शीर्षक पंक्ति: आदरणीय ओंकार जी
की रचना से।
सादर अभिवादन।
मंगलवारीय अंक में पढ़िए पसंदीदा रचनाएँ-
कौन हो तुम-एक दार्शनिक प्रेम कविता
स्वयं के अस्तित्व से बेखबर
दुर्गम पथ की बाधाओं से अनजान,
कठोर धरातल पर कुसुम-राह तलाशती।
जीवन के इस विस्तृत क्षितिज को
अदम्य उत्साह और चटख सुर्ख रंगों से
रंगने को आतुर-व्याकुल—
कौन हो तुम!
*****
कोई पूछे—
“आज तुमने क्या खाया?”
जैसे वह बरसों पूछती रही है सबसे।
वह प्रतीक्षा करती है
कि बच्चे जब सफल हों
तो परिचय में सिर्फ़ पिता का नाम नहीं,
उसकी जागी रातें भी दिखाई दें।
*****
उसका घर उसका देश
है,
देहरी देश की सीमा,
बच्चे देश के
नागरिक,
उसके होने भर से
महफ़ूज़ रहता है
उसका देश,
चैन
से सोते हैं उसके बच्चे।
*****
सोशल मीडिया में मैडिटेशन का शोर
माँ ! जैसे विशाल, अद्वितीय, अप्रतिम, दैवीय व्यक्तित्व के लिए एक दिन का निर्धारण ! इस बात को लेकर कई बार हम भावुक और आक्रोशित भी हो जाते हैं ! पर मई माह के दूसरे रविवार को मातृ दिवस मनाने के पीछे भी एक बेटी की अपनी माँ के प्रति अटूट प्रेम, सम्मान और सामाजिक सुधार की भावना काम कर रही थी ! उस बेटी का नाम है, एना मारिया जार्विस ! एना की मां का निधन 9 मई 1905 को हुआ था, जो उस वर्ष मई का दूसरा रविवार था, इसीलिए मई के दूसरे रविवार को ही ''मदर्स डे'' मनाने की परंपरा शुरू हुई!
फिर मिलेंगे।
रवीन्द्र सिंह यादव
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