सादर अभिवादन
अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस
किसी भी समाज, देश, संस्था और उद्योग में मज़दूरों, कामगारों और मेहनतकशों की
अहम भूमिका होती है। उन की बड़ी संख्या इस की कामयाबी के लिए हाथों,
अक्ल-इल्म और तनदेही के साथ जुटी होती है। किसी भी उद्योग में कामयाबी के लिए
मालिक, सरमाया, कामगार और सरकार अहम धड़े होते हैं।
कामगारों के बिना कोई भी औद्योगिक ढांचा खड़ा नहीं रह सकता।
नूतन रचनाएँ
मल्होत्रा जी अपनी चमचमाती हुई गाड़ी से उतरे और घर की ओर बढ़े ! दीनू भी उनके पीछे चल दिया !
तभी दरबान की कड़कती हुई आवाज़ आई, “कहाँ घुसा चला जा रहा है !
औकात है तेरी ऐसे फर्श पर पैर धरने की ! चल बाहर निकल !
मालिक को बात करनी होगी तो बुला लेंगे तुझे
फिर भी—
तुम हारे नहीं,
क्योंकि तुम्हारे कंधे पर
सिर्फ एक कंकाल नहीं था,
पूरी अंधी व्यवस्था का
जिंदा सबूत लटका हुआ था।
उसने प्रशांत बाबू की तरफ देखा, "तो अब गेंद मंत्रालय के पाले में है?"
प्रशांत बाबू गंभीर हो गए, "हाँ, और मंत्रालय की इमारत में एएसएल के इजलास से बहुत अधिक पेच हैं. वहां फाइलें बोलती नहीं हैं, दबाई जाती हैं.
हम 14 मई तक इंतजार करते नहीं रह सकते, हमें कुछ ऐसा करना होगा कि सरकार हर हालत में 11 मई तक ही अपना निर्णय दे दे क्योंकि
उसे फैक्ट्री प्रबंधन को पहुँचाकर उसका सबूत भी रखना होगा. 13-14 को शनिवार-रविवार हैं, इन दिनों वीकेंड के नाम पर कुछ भी गड़बड़ की जा सकती है."
पचास साल पहले ये आम बात थी कि लोग बीमार ही नहीं होते थे या कहें तब जल, वायु,
और आहार में शुद्धता थी। शारीरिक श्रम से एक स्वस्थ और शांतिपूर्ण जीवन था।
जब गाँव उठकर शहर की और प्रस्थान कर गया और गाँवों में विकास के नाम पर खेत बेच दिए गए
या फिर सरकार द्वारा उनको हाइवे के लिए अग्रहारित कर ली गयी तो
वह सब कुछ समाप्त हो गया। शहर की हवा गाँवों में पहुँची और वहाँ की भी हवा जहरीली हो गयी।
आज की पीढ़ी उसी में पैदा हुई और उसी में पल रही है तो उसकी शुद्धता भी संदिग्ध हो गयी।
प्रदूषण और मिलावट की गम्भीरता को देखते हुए शारीरिक व्याधियाँ जल्दी सिर उठाने लगती हैं तो
इस दृष्टि से 35 वर्ष की आयु के बाद रुटीन चेकअप करवाते रहना चाहिए ताकि
अगर कुछ शारीरिक कमियाँ आरंभ हो रही हों तो उनका समय से उपचार हो सके या फिर
उनके अनुसार खानपान में सावधानी बरती जा सके।
सच कहें तो साइलेंट किलर के पीछे कई और भी कारक होते हैं ,
जिनके असंतुलन से भी कुछ व्याधियाँ प्रकट होने लगती हैं।
मेरे घर के आगे अमलतास के दो पेड़ हैं। वे बारी-बारी से फूले…पहले जिस पेड़ पर अमलतास आए, उसके पूरे फूल ख़त्म हो कर जब तक हरे पत्ते आए, उसके पास का अमलतास एकदम ठूँठ ही था। मुझे लगा,
पेड़ में शायद कोई तरह की खाद डालनी चाहिए थी। कि हालांकि मैं इस साल जनवरी में इस घर में आई हूँ, फिर भी कहीं न कहीं इस छोटे से अमलतास के पेड़ का न फूलना मेरी ही गलती है।
कि कितना सादा वाक्य है, ‘तुम्हारी याद आती है’, कलेजे में राहत महसूस होती है,
जैसे माँ चोट पर फूँक मार रही हो.
सादर समर्पित
वंदन
शुभ प्रभात
जवाब देंहटाएंकल मिलिए रविन्द्र भाई से
वंदन