पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद एक और निवेदन आप सभी से आदरपूर्वक अनुरोध है कि 'पांच लिंकों का आनंद' के अगले विशेषांक हेतु अपनी अथवा अपने पसंद के किसी भी रचनाकार की रचनाओं का लिंक हमें आगामी रविवार तक प्रेषित करें। आप हमें ई -मेल इस पते पर करें dhruvsinghvns@gmail.com तो आइये एक कारवां बनायें। एक मंच,सशक्त मंच ! सादर

समर्थक

रविवार, 17 जनवरी 2016

183..आकस्मिक प्रस्तुति...

सादर अभिवादन
आज अचानक यह प्रस्तुति मेरे माध्यम से
कल भाई कुलदीप जी ने रचनाओं का चयन तो किया है
पर अपरिहार्य कारणों से आपके समक्ष नही आ पाए
आएंगे ज़रूर और... आज ही आएगी..उनकी प्रस्तुति
क्रम को बरकरार रखने हेतु
कुछ मेरी पसंद की रचनाएँ प्रस्तुत है...

कश्मीर के तीन सेब ने ,,
मुझे माँ ,,
पत्नी ,,
बिटिया के प्यार के 
बीच का फ़र्क़ समझा दिया ,,,,,,,,,,,,
एक में हुक्म था ,,
एक में लापरवाही ,,
एक में प्यार ही प्यार ,,
बस



चाँद कोई मेहमान नहीं है,
लोगों पर अहसान नहीं है !

अपने लोगों को वर देना
वैसे भी, अनुदान नहीं है !


क्या किया जाये 
जब देर से 
समझ में आये 
खिड़कियाँ 
सामने वाले की 
जिनमें घुस घुस 
कर देखने समझने 
का भ्रम पालता 


समरथ को नहीं दोष गोसाईं ,
देश की दौलत मिलकर खाई !
सबका हिस्सा आधा -आधा 
सबके सब मौसेरे भाई !


समय! कब रुका है किसी के लिए?
वो तो यूँ गुज़र जाता है... 
पलक झपकते ही!-
मानो सीढ़ियाँ उतर जाता हो कोई,
तेज़-तेज़,* *छलाँग लगाते हुए -
धप! धप! धप! - और बस!-
यूँ गुज़रता है समय!

आज यहीं तक

प्रतीक्षा कीजिए भाई कुलदीप जी की प्रस्तुति का
सादर...
यशोदा






3 टिप्‍पणियां:

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...