सादर अभिवादन
श्वेता जी अवकाश पर
कारण अपरिहार्य
सादर वंदन
रचनाएं देखें
तुम्हारे दमन ने
मृत्युदंड के आदेश पर
हस्ताक्षर करके
निब तोड़ने की
परम्परा का
निर्वहन किया।
अंतस के हिंडोले हृदय की हारिल
प्रदक्षिणा के फेरे सब कुछ को लुटा के
लय का रुप सिरजता है
नृत्य , गीत , संगीत
पुलक नव - नव रुप धरे
बोलते रंग,
फूलों से खलते रंग,
पत्तों में डोलते रंग।
इंद्रधनुष में लिपटे रंग,
सूर्यकिरण में सिमटे रंग ।
शिशिर ऋतु में,
माँ के कहने पर,
रखी थी खीर शरद पूर्णिमा
की चाँदनी में,
खीर में चाँद का पीलापन
बचा रहा,
खीर के
सुंदर कटोरे
छतों पर रखना,
ओ गगन की
चाँदनी
आकर इन्हें चखना,
आज
निधिवन
रास का सुंदर नज़ारा है.
सादर समर्पित
वंदन






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