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रविवार, 11 अक्टूबर 2026

4891 ..किससे कहता, मेरी किश्ती को डूबने से बचा लो

 सादर अभिवादन

आज अग्रसेन जयंती है

अग्रकुल शिरामणि महाराजा अग्रसेन
11 अक्टूबर, रविवार (आश्विन शुक्ल प्रतिपदा) को मनाई जा रही है

देखिए रचनाएं....



किससे कहता, मेरी किश्ती को डूबने से बचा लो,
मैं बिगड़ी क़िस्मत और नौका लिए उतर समंदर गया था।
पकड़नी थी मुझे खोई रफ्तार और बिखरे सपने,
जिसे मेरी लापरवाही ही निगल बन भंवर गई थी। 




दोपहर के आसपास
साइकिल की घंटी बजाते
आते थे डाक बाबू..
खाकी यूनिफॉर्म पहने
खाकी टोपी लगाए,
खाकी बस्ते में लिए 
चिट्ठियों के पुलिंदे ।





"बेटे! मैं उसके साथ आ जरूर रहा हूं, पर तुम करना वही जो तुम्हें करना है।”




जब  सबकुछ  प्रतिकूल  नजर  आए 
प्रंशसा - निंदा  का   धुँआ  दर्पण  को  ढ़क  जाए 
नियति  भाग्य   विश्वास  की  परीक्षा  लेने  आए 
तब  जीत  किसकी  होगी  ?  सदैव  तुम्हारी  
हे  मेरे  पथिक  !   




कान्हा मैं Gen zee हूँ, 
मैं मंदिरों से ज़्यादा कैफ़े जाती हूँ। 
कान्हा मैं तुमसे मंदिर में नहीं, 
कैफ़े में मिलना चाहती हूँ।
तुम मंदिर में मिलोगे, मैं तुम्हारी स्तुति करुँगी।
तुम मौन खड़े रहोगे, मैं अपनी अपूर्णताएं गिनूंगी।



सादर समर्पित
वंदन

4 टिप्‍पणियां:

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