शीर्षक पंक्ति: आदरणीया रोली अभिलाषा जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
आज शिक्षक दिवस है। भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति(1952-62) व दूसरे राष्ट्रपति(1962-67) रहे डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन मूलतः एक शिक्षक थे,दुनिया उन्हें एक महान दार्शनिक,शिक्षाविद,लेखक और चिंतक के रूप में जानती है। उन्होंने हिंदू-धर्म(Hinduism) की महान शिक्षाओं और मर्म को दुनिया के समक्ष प्रचारित और प्रसारित किया। उनका जन्म 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के एक गाँव में हुआ था। उन्होंने अपना जन्मदिवस शिक्षकों को समर्पित किया था।
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का यादगार कथन-
“यदि मानव दानव बन जाता है तो यह उसकी हार है, यदि मानव महामानव बन जाता है तो यह उसका चमत्कार है। यदि मनुष्य मानव बन जाता है, तो यह उसकी जीत है।”
'पाँच लिंकों का आनन्द' परिवार की ओर से शिक्षक-वर्ग को हार्दिक शुभकामनाएँ।
शनिवारीय अंक में पढ़िए पाँच रचनाएँ-
तेरा तसव्वुर था
या मेरी खामखयाली थी
नहीं जानती
बस जानती हूँ तो सिर्फ यह
कि मुद्दतों बाद एक आस जगी थी
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कविता | सुबह की चाय संग | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
भीगते हैं
इस क़दर वे
कि जैसे आंसुओं से
भीगते है शब्द अकसर
वे आंसू भी कभी
ग़म के, ख़ुशी के
कि बारिश से हुए तर
नीम पर
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न हीं इस फिराक में रहता है
कि कोई दुम हिलाए उसके सामने
या फिर मांगे माफ़ी
जो होता है बस वही दिखता है
घिनौना, वाहियात, लिजलिजा
हराम की नहीं खाता वो
*****
एक
बड़ा ही
वजनी पत्थर,
रखा है सीने के ऊपर
पूछो न मुझसे ऐ दोस्तों
कसकें दबीं हुईं हैं
कितनी सारी
इस सिला
तले
*****
*****
फिर मिलेंगे।
रवीन्द्र सिंह यादव
प्रार्थना: समस्त चयनित रचनाकारों से क्षमा याचना कि तकनीकी कारणों से आमंत्रण सूचना संबंधित रचनाकार के ब्लॉग पर प्रकाशित नहीं हो पा रही है, असुविधा के लिए खेद है।
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