सादर अभिवादन
दिन भर ब्लॉगों पर लिखी पढ़ी जा रही 5 श्रेष्ठ रचनाओं का संगम[5 लिंकों का आनंद] ब्लॉग पर आप का ह्रदयतल से स्वागत एवं अभिनन्दन...
निवेदन।
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फ़ॉलोअर
गुरुवार, 21 मई 2026
4749 ..पूछ रहीं चुप रह दीवारें छाया किसके हिस्से में
बुधवार, 20 मई 2026
4748..मैं 'मौन' हूँ
प्रातःवंदन
"जीवन बड़ा अजीब होता है। ...कई बार उसकी परतों में से हम जिस रंग को खोजते हैं, वह नहीं निकलता। पर कोई ऐसा रंग निकल आता है जो उससे भी अधिक ख़ूबसूरत होता है।"
अमृता प्रीतम
बुधवारिय प्रस्तुतिकरण को आगे बढाते हुए..
सच कहूं तू जहां तक मुझे दिखता है ।
वहां तक मुझे कुछ भी नहीं दिखता है ।
✨️
किसी वृक्ष का नाम नहीं लिखना,
न किसी ऋतु का।
कुछ टूटनें
पहले से ही आकाश में लिखी होती हैं।
✨️
मैं शब्दों के बीच की वह चुप्पी हूँ, जिसे तुमने अक्सर शांति समझ लिया। मैं वह दीवार हूँ, जिसे तुमने खुद अपने चारों ओर इतना ऊँचा उठा लिया कि अब तुम्हें बाहर का उजाला भी दिखाई नहीं देता।
आज मैं, लेखिका की कलम से यहाँ सिर्फ कागज पर उतरने के लिए नहीं, बल्कि तुम्हारे भीतर सोए हुए उस साहस को जगाने आई हूँ जो अब 'मिट्टी' की तरह दबते-
✨️
लोग बताते हैं कि
मरने से ठीक पहले तक
वह ज़िंदा था—
क्योंकि
उसकी साँसें चल रही थीं,
वह चल रहा था।
पर सच तो यह है कि।
✨️
जिंदगीभर पकते रहे यह सुनते-सुनते
कि नेगेटिव नहीं हमेशा पौजेटिव सोचो,
काश कि जमाने को अस्पताल का ..
।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह ' तृप्ति '..✍️
मंगलवार, 19 मई 2026
4747...मगर वो अतिप्रिय कभी न था...
आपसभी का स्नेहिल अभिवादन।
कहरवा की मीठी रिदम हो रहे हैं.
दुःख आए तो अपनों की यादें भी आईं,
सुख आए तो हम बे-शरम हो रहे हैं.
ख़ुदा की नहीं खा रहे हैं हमारी,
क़सम से हम उनकी क़सम हो रहे हैं.
उसके बिना किसी की शाम उदास न थी
वो जरूर उदास रहा
सुनकर वे सब किस्से
जिसमें मनुष्य निरुपाय दिखता था
उसे कहा गया प्रिय
मगर वो अतिप्रिय कभी न था
वट वृक्ष सरीखा हो तुम्हारा रिश्ता
जङें गहरी हों इतनी थामे रहें सदा
वरदान सी विराट वट की छत्रछाया
यम को कर प्रसन्न तत्क्षण वर पाया
“यह धागा सिर्फ पति की लम्बी उम्र का नहीं, बल्कि हमारे विश्वास, हमारा सम्मान और हमारे साथ के उस वचन का प्रतीक है, जिसे हर दिन निभाने का प्रयास हमें करना होगा।” बरगद के चारों ओर घूमते हुए नन्दनी बुदबुदा रही थी।
“हे वटवृक्ष, हमारे रिश्ते की जड़ें भी इतनी ही गहरी होने में साक्षी रहना कि समय की आँधियाँ भी इन्हें हिला न सकें।” आरव ने पेड़ को प्रणाम करते हुए कहा।
सोमवार, 18 मई 2026
4746..समसामयिक आंधी तूफानों के चलते जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है
सादर अभिवादन
प्रि-मानसूनी बारिश औ समसामयिक आंधी तूफानों के
चलते जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है
और इससे अछूता नेट-वर्क भी नहीं
क्या तेल क्या तैलोपरि व्यवस्थाओं के चौपट होने चलते
हम भी पिट गए
-रचनाओं पर नज़र डालें
परिवार - हाइकु
रविवार, 17 मई 2026
4745...अभी शेष है युद्ध कला...
शीर्षक पंक्ति: आदरणीय अशर्फी लाल मिश्र जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
आइए पढ़ते हैं रविवारीय अंक में पाँच रचनाएँ-
राजर्षि कहें अब राम से,
अभी शेष है युद्ध कला।
आह्वान ही दिव्यास्त्रों का,
अरु प्रयोग है युद्ध कला।।
*****
किताबें गुदगुदाती हैं, हँसाती है
कभी-कभी सच को छिपाकर
खेल खिलाती हैं।
*****
सजाया तुमने वफ़ा का रिश्ता मेरी ही कामयाबियों से,
मैं हारा तो तुम जुदा हुईं—दिल फिर भी तुम पर लुटा हुआ है।
तुम्हारे लहजे से साफ़ ये लगता सलीक़ा छूटा हुआ है।
*****
मोबाइल पर बहुत कुछ अच्छा भी
होता है
प्रात उदित नवजीवन की बेला यूँ खिलती
रेशों रेशों, धानों धानों
छिटक तिनके
अंक भर अपने प्रात लेती, हिये की संवेदी
निकृष्ट विचार न मैल रहे,
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फिर मिलेंगे।
रवीन्द्र सिंह यादव
शनिवार, 16 मई 2026
4744 ..पीड़ा से ही परिचय था जब गुरु आनंद मित्र बन आया
सादर अभिवादन
शांत हृदय से श्वेता ब्लॉग जगत में पुनः आई
धीरे-धीरे मन पर एक संवेदनहीनता का परत चढ़ा रही है।
तीव्र होती मृत्यु की गंध धीरे-धीरे मन पर एक संवेदनहीनता का परत चढ़ा रही है।
फोन आ गया कि "आ जाइये"।
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सादर
कल मिलिएगा भाई रवीन्द्र जी से
वंदन
शुक्रवार, 15 मई 2026
4743...सभी तो ऊर्जा है
दिन-रात
सागर में लहरें उठती हैं
फेन, बुदबुदे, तरंगें
सभी तो जल हैं !
आत्मसिन्धु में वृत्तियाँ
भाव, विचार, कल्पनाएँ
सभी तो ऊर्जा हैं !!
लपेटा उँगलियों पे तुमने जो वो दुपट्टा कुछ शरमाकर,तुम्हारी बेवफ़ाई का हर इक शिकवा अब छूटा हुआ है।सजाया तुमने वफ़ा का रिश्ता मेरी ही कामयाबियों से,मैं हारा तो तुम जुदा हुईं—दिल फिर भी तुम पर लुटा हुआ है।
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गुरुवार, 14 मई 2026
4742..बच्चे छुट्टियाँ मना कर अपने अपने ठिकाने गए
सादर अभिवादन
यह जुम्मा (शुक्रवार) से एक दिन पहले आता है।
अत: इस दिन को गुरुवार भी कहा जाता है।
ने लिखना कम कर दिया है
कुछ जूनी रचनाएं उनकी इस अंक में है
उनको कृपया लिखने पर मजबूर करें

























