।।प्रातःवंदन।।
"है वहाँ कोई चल रहा है
कभी आगे कभी पीछे
कभी मेरे बराबर पर।
सुबह की फूटी किरन
बस पास मेरे
है उजाला औ' क्षणिक
उल्लास मेरे ..."
दूधनाथ सिंह
जीवन के गहन रूप को इंगित करती पंक्तियों संग नज़र डालें लिंको पर..
फासलों के उस पार....
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बहुत दिनों से देखते चले आ रहे है कि प्राकृतिक आपदा हो या फिर मानव जनित - लोगों को कमाई के अवसर मिलने लगते हैं। भौतिक रूप से मिला तो लोगों ने संचयन करना शुरू कर दिया, ताकि आगे चलकर उसको ब्लैक में बेचकर धनवान बना जा सके। इस काम से आम आदमी के लिए संकट पैदा होने लगता है। यहाँ तक तो ..
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खामोशी जो सब कह गई | अनकही भावनाओं की भावुक हिंदी कहानी
"शब्दों की एक सीमा होती है, पर संवेदनाएँ असीम हैं।"
अक्सर हमें लगता है कि मन की उलझनों को शब्दों के धागे में पिरोकर बाहर निकाल देने से हृदय का बोझ कम हो जाएगा। हम सोचते हैं कि कह देने से मन खाली हो जाएगा। लेकिन क्या वाक़ई ऐसा होता है ? ..
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सुनो
पता है तुम्हें
कोई-कोई इंसान
किसी के लिए बोझ हो जाता है
कुछ को नापसंद हो जाता है
और
बहुतों की आंखों की किरकरी बन जाता है. ..
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तनाव
तनाव
हिस्सा है
जीवन का
प्रकृति का
कल्पना का
सोच का..
।। इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह ' तृप्ति '..✍️

"शब्दों की एक सीमा होती है,
जवाब देंहटाएंपर संवेदनाएँ असीम हैं।"
सुंदर अंक