन जलाए।

हो गया जीना

बह रहा पसीना

जी घबराए।

बंद चलना

घूमना औ फिरना

किसे बताएँ।

 *****

 फिर मिलेंगे। 

रवीन्द्र सिंह यादव 

 


शुक्रवार, 1 मई 2026

4729 कामगारों के बिना कोई भी औद्योगिक ढांचा खड़ा नहीं रह सकता

 सादर अभिवादन

गुरुवार, 30 अप्रैल 2026

4728 स्त्री को प्रसन्न रख पाना एक मिथ्या है,

 सादर अभिवादन

स्त्री को प्रसन्न रख पाना
एक मिथ्या है,


जब तक सीता मैया
प्रभु राम के पास थीं उन्हें
सोने का हिरण चाहिए था,
जब पूरी सोने की लंका चरणों में थी
तो प्रभु राम चाहिए थे..!!

हे नादान पुरुष,
जो काम प्रभु ना कर सके,
वो तू करना चाहता है...?

नूतन रचनाएँ





"सर, क्या डॉ. जबसन ने वास्तव में आपके ऑपरेशन को स्वीकार किया हैं?
मरीज़ ने कहा "हाँ, मेरा ऑपरेशन वही कर रहे है।"
नर्स ने कहा "बड़ी अजीब बात है, विश्वास नहीं होता"
परेशान होते हुए मरीज़ ने पूछा ;
"लेकिन इसमें ऐसी क्या अजीब बात है?"





मैनेजमेंट ने अब उन 'कमजोर कड़ियों' को निशाना बनाना शुरू किया जो कर्ज में डूबे थे या घर की 
मजबूरियों से परेशान थे. प्रोडक्शन फ्लोर के एक कोने में, 
मैनेजर खन्ना ने तीन मजदूरों को किनारे ले जाकर फुसफुसाते हुए कहा. "देखो, तुम लोग पुराने और वफादार हो. मैं नहीं चाहता कि क्लोजर के बाद तुम सड़कों पर भटको. अगर तुम अपने साथ 10-15 मजदूरों की टोली तैयार कर लो, जो शांति से अपना हिसाब (Settlement) लेकर हटने को तैयार हों, 
तो मैं एमडी साहब से बात करके तुम्हें 'स्पेशल पैकेज' दिलाऊँगा. और हाँ, हर तैयार मजदूर के पीछे तुम्हें अलग से 'इनाम' भी मिलेगा."





जंगलों  में  अंचलों  में 
कुछ  हिरण  दल झूमते  
अब  कहीं  नवगीत  को  है 
मंत्रवत  वो  सुनते  
पेड़  पर्वत  खाइयों में 
दिख  रही  कोई  आत्मा




सतत संघर्ष में निहित मानवता का उत्कर्ष
जूझते जीवन से उन्हें क्या मौसम का विमर्श
मौसम प्रणय करता कभी चुहल बेशर्मी
सुना है गर्म गुम्बद है उफन रही गर्मी।





और वही भीतर का संसार
हर दिन
थोड़ा-थोड़ा परोसा जाता है
रोटी के साथ,
एक लंबी चुप्पी के साथ,
और उस मुस्कान के साथ
जिसमें अब कोई दावा नहीं,
कोई प्रतीक्षा नहीं
सिर्फ स्वीकृति की शांति है।

सादर समर्पित
सादर वंदन

बुधवार, 29 अप्रैल 2026

4727..आज भी याद है..

 ।।प्रातःवंदन।।

चाहे कोई दार्शनिक बने साधु बने या मौलाना बने, अगर वो लोगों को अंधेरे का डर दिखाता है, तो ज़रूर वो अपनी कंपनी का टॉर्च बेचना चाहता है।

~ हरिशंकर परसाई

राजनीति  की भी यही रूप है एक तरफ चुनाव..और यहाँ बुधवारिय प्रस्तुतिकरण लिए हाजिर हूं..

ठहरा मन उपवन प्रशांत है 

छायी भीतर नीरव छाया 

 कब बिगाड़ पाती कुछ माया, 

ठहरा मन उपवन प्रशांत है 

छाया में विमल एकांत है !
✨️
- अप्रैल 27, 2026
चौंकिए मत और न ही यह तस्वीर देखकर नाक मुंह बनाइए… क्योंकि अब दूध,दही और पनीर से भी महंगा मिल रहा है गोबर.. जी हां, जिस गोबर को आप हम बिना गौमाता या गाय के मालिक की सहमति के मनचाही मात्रा में उठा लाते हैं,वह ऑनलाइन 299 रुपए किलो बिक रहा है। 
✨️



                                 बहुत दिनों से देखते चले आ रहे है कि प्राकृतिक आपदा हो या फिर मानव जनित - लोगों को कमाई के अवसर मिलने लगते हैं। भौतिक रूप से मिला तो लोगों ने संचयन करना शुरू कर दिया, ताकि आगे चलकर उसको ब्लैक में बेचकर धनवान बना जा सके। इस काम से आम आदमी के लिए संकट पैदा होने लगता है। यहाँ तक तो 
✨️


जो होती नदिया, मौन कहीं, बह जाती,
उन्मादित सी, क्यूँ बहती मैं?
अंकपाश मेरे, लिपटे पतझड़ के पात कई,
खोई उनसे, फूलों की बात कई!

कौन कहे, उनसे, बिखरे कितने आंगन,
उन्माद ही, ले उजड़े दामन,
उफनते सैलाबों में, जागे
✨️

मैं

तुम्हारी याददाश्त का कायल हूँ…

तुम्हें आज भी याद है—

बरसों पहले

किस फंक्शन में मैंने

कौन-सी शर्ट पहनी थी,
।।इति शम।।
धन्यवाद 
पम्मी सिंह ' तृप्‍ति '..✍️

मंगलवार, 28 अप्रैल 2026

4726 ..जिसने आसमान को ही अपनी छत मान लिया है।

 सादर अभिवादन


सरेआम
सत्य का कत्ल हुआ
मक्कार मकड़ी, तुरन्त,
सिर से पैर तक जाला बुन गई

नूतन रचनाएँ



सबके बीच लंबी बहस के बाद तय हुआ कि यूनियन की साक्ष्य केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि 'टेक्निकल और डेटा-ड्रिवन' होगी. तय हुआ कि यूनियन की ओर से 
प्रशांत बाबू एक 'एक्सपर्ट विटनेस' (Expert Witness) के रूप में अपना विश्लेषण पेश करेंगे. दूसरे गवाह सचिव शिंदे होंगे. ये दोनों केवल अपनी बातें नहीं कहेंगे, 
बल्कि उन दस्तावेजों को साक्ष्य में लाएंगे जो साबित करेंगे कि प्रबंधन ने रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ की है.

चव्हाण साहब ने फाइल बंद करते हुए कहा, "प्रबंधन ने अपना जाल बिछाया था, लेकिन अब हम उनके ही दस्तावेजों को उनके खिलाफ हथियार बनाएंगे. 
30 अप्रैल को इजलास में हमारे गवाह 'सर्जिकल स्ट्राइक' के मोर्चे पर होंगे."





काश—
इस गणना से पहले
हो पाती
बेमकानों की गिनती।

तुम गिन लोगे
छत, दीवार, खिड़कियाँ, पर्दे—
पर छूट जाएगा
वो “घर”,
जिसने आसमान को ही
अपनी छत मान लिया है।





सारे महानगर में है एक अजीब सा रंग मशालों का उद्घाटन,
राजपथ के दोनों तरफ हैं
खड़े मंत्रमुग्ध से सहस्त्र
जनगण, गुजरेगा
कुछ ही देर
में राजन
का
स्वर्णिम रथ पुनः बिखर जाएंगे





द्वार प्रेम के खुले हुए हों, 
बंद झरोखे संशय के हों,
मिटते साये छल के दिल में, 
बीते कल के भय के हों।

साफ़ नज़र आती है मंज़िल, 
साफ़ नज़र है राहों की,
मिटने हैं वे सभी निशाँ जो, 
रंजो-ग़म, विस्मय के हों।





इरा—प्राचीन इतिहास की शोधकर्ता—खोई हुई अनुभूतियों की खोज में है, 
आज उसे तहखाने में एक जर्जर डायरी मिली। 
पन्नों पर बार-बार एक शब्द उभर रहा था— ‘माहवारी’ और नीचे काँपते अक्षरों में लिखा था— 
“यह सृजन की प्रतीक्षा का लाल रंग है।”

इरा ठिठक गई।

“प्रतीक्षा…?” उसने फुसफुसाया, “जब सब कुछ निर्धारित है, तो प्रतीक्षा कैसी?”
उसी क्षण उसके पेट के निचले हिस्से में एक अनजाना कसाव उठा—
धीरे-धीरे बढ़ता हुआ। यह कोई दर्ज पीड़ा नहीं थी, 
कोई प्रोग्राम्ड संकेत नहीं था। कुछ ही पलों में उसके सफेद वस्त्र पर लाल रंग फैलने 
लगा—गर्म, जीवित, अनियोजित। उसकी उँगलियाँ काँप उठीं।


सादर समर्पित
सादर वंदन


सोमवार, 27 अप्रैल 2026

4725 ...नई मंजिलें राह देखतीं, रस्ते कुछ नव बुला रहे हैं

 सादर अभिवादन



नूतन रचनाएँ




कलीं कलीं वनफसा फूलीं ,
उँण्या कुण्याँ सँतराज खिल्याँ 
मोल्यारी मास म्यर पहाड़ मा
डाँडी-काँठी फुल्यारी सज्याँ 

बाट किनार बसींगा फूलीं छन
रौली-खौली काली जीरी फूलीं 
चल दगड़्यों म्याल खैयोला
बण की डाली फलूण झूलीं





ऋतु आने पर बीज पनपते 
भीतर कोई चेता देता,
शुभ संकल्प बीज के सम ही 
सही समय पर ही फल देता!

नई मंजिलें राह देखतीं, 
रस्ते कुछ नव बुला रहे हैं





हम चल तो लेते इठला के मगर 
कोई धरती फूलों वाली न हुई 

फ़िज़ाएँ इत्र सी महकती तो रहीं 
बस हवा ही मेहर वाली न हुई 




एएसएल ने चश्मा उतारकर मेज पर रखा. उनकी नज़रें सीधे वकील भट्ट से मिलीं. 
"देखिए, मिस्टर भट्ट, मैनेजमेंट ने इस अदालत का वक्त बर्बाद किया है. 
80% प्रोसेस लॉस का तर्क और यह सिंगापुर ट्रांजैक्शन—'मेलाफाइड इंटेंशन'
 (Mala fide intention) साफ दिखाई देता है. यदि गवाह जवाब नहीं देना चाहता है 
तो मैं समझूंगा कि पूछा गया तथ्य सही है.”

“नहीं हुजूर, जिरह जारी रखिए.” मनोज भट्ट ने कहा और अपनी सीट पर बैठ गया. आगे की जिरह में जीएम ने दो करोड़ के ट्रांजैक्शन को ही नहीं पूरी ‘डिजिटल ट्रांजैक्शन ऑडिट रिपोर्ट’ को सही स्वीकार कर लिया.

एएसएल ने प्रबंधन साक्ष्य बंद (Close) करके आदेश दिया, 
"यूनियन अपनी साक्ष्य के शपथ पत्र सोमवार तक हर हालत में पेश करे. 
अगले मंगलवार 30 अप्रैल 2019 को सुबह 11 बजे यूनियन अपने गवाह हाजिर रखे 
और प्रबंधन उनसे जिरह के लिए तैयार रहे.




मैं बस खड़ी सोचती रही, उस पल की गिरह में,
क्यों जाना है उसे, जब लौट कर फिर आना था।

शाम की उस धुंध में, कुछ सवाल रह गए यूँ ही,
हर जुदाई में छुपा जैसे मिलने का बहाना था।

सादर समर्पित
सादर वंदन

रविवार, 26 अप्रैल 2026

4724 ..जादुई किताबें ! बारहखड़ी सिखातीं । शब्द ज्ञान करवातीं

 सादर अभिवादन


नूतन रचनाएँ




किराने की  दुकान  तक  का  
एक  और  सफर  तय  होता  है 
हाथ  में  झोला  लिए  
पैदल  आने - जाने  तक  का सफर
ग्यारह  नंबर  की  सवारी  
और  उकताते  दिन  की  
तब्दीली  का   बहाने  लिए  हुए ।




किताबों की कई किस्में
पाई जाती हैं दुनिया में ।
बचपन की रंग-बिरंगे

चित्रों वाली जादुई किताबें !
बारहखड़ी सिखातीं ।
शब्द ज्ञान करवातीं ..





तुम जो मिलते हो ख्यालों में धूप आती है 
यूं पास रहते तो हवाएं भी चुप लगाती है 
गुनगुनाने लगे इस झील का पानी ऐसे 
जैसे नदियां ज्यों पहाड़ों से उतर आती है 
रंग फूलों का भी खिल के निखार आता है 





मैं हमेशा एक पहेली थी 
अब भी हूँ आगे भी रहूंगी 
मुश्किल है समझ पाना मुझे 
जो भी मिला उसके साथ हो लिए 
जो छूट गया पीछे उस पर रोये नहीं कभी 
जिसने अपना बनाया 





"मैडम, आपने अभी तक शादी क्यों नहीं की?...??
अध्यापिका ने कहा, "पहले एक कहानी सुनाती हूं।" उसने कहा, "एक महिला को बेटे की लालसा में लगातार पांच बेटियां ही पैदा होती रहीं। जब छठवीं बार वह गर्भवती हुई तो पति ने उसे धमकी दी कि अगर इस बार भी बेटी हुई तो उस बेटी को बाहर किसी सड़क या चौक पर फेंक आऊंगा। महिला अकेले में रोती हुई भगवान से प्रार्थना करने लगी, क्योंकि यह उसके वश की बात नहीं थी कि अपनी इच्छा अनुसार बेटा पैदा कर दे। इस बार भी बेटी ही पैदा हुई। पति ने नवजात बेटी को उठाया और रात के अंधेरे में शहर के बीचों-बीच चौक पर रख आया। मां पूरी रात उस नन्हीं सी जान के लिए रो-रोकर दुआ करती रही...!!


सादर समर्पित
सादर वंदन
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