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बुधवार, 23 जनवरी 2019

1286..चल जहाँ तक बाँसुरी की धुन चले..


।।मांग्यलम् सुप्रभात।।

चल जहाँ तक बाँसुरी की धुन चले
फूल की खुशबू चले, गुनगुन चले
भीग जा तू प्रीति के हर रंग में
साथ जब तक प्राण का फागुन चले"
               कुंवर बेचैन
चंद सुरूचिपूर्ण शब्दों के साथ गौर फरमाएं निम्न लिंकों पर..✍
🐤🐤
आदरणीया नीतू ठाकुर जी की खूबसूरत ग़ज़ल

मैं गजल हूँ तेरी गुनगुनाया करों..
अपने अधरों पे हमकों सजाया करों
तेरे खामोश दिल की मैं आवाज हूँ
गीत में सिसकियाँ न मिलाया करो..

🐤🐤
आदरणीया साधना वैद जी की संवेदनशील रचना..

भरा हुआ हो कलुष मनुज के हृदयों में
संस्कार की बात वहाँ बेगानी है
घर घर में बसते हों रावण कंस जहाँ
मानवता की बात वहाँ बेमानी है !
🐤🐤
आदरणीया अजीत गुप्ता जी की विचारपूर्ण लेख..हीन भावना से ग्रस्त हैं हम

कल मैंने एक आलेख लिखा था - पाई-पाई बचाते हैं और रत्ती-रत्ती मन को मारते हैं । हम भारतीयों का पैसे के प्रति ऐसा ही अनुराग है। लेकिन इसके मूल में हमारी हीन भावना है। दुनिया जब विज्ञान के माध्यम से नयी दुनिया में प्रवेश कर रही थी, तब हम पुरातन में ही उलझे थे। किसी भी परिवार का बच्चा अपने माता-पिता पर विश्वास नहीं करता, वह उन्हें पुरातन पंथी ही मानता है और हमेशा असंतुष्ट रहता है। 
🐤🐤
आदरणीया अभिलाषा चौहान जी की अध्यात्मिक रचना..


दर्शन है,
यात्रा!
द्वैत से अद्वैत की
असत्य से सत्य की।
दर्शन कराता बोध,
इहलौकिक जगत ,
के प्रपंचों की सत्यता का,
संसार की नश्वरता का।
दर्शन मार्ग है,
मिलन का ,..
🐤🐤
आदरणीय अशोक वामनीया जी की रचना के 

सब ठीक तो है ना..
के साथ मैं थमती हूँ..
अब तो बस 
जी चाहता है  
कोई अपना  
पूछ ले 
सब ठीक तो है ना | 
और मै जोर से
रो दू 
......
हम-क़दम का नया विषय
यहाँ देखिए

🐤🐤
।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह'तृप्ति'..✍










17 टिप्‍पणियां:

  1. खूबसूरत ग़जल ..
    सभी को सुबह का प्रणाम।

    जवाब देंहटाएं
  2. शुभ प्रभात...
    बेहतरीन अंक...
    अपठित उत्तम रचनाएँ..
    आभार..
    सादर..

    जवाब देंहटाएं
  3. सुंदर प्रस्तुति हेतु बहुत-बहुत बधाई

    जवाब देंहटाएं
  4. मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिये आभार।

    जवाब देंहटाएं
  5. शानदार संकलन ......मेरी रचना को स्थान देने के लिए आभार आपका।

    जवाब देंहटाएं
  6. सभी सूत्र बहुत ही खूबसूरत ! मेरी रचना को आज की हलचल में स्थान देने के लिए आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार पम्मी जी !

    जवाब देंहटाएं
  7. सभी रचनाएँ बहुत अच्छी है पम्मी जी..सार्थक भूमिका के साथ सुंदर संकलन है👌

    जवाब देंहटाएं
  8. सुन्दर प्रस्तुति। सभी चयनित रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएँ। भूमिका में डॉक्टर कुँवर बेचैन साहब की ख़ुशबू बिखेरती पंक्तियाँ।

    जवाब देंहटाएं
  9. उम्दा पठनीय लिंक संकलन शानदार प्रस्तुतिकरण...

    जवाब देंहटाएं
  10. अजित गुप्ता जी के अनमोल लेख के साथ बसंत का सुस्वागतम कहती रचनाएँ अपनी मिसाल आप है |भूमिका में कुंवर बेचैन की अनुराग भरी पंक्तियाँ क्या खूब हैं --
    चल जहाँ तक बाँसुरी की धुन चले
    फूल की खुशबू चले, गुनगुन चले
    भीग जा तू प्रीति के हर रंग में
    साथ जब तक प्राण का फागुन चले"
    सचमुच प्राणों का फागुन प्रीत के रंग में आकंठ डूबकर ही आता है |सभी सम्मिलित रचनाकारों को सस्नेह शुभकामनायें और बधाई | आपको छोटे से संयमित , सुंदर अंक संयोजन के लिए सस्नेह बधाई प्रिय पम्मी बहन |

    जवाब देंहटाएं
  11. धन्यवाद आदरनिया मेरी पोस्ट को स्थान देने के लिये ... बेहद सुंदर सँकलन है आपका

    जवाब देंहटाएं

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