।।भोर वंदन।।
बुधवारिय प्रस्तुति कुछ इस तरह से है आप सभी जरूर नजर डाले
इन पंक्तियो के साथ
ओ आस्था के अरुण!
हाँक ला
उस ज्वलन्त के घोड़े।
खूँद डालने दे
तीखी आलोक-कशा के तले तिलमिलाते पैरों को
नभ का कच्चा आंगन!
बढ़ आ, जयी!
सम्भाल चक्रमण्डल यह अपना..!!
अज्ञेय
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फसल कटी है !
खुशी की घङी है !
बहुत दिनों बाद
भूले सुर आए याद..
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कल दोपहर नन्हा और सोनू असम की यात्रा समाप्त होने से तीन दिन पहले ही वापस आ गये। कल शाम सोनू की कोविड की रिपोर्ट पॉज़िटिव आयी है, नन्हे को भी सिर में दर्द था। पूरी दुनिया में कोरोना का नया वेरियेंट ओमिक्रॉन बुरी तरह फैल रहा है। प्रतिदिन लाखों लोग इससे संक्रमित हो रहे हैं। अब दस दिन तक पुन: उन्हें बिना मेड और कुक के रहना होगा। आज सुबह नींद देर से खुली।सुबह पानी पीकर, तैयार होने के लिए जल्दी में सीढ़ियों से ऊपर आते समय नूना की चप्पल अटक गई और बायें घुटने में हल्की चोट लग गई। जून ने बहुत ..
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व्यक्ति
इतना भरा भी नहीं कि..
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एक मुद्दत पहले,गीली मिट्टी की
नर्म देह पर..
टूटी सीपियों और बिखरे शंखों के बीच
घुटनों के बल झुककर
मैंने तुम्हारा नाम लिखा था
अपनी तर्जनी की नोक से..
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और मैं उसे ही भूल जाता हूँ।
उसे रहता है
किस फ़ंक्शन में
मैंने किस रंग की शर्ट पहनी थी,
किस पल
मैंने भीड़ में
किस लड़की को ज़रा ज़्यादा ..
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।।इति शम ।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह ' तृप्ति '..✍️