सादर अभिवादन
चल दिया सितंबर भी
धन्यवाद सितंबर
उसका भी समय आ गया था
अक्टूबर है दो-दो उत्सव मनवा कर ही जाएगा
पूरे 31 दिन रहेगा
खास जानकारी
इस शनिवार से पम्मी सिंह जीआएंगी
खास जानकारी
इस शनिवार से पम्मी सिंह जीआएंगी
शनिवार बोले तो 03 अक्तूबर से लगातार
सादर शुभकामनाए नए प्रभार हेतु
सादर शुभकामनाए नए प्रभार हेतु
देखिए रचनाएं....
श्याम संध्या दीप जलाए
अस्ताचल सूर्य सागर अंक
अब विश्राम पाये
दिन का ताप उतरा
शीतल हवा का झोंका धीरे से बह निकला
अस्फुट ध्वनि कुछ सहज हुई
सांसों के रास्ते है समाना
पलकों में आकर बैठ जाना
दिल को जरा मेरे अपनाना
एहसान मानेगा दिल ये दीवाना .
ज़मीं से आस्माँ तक चल
मकीं अपने मकाँ तक चल
ये भटकन दूर हो जाए
तू लश्कर कारवाँ तक चल
जागी आँखों में कोई ख़्वाब आ गया था। तमाम पहरेदारी, तमाम बाड़ेबंदी के बाद भी। जाने कैसे। जागी आँखों के ख़्वाब सोई आँखों के ख़्वाब से मुख़्तर होता है। नींद में कोई बुरा ख़्वाब देखो तो आँख खुलने पर राहत होती है कि चलो ख़्वाब था, बीत गया। अगर अच्छा ख़्वाब देखो तो जागने पर अच्छा महसूस होता है, चेहरे पर मुस्कुराहट खेलती रहती है।
सुबह रोज की तरह 6 बजे मेरी आँख खुली। रात जितना सन्नाटा था सुबह उतना ही शोर हो रहा था। आँख मींचते हुए मैं बाहर निकला। पता चला कि पड़ोस के चाचाजी का किसी ने धारदार हथियार से गला रेतकर मर्डर कर दिया है। आज भी मैं सोचता हूँ कि क्या मैं उस रात उनकी जान बचा सकता था? पर मैं तो सिर्फ़ 9 साल का था।
सादर समर्पित
वंदन