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बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

4894 ..नौ दिन माँ के नाम और दसवां दिन विजयादशमी

 सादर अभिवादन


नवरात्रि , नवरात्रि , नवरात्रि , नवरात्रि 
नौ दिन माँ के नाम
और दसवां दिन 
विजयादशमी
सिर्फ नै दिन क्यों ,
सारी उमर माँ के नाम ही तो है
और फिर दीपावली
फिर साल खतम

देखिए रचनाएं...

आज पम्मी जी को आना को आना था
नहीं आई तो...क्या हुआ
हम और आप हैं न
ओह आह क्यों ...




आज एक  बूंद ओस मिली है,
प्यासे को बस बरबस मिली है I 
आज शाख पे कली खिली है,
आज राख में रौशनी मिली है I




हमसे मत पूछो कैसे चलता है आंदोलन सब का
वोटों की बात नहीं है ये किस्सा है हसरत का
जिन्हें काम है काज है करना वो न भीड़ लगाए
जो भीड़ को आग में झोंके उन्हें कौन जिताए





खिलाड़ी को पहली बार अपनी हार का अंदेशा होने लगा। उसने अपने गुंडों को रास्ते में तैनात कर दिया। प्रतिद्वंद्वी जिस विमान से आ रहा था, लैंड होते ही उसे घेर लिया गया और एक गुप्त स्थान पर पहुँचा दिया गया।

निर्धारित समय पर प्रतियोगिता शुरू हुई। प्रतिद्वंद्वी का स्थान खाली था। खिलाड़ी ने स्वायंभू ढंग से खुद को विजेता घोषित कर दिया। उसके पाले हुए लोग तालियाँ बजाने लगे और उसकी 'अजेय छवि' का गुणगान करने लगे।








सादर समर्पित
वंदन

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