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सोमवार, 26 अक्टूबर 2026

4906 ..नहीं छिटकन और विघटन, नहीं अब कुछ और क्षति हो

 सादर अभिवादन


अक्टूबर इजाजत मांग रहा है
मांगने वाले को देना ही पड़ता है
आने वाला शोर-शराबे के साथ जो आ रहा है
स्वागत है दीपमालिका पर्व का


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(आपका कॉमन सेंस CJP के प्रोटेस्ट में गया है जो मुझे ये बात लिखनी पड़ रही है।) मैंने ड्राइवर से पूछा कि अचानक ब्रेक क्यों मारा? उसने कहा कि कुत्ता सामने आ गया था। मैंने कहा चढ़ा देता, बोला मैं शाकाहारी हूँ। थोड़ी देर बाद मेरा गंतव्य आ गया। मैंने 15 की जगह 10 रुपया दिया क्योंकि बस इस मुझे 5 मिनट लेट पहुँचाया। ड्राइवर गुस्सा हो गया, बोला 5 रुपये और दो। मैन कहा, कुत्ते से माँग लो।





बच्चा नमक से 
रोटी खा रहा है
नेता विकास के फर्जी आंकड़े बता रहा है 

नेता ने अभी अभी छीनी है
एक बच्चे के हाथ से मेलोडी 
उड़ रहा है जहाज में 
नेविगेशन डेटा कर रहा चुगली 
वह उतर रहा है इटली में 
वहीं बनेगी नई रील
मेलोडी इतनी चाकलेटी क्यों है?




नहीं छिटकन और विघटन,  
नहीं अब कुछ और क्षति हो,
एक धड़कन, एक जीवन, 
बन चले सम्मिलित प्रगति हो,

गर्व, बल अग्रज सहित सब,  
प्रेम, करुणा अनुज प्रति हो,
बस यही आग्रह सभी से, 
एक गति हो, एक मति हो।





क्रूज की उस छत पर सब हैरान परेशान घूम रहे थे कि सूरज किधर से निकलेगा। रात में हमारे कैप्टन ने क्रूज को किस दिशा में मोड़ा है कोई नहीं जानता। बस सब इंतज़ार में थे। मैं भी। लेकिन मन में यह बात भी चल रही थी कि रोशनी के लिए यह तलब हम सबके भीतर है। अंधेरा किसको चाहिए, रोशनी ही सबको चाहिए। लेकिन क्या सूरज निकलने से सबके अंधेरे दूर हो जाते हैं? काश कि हो जाते!





लगता नहीं है दिल
लहरें पाती नहीं साहिल
गम के समंदर में तूफान उठाने
हो जाती है अब तन्हाई भी शामिल .


सादर समर्पित
वंदन 

1 टिप्पणी:

  1. ख़ुद को ख़ुदा कह देना ही कोई कमाल नहीं
    ख़ुद से ख़ुद को सह लेना ही कमाल होता है
    वंदन

    जवाब देंहटाएं

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