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बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

4908..उँगलियों पर पुराना स्पर्श..

 भोर वंदन 

तिमिर को भेद कर अब

      जगमगाने कौन आया है?

बहुत लम्बी निशा बीती

अंधेरी कालिमा वाली

        बहुत ही दूर लगती थी

        उषा वह लालिमा वाली

मगर अब प्राची को अरुणिम

बनाने कौन आया है?

उर्मिल सत्यभूषण

बुधवार भोर की अभ्यर्थना और हम हाजिर है..

पीठ पर दरवाज़ा


मैंने

स्मृति की तह में हाथ डाला,

उँगलियों पर

एक पुराना स्पर्श लगा रह गया।

उसे धोने के लिए

मैं कुएँ तक गई,

✨️

जहाँ पहुँच जाएँ मतवाली

हर सोसाइटी में महिलाओं का एक न एक ऐसा समूह होता है जो भजन, जाप आदि में रुचि लेता है और उत्सव के दिनों में अधिक सक्रिय हो जाता है। ऐसे ही एक समूह की ...

✨️

तैरती हुई रोटियाँ / बलराम अग्रवाल

  ✨️


पति निकम्मा नहीं था, लेकिन कोरोना के चलते सभी तरह के निर्माण-कार्य बन्द थे। इसलिए घर में ही पड़े रहने को विवश था।

“सुनो,” भूख से विह्वल बच्चों को देखकर एक दोपहर पत्नी ने उससे कहा, “नहर पार वाले खेतों में खीरा, ककड़ी और टमाटर..

✨️

एक गीत -शरद पूर्णिमा पर

ओ शरद की 

पूर्णिमा 

स्वागत तुम्हारा है.

आज का 

मौसम अलौकिक 

और प्यारा है.

खीर के 

सुंदर कटोरे 

छतों पर रखना,..

✨️

पम्मी सिंह ' तृप्ति '


1 टिप्पणी:

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