निवेदन।


फ़ॉलोअर

शनिवार, 5 सितंबर 2026

4856...हराम की नहीं खाता वो...

शीर्षक पंक्ति: आदरणीया रोली अभिलाषा जी की रचना से।

सादर अभिवादन। 

चित्र साभार:गूगल 

आज शिक्षक दिवस है। भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति(1952-62) व दूसरे राष्ट्रपति(1962-67) रहे डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन मूलतः एक शिक्षक थे,दुनिया उन्हें एक महान दार्शनिक,शिक्षाविद,लेखक और चिंतक के रूप में जानती है। उन्होंने हिंदू-धर्म(Hinduism) की महान शिक्षाओं और मर्म को दुनिया के समक्ष प्रचारित और प्रसारित किया। उनका जन्म 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के एक गाँव में हुआ था। उन्होंने अपना जन्मदिवस शिक्षकों को समर्पित किया था।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का यादगार कथन-

यदि मानव दानव बन जाता है तो यह उसकी हार है, यदि मानव महामानव बन जाता है तो यह उसका चमत्कार है। यदि मनुष्य मानव बन जाता है, तो यह उसकी जीत है।

'पाँच लिंकों का आनन्द' परिवार की ओर से शिक्षक-वर्ग को हार्दिक शुभकामनाएँ।     

शनिवारीय अंक में पढ़िए पाँच रचनाएँ-

 एक टूटा सपना

तेरा तसव्वुर था

या मेरी खामखयाली थी

नहीं जानती

बस जानती हूँ तो सिर्फ यह

कि मुद्दतों बाद एक आस जगी थी

*****

कविता | सुबह की चाय संग | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

भीगते हैं

इस क़दर वे

कि जैसे आंसुओं से

भीगते है शब्द अकसर

वे आंसू भी कभी

ग़म के, ख़ुशी के

कि बारिश से हुए तर

नीम पर

*****

गालीबाज

न हीं इस फिराक में रहता है

कि कोई दुम हिलाए उसके सामने

या फिर मांगे माफ़ी

जो होता है बस वही दिखता है

घिनौना, वाहियात, लिजलिजा

हराम की नहीं खाता वो

*****

कसकें

एक

बड़ा ही

वजनी पत्थर,

रखा है सीने के ऊपर

पूछो न मुझसे ऐ दोस्तों

कसकें दबीं हुईं हैं

कितनी  सारी

इस सिला

तले

*****

नटखट बकरी

चेतना सदा पदार्थ से अलग है पर उसका अनुभव पदार्थ में जाकर ही हो सकता है। यदि पानी ही पानी हो तो पानी को अपनी खबर नहीं होगी, थोड़ी सी भूमि आ जाये तो जल स्वयं को भूमि से पृथक मानेगा और अपने पर भी नज़र जाएगी। उनका भी यही हाल है, वे जो नहीं हैं, जब वह देखते हैं तो ख़ुद पर भी नज़र जाती है।

*****

फिर मिलेंगे। 

रवीन्द्र सिंह यादव 

प्रार्थना: समस्त चयनित रचनाकारों से क्षमा याचना कि तकनीकी कारणों से आमंत्रण सूचना संबंधित रचनाकार के ब्लॉग पर प्रकाशित नहीं हो पा रही है, असुविधा के लिए खेद है। 


1 टिप्पणी:

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...