सादर अभिवादन
कल स्वागत करिएगा माह सितंबर , इसी मास में हम
सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन से, उनका जन्मदिन हम
शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं
और मनाते रहेंगे
शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं
और मनाते रहेंगे
इसी मास के परंपरागत उत्सव भी संग संग चलेंगे...मसलन ...
कृष्ण जन्माष्टमी, हल छठ, पोरा, हरतालिका तीज, और गणेश चतुर्थी
लोगों से कहिए उपवास करें पर खा-पी कर
पसंदीदा रचनाएं
एक दिन स्वप्न पिटारा गिर
कर बिखर जाएगा,
मायावी आकाश की तरह बहुत
दूर कहीं तब नज़र आएगा
दूर कहीं तब नज़र आएगा
देह का शून्य पिंजर,
अंतरिक्ष में दिशाहारा पखेरू
जाने -किधर जाएगा,
अंतरिक्ष में दिशाहारा पखेरू
जाने -किधर जाएगा,
एक दिन स्वप्न पिटारा
गिर कर बिखर
गिर कर बिखर
जाएगा
रक्षाबंधन पर और भाई दूज पर बहन जी के नफ़ा-नुकसान की बात
सोचने में भी मुझे अब शर्म आती थी.
सोचने में भी मुझे अब शर्म आती थी.
बड़ा होने पर कमाऊ होने के बाद मैंने रक्षाबंधन पर पहली बार (1974 में) जब अपनी जेब से बहन जी को भेंट दी तो मैं बेहद ख़ुश था लेकिन पता नहीं क्यों, मेरे सर पर हाथ फेरते हुए बहन जी की आँखें डबडबा रही थीं.
रुक्मणी के व्रत भी
कहाँ काम आए?
राधा को ही दे सब
मान संगिनी का
वफ़ाओं का पट्टा
गले पड़ गया है
सभ्यता का सबक
जब से है सीखा
हिंदू धर्म में पूजा-पाठ, आरती या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के दौरान घंटी बजाना एक अनिवार्य परंपरा है। चाहे घर का छोटा सा मंदिर हो या विशाल देवालय, घंटी की सुरीली गूंज पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देती है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पूजा के समय घंटी बजाना केवल एक रस्म है या इसके पीछे कोई ठोस वजह है? शास्त्रों और आधुनिक विज्ञान दोनों के अनुसार, घंटी की गूंज के पीछे कई आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक रहस्य छिपे हैं।
चलते -चलते
लघुकथा/कविता का चौथा अंक
नया विषयः गणपति उत्सव, और जगराता, व्रत
प्रेषण तिथिः 11 सितंबर 26
प्रकाशन तिथिः 13 सितम्बर 26
सादर समर्पित
वंदन
