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शनिवार, 23 मई 2026

4751 ..मैं रेत हूँ— हर बार आँखों में किरकिरी

 सादर अभिवादन


"क्यों नहीं हो सकता है ? तुम कोई भी सवाल पूछो, 
मैं हां या ना में जवाब दूंगा" ।

वह व्यक्ति कुछ सोचते हुए बोला
"हुजूर, नहीं दे पाओगे।"
इससे जज और अधिक गुस्सा हो गया ।
"क्यों नहीं दे पाऊंगा ? जरूर दूंगा, तुम पूछो तो सही"
उस व्यक्ति ने पूछा
"क्या आपकी पत्नी ने आपको पीटना बंद कर दिया है" ?
अदालत में सन्नाटा व्याप्त हो गया।




रंग ज़माने खुदगर्जी यों के थे 
बहरूपिये मयखाने सुरूर रफ्तार में l 

नाजुक थी कड़ियां इसके 
मजहब तालीम छलकते जामों प्याम में ll




संसार का द्वार।जहां भी होओ–चाहे संसार में और चाहे संसार के बाहर, चाहे त्यागी 
होओ चाहे भोगी–एक बात ख्याल रखना: कर्ता-भाव न आए। जहां कर्ता-भाव आया, 
वहीं चूक हो गई, वहीं फिसले, बुरे फिसले। साक्षी-भाव बना रहे। दुकान पर भी बैठ कर अगर साक्षी-भाव बना रहे, बाजार में भी बैठ कर अगर तुम सिर्फ दर्शक मात्र रहो–तो पर्याप्त। 




दो राष्ट्र प्रतिनिधियों की है हंसी ठिठोली
दोनों के नाम संयुक्त मिठास भरी मेलोडी

कूटनीति में अवसर के जुड़ते हैं अध्याय
राष्ट्रशक्ति हो सक्षम मुड़ते युक्ति निभाय
अनचीन्हे इस अभिवव पल में दो जोगी
दोनों के नाम संयुक्त मिठास भरी मेलोडी





यहाँ और अभी होने के लिए 
बस एक ही शर्त है
अपने केंद्र में रहना सीख लो 
तब कहीं और कभी भी रहो 
तुम सदा ही 
अभी और यहाँ हो !!





मैं रेत हूँ—
हर बार
आँखों में किरकिरी
पैरों के नीचे ही क्यों आती हूँ?
कभी किसी ने
मेरे कणों में छिपी
टूटी हुई सदियों को पढ़ा है?
सबने मुझ पर
अपने-अपने महल बनाए,





स्नेह से अंक भरना कभी, 
कभी अंग न समाना खुशी में,
ईश्वर के आगे आँचल पसारना, 
हर मुश्किल और बेबसी में।





"ऐसी भी क्या दुविधा है, आकाश?"

"एक फ्लैट पवई में है—पूरी तरह फर्निश्ड. ए.सी., पंखा, फ्रिज, वाशिंग मशीन, पर्दे, बेड से लेकर किचन के तमाम उपकरणों से लैस है. मुझे सिर्फ अपना सूटकेस लेकर जाना है और चादर बदलनी है. सबसे बड़ी बात है कि यह फ्लैट विक्रोली में मेरे नए ऑफिस के बिल्कुल पास है, एकदम वाकिंग-डिस्टेंस. वहाँ जाने-आने का समय और रोज़ का ऑटो का खर्चा बचेगा. लेकिन उसका रेंट थोड़ा अधिक है. दूसरा विकल्प मैंने अभी अंधेरी ईस्ट में देखा है—एक छोटा 1BHK, जिसका किराया मेरे बजट में है, लेकिन वह पूरी तरह कोरा है. एक बेड के सिवा सब कुछ जुटाना पड़ेगा. ऑफिस से दूर है लेकिन तुम्हारे फ्लैट के नजदीक है," आकाश ने दोनों विकल्प उसके सामने रख दिए.
****
सादर समर्पित
सादर वंदन

1 टिप्पणी:

  1. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति में मेरी ब्लॉग पोस्ट सम्मिलित ल करने के लिए बहुत-बहुत आभार

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