इक नयी उम्मीद का, सपना
संजोए आ रहा हूँ,
दर्द का एहसास है, फिर
भी तराने गा रहा हूँ.
ज़िन्दगी में खो दिया जो, क्यूँ
करूं उसका हिसाब,
आज अपने हाथ से, तकदीर
लिखने जा रहा हूँ.
मैं हर लम्हे मे सदियाँ देखता हूँ
तुम्हारे साथ एक लम्हा बहुत है
मेरा दिल बारिशों मे फूल जैसा
ये बच्चा रात मे रोता बहुत है
जर्द पत्तों का शाख से बिछड़ना
तिनके के नशेमनो का उजडना।
ख्वाहिशों का रोज सजना बिखरना
सदियों से चला आ रहा ये सितम।
तलबपरस्त दुनिया में मक्कारी है, गद्दारी है
रिश्तों में कुछ भी ऐसा नहीं, जिसे वफ़ा कहें।
ज़मीं पर हो गई है, ख़ुदाओं की भरमार
ऐ ख़ुदा ! बता तो सही, अब तुझे क्या कहें।
बच्चे
नंगे ही
भले-चंगे लगते है
गरीब के
हम-क़दम का नया विषय
........
आज बस यहीं तक।
फिर मिलेंगे अगले गुरुवार।
शुक्रवारीय प्रस्तुति - आदरणीया श्वेता सिन्हा जी
रवीन्द्र सिंह यादव
शुभ
जवाब देंहटाएंप्रभात
भाई रवीन्द्र जी...
अच्छी वर्ड पिरामिड
से शुरुआत..कभी उल्टा
पिरामिड भी देखना चाहते हैं
सादर
सुप्रभात
जवाब देंहटाएंसुंदर अंक
बेहतरीन रचनाएँ
मेरी रचना को सम्मिलित करने के लिए आभार...सादर
शुभ प्रभात आदरणीय
जवाब देंहटाएंबेहतरीन हमक़दम का संकलन 👌
बहुत खूबसूरत लिंक्स का संयोजन ।
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंशानदार प्रस्तुतिकरण उम्दा पठनीय लिंक संकलन...
जवाब देंहटाएंबेहतरीन रचनाएँ खूबसूरत वर्ण पिरामिड के साथ।
जवाब देंहटाएंधन्यवाद।
सामायिक वर्ण पिरामिड के साथ मोहक प्रस्तुति, सभी सामग्री पठनीय सभी रचनाकारों को बधाई। मेरी रचना को शामिल करने का तहे दिल से शुक्रिया।
जवाब देंहटाएंसभी को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें।
सुंदर संदेश देती भूमिका के साथ बहुत ही उम्दा रचनाओं का संकलन रवींद्र जी...बढ़िया संकलन।
जवाब देंहटाएंसच्च मे सारी रचनाएँ बिल्कुल भिन्न एवं सराहनीय योग्य है। आपका मेहनत सार्थक है। ऐसी रचनाएँ हम तक पहुचाने के लिए सहृदय आभार आपका।
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