सादर अभिवादन
दिन भर ब्लॉगों पर लिखी पढ़ी जा रही 5 श्रेष्ठ रचनाओं का संगम[5 लिंकों का आनंद] ब्लॉग पर आप का ह्रदयतल से स्वागत एवं अभिनन्दन...
निवेदन।
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शनिवार, 22 अगस्त 2026
4842 ...मर्यादा के ताले जड़े हैं प्रत्येक शब्द पर 'किस पथ जाऊँ?'
शुक्रवार, 21 अगस्त 2026
4841....पर एक ऐसा दिल है...
आप सभी का
स्नेहिल अभिवादन।
चार दिन की बारिश में
गंदला जल हर सीमा लाँघ चुका,
नक्शे पर बनी रेखाएँ डूब गई।
खेत, आँगन, चौखट और सड़क—
सब एक ही विशाल, निष्ठुर नदी बन चुके हैं।
पेड़ों की डालियों से लटके
प्लास्टिक के डिब्बे, कपड़े, और भूली-बिसरी यादें।
दूर बहती जाती है किसी बच्चे की आधी डूबी गेंद,
पीछे छूट जाती है
सालों की हाड़-तोड़ कमाई।
राहत की प्रतीक्षा में टकटकी लगाए
छतों पर कैद इंसान,
जहाँ भूख से ज़्यादा बड़ा है डर—
धीरे-धीरे चढ़ते पानी का।
पानी जब उतरता है,
अपने पीछे छोड़ जाता है
बदबूदार कीचड़, बीमारियॉं,
एक थका हुआ शहर और
शून्य के घेरे में छटपटाता
मजबूर आदमी...।
हर उदास चेहरे पर हँसी टाँक देने के लिए होती हैं।
वो नटखट है, पर किसी का दिल दुखाना नहीं जानती।
वो भूलक्कड़ है, पर रिश्ते निभाना कभी नहीं भूलती।
उसके पास बहुत बड़ी दौलत नहीं,
पर एक ऐसा दिल है
जिसमें छल की जगह नहीं,
सिर्फ़ अपनापन रहता है।
उस फुसफुसाहट का
अनुवाद करती है—
अपनी सुविधा की भाषा में,
और
रिटर्न गिफ्ट की तरह
वही अनुवाद
जनता को लौटा देती है।
तन यह माटी, मन पानी सा
दोनों आते-जाते रहते,
आत्म ज्योति से टिके हुए हैं
जिससे हम अनजाने रहते !
मन के पीछे चलता है तन
तन की सेवा में रहता मन,
सेवक बाहर, मालिक भीतर
कैसे पूर्ण लगेगा जीवन !
गुरुवार, 20 अगस्त 2026
4840 ..आमतौर पर सत्ता कान रहित होती है
सादर अभिवादन
पिछला अंक
बुधवार, 19 अगस्त 2026
4839..अनवरत यात्रा
।।प्रातःवंदन।।
एक किरण आई छाई,
दुनिया में ज्योति निराली,
रंगी सुनहरे रंग में
पत्ती-पत्ती डाली डाली।
एक किरण आई लाई,
पूरब में सुखद सवेरा,
हुई दिशाएं लाल
लाल हो गया धरा का घेरा।
एक किरण बन तुम भी
फैला दो दुनिया में जीवन..!!
सोहनलाल द्विवेदी
बुधवारिय प्रस्तुति में पढिए..
नीले नभ में देख तिरंगा
हर भारतवासी को गर्व है,
वीरों के बलिदानों से ही
आया आज़ादी का पर्व है !..
✨️
अनवरत यात्रा है,
यह जिंदगी हर पल।
नई आदतों के बनने और
पुरानी आदतों के ढहने की ।
जमती जाती हैं हर,
परवर्ती परत-दर-परत।
✨️
एक लड़की है...
जो हर पाँच मिनट में कुछ न कुछ भूल जाती है,
कभी फ़ोन कहाँ रखा, कभी चश्मा कहाँ छोड़ा,
कभी खुद ही पूछकर अपना सवाल तक भूल जाती है।
✨️
याद तो आई थी माँ
अपने जन्मदिन पर
तुझे याद कर मेरी
आँख भी भर आई थी,
जब यारों ने बाज़ार से लाकर
रेडीमेड केक खिलाया था..
✨️
अच्छा जिसका नसीब होता है, दोस्त उसके करीब होता है,
जो साथ हँसता और रोता है, सच्चा दोस्त वही होता है,
राह में पड़ते हो काँटे अगर, हटा के उन्हें फूल वो बोता है
दिल गर कभी उदास हो तो, साथ अपना भी चैन खोता है,
✨️
।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह ' तृप्ति '..✍️
मंगलवार, 18 अगस्त 2026
4838....खुल रहे मन के बंधन आज...
आप सभी स्नेहिल अभिवादन।
तृण पात सारे डोल रहें हैं
मन की परतें खोल रहें हैं
धीरे धीरे मद्धम मद्धम
कानों में कुछ बोल रहें हैं
बूंदों से आह्लादित मन
जंजीरें कितनी तोड़ रहे हैं
खुल रहे मन के बंधन आज, झींगुर प्रिय के गीत सुनाते
तरुण मिलन की आयी बेला, मुस्कुरा रही वो आते जाते
प्रेम प्यार और हँसी-खुशी से
जीवन लहर लहराने को।
अपनेपन का बीज हर एक
मन में बोते जाने को।
स्वार्थ का कूड़ा छींट-फटककर
जीवन से हटवाने को।
होने वाला है क्या?
जो हैं बिछड़ गए हमसे ।
करते होगें
याद हमें क्या ?
या ,फिर भूल गए होंगे
या ,फिर बस गई होगी उनकी
कोई नई दुनियाँ ......
वर्षा की बूँदों से सजी हुई है धरती,
काजल से काले बादल घिरें कभी,
घुल-घुल बरखा की लग जाए झङी।
स्मृतियों के मयूर तब पंख फैलाएंगे,
छम-छम करते मेघ मल्हार गाएंगे।
पानी के बुलबुले, बचपन की यादें,
काग़ज़ की नाव जल में तैराएंगे !
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सोमवार, 17 अगस्त 2026
4837.. किसी भी लड़की को तेरे नाम से पुकारने पर भी वह 'तू' नहीं हो जाती है
सादर अभिवादन
चिल्लाने और हड़बड़ाने की निर्विघ्न हुआ तो क्यों हुआ ,
कहीं गड़बड़ी क्यों नहीं हुइ।
अच्छा काम दे दिया पीएम साहब ने
लगभग चार वर्ष बाद आज हमारे प्रिय रचनाकार रोहिताश्व घोड़ेला
की दो रचनाएं दिखी, दोनों रचनाएं आज है
रविवार, 16 अगस्त 2026
4836 अपने सपनों का साथ मत छोड़ना
आपके सन्मुख परोसे हैं, अखबारों में प्रकाशित रचनाएं किसी
अन्य ब्लॉग में रख कर लाई गई है


















