पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

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रविवार, 24 जनवरी 2016

191..जो झूठ की चादर आदमी ने दिल में चढ़ाई नहीं होती

सुप्रभात दोस्तो
  पांच लिंको का आनंद पर आपका स्वागत है।
     पहली बार पांच लिंको का आनंद पर आपका दोस्त विरम सिंह सुरावा ।
    किसी कवि की कविता जो मन मे जोश भर देती है।
  मेने पढी सोचा आपको भो सुना दूँ.....

☆ जीवन मे कुछ करना है तो ,  मन को मारे मत बैठो ।
    आगे आगे बढना है तो , हिम्मत हारे मत बैठो ।।

चलने वाला मंजिल पाता , बैठा पीछे रहता है।
ठहरा पानी सड़ने लगता ,बहता निर्मल होता है ।
चलो कदम से कदम मिला कर , दूर किनारे मत बैठो ।।

और अब प्रस्तुत है पहली बार मेरे पंसद की लिंक ...      
          यथार्थ पर ..........विक्रम प्रताप सिंह
फिर दुनिया में तनिक भी बुराई नहीं होती।
जो झूठ की चादर आदमी ने दिल में चढ़ाई नहीं होती ।।

ना होता अपने, बेगाने होते जाने का किस्सा
आसमान में परिन्दों की भी लड़ाई नहीं होती।।



दुनिया के इतिहास में, दिवस आज का खास।

अपने भारत देश में, जन्मा वीर सुभास।।

--

जीवित मृत घोषित किया, सबको हुआ मलाल।

सत्ता पाने के लिए, चली गयी थी चाल।।

--

क्यों इतने भयभीत हैं, शासन में अधिराज।

नहीं उजागर हो सका, नेता जी का राज।।



नेताजी के भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति हेतु अमूल्य योगदान के लिए हम

 सभी सदैव ऋणी रहेंगे। उनके जैसे ओजस्वी वाणी, दृढ़ता, स्पष्टवादिता

 और चमत्कारी व्यक्तित्व वाले लोकप्रिय नेता की आज सर्वथा कमी 

महसूस होती है। स्वतंत्रता प्राप्ति हेतु उनका भारतवासियों का उद्बोधन

 भला कौन भुला सकता है-“ अब आपका जीवन और आपकी सम्पत्ति 

आपकी नहीं है, वह भारत की है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि यदि आप इस 

सरल सत्य को समझते हैं कि हमें किसी भी उपाय से स्वतंत्रता प्राप्त 

करनी है और अब हम एक ऐसे स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में हैं जो युद्ध की 

स्थिति में है तब आप सहज ही समझ जायेंगे कि कुछ भी आपका नहीं है।




कविता मंच पर .....विवेक रतन सिंह


हँसी में घुल जाती है 

ख़ुशी में मिल जाती है 

है  अनीता एक  सुगंध मधुर 

हर पुस्तक  में मुस्काती है 

लिखकर वो भाव अपने 

जीवन  को जगमगाती   है 

और झिलमिल-झिलमिल तारों को  भी 

चाँद बन  वो  पढ़ाती है 

****



प्रतिभा किसी चीज की मोहताज नहीं होती और न ही किसी भी तरह का 

रोड़ा उसकी तरक्की के रास्ते को रोक सकता है. 

ऐसा ही कुछ कर दिखाया है बाबा भीमराव आंबेडकर यूनिवर्सिटी 

(बीबीएयू), लखनऊ  की छात्र रत्ना रावत ने. एमसीए स्टूडेंट रत्ना रावत

 के पिता बीबीएयू में ही चपरासी हैं और अब रत्ना ने एमसीए में टॉप कर 

अपने पिता का सिर गर्व से उंचाकर दिया है.  

रत्ना के पिता बृज मोहन बीबीएयू में ही 

चपरासी के पद पर कार्यरत हैं 

अब दीजिए आज्ञा 
धन्यवाद

10 टिप्‍पणियां:

  1. वाह..
    बेहतरीन
    काफी मशक्कत की है आपने
    इस प्रस्तुति मे..
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. पहली प्रस्तुति...
    अजेक्षा से अधिक अच्छी...
    आभार आप का...

    उत्तर देंहटाएं
  3. मेरी रचना को जगह देने के लिये आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  4. मेरी रचना को जगह देने के लिये आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत बढ़िया हलचल प्रस्तुति में मेरी ब्लॉग पोस्ट शामिल करने हेतु आभार!

    उत्तर देंहटाएं

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