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गुरुवार, 25 मई 2017

678.....पाठकों की पसंद .. आज की पाठिका बहन पम्मी सिंह

सादर अभिवादन
पाठको की पसंद का एक नया अंक
एक नई पाठिका...

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गिर के तू उठे वही
जब हार की भी हार हो।
नभ तलक पुकार हो
जब तेरी सिंह दहाड़ हो।
अश्रु बन भीगा दे लब
बहा तू अशांत नीर को

ज़िस्म इंसान का है  कुछ तो   ख़ताएँ होंगी  
ज़िंदगी का है   सफ़र कुछ तो  बलाएँ होंगी

उसके लहज़े में महकती है वतन की खुशबू 
कुछ मिट्टी  का असर, माँ की   दुआएँ होंगी

बता  कौन  तेरी  ख़ुशी  ले  गया
कि  कासा  थमा  कर  ख़ुदी  ले  गया

समझते  रहे  सब  जिसे  बाग़बां
गुलों  के  लबों  से  हंसी  ले  गया

पता नही क्यों भावुक बनकर,
सपनो में, मैं खो जाता हूँ।
स्वप्न लोक में, स्वप्न सखा संग,
बीज प्यार के बो जाता हूँ।
यूँ तो कुछ नहीं बताने को..चंद खामोशियाँ बचा रखे हैं
जिनमें असीर है कई बातें जो नक़्श से उभरते हैं

खामोशियों की क्या ? कोई कहानी नहीं...
ये सुब्ह से शाम तलक आज़माए जाते हैं
कुछ टूटे सितारों की आस में
हर रात छत से गुज़र जाती हूँ
आधे -अधूरे बेतरतीब इखरे-बिखरे
पलों,संयोग को समेटते हुए न जाने
कई संयोग वियोग में बदल ..
रह जाती है बस वही इक ...कसक


:: पाठक परिचय ::
पम्मी सिंह के ही शब्दों में....
मैं इन्हीं हर्फों और सप्हों में रची बसी हूँ,क्योंकि
हमारे होने और बनने में कई लोगों के साथ-साथ 
भावों और अहसासों का सहयोग होता हैं। जी, 
धन्यवाद।
pammisingh70ps@gmail.com

अगली बार फिर उपस्थित होंगे हम
एक नए पाठक के साथ
सादर..






9 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात.....
    शाबाश...
    अच्छी रचनाएँ
    आभार
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. आदरणीय ,'पम्मी सिंह'जी बहुत ही उम्दा चुनाव व संकलन हार्दिक शुभकामनायें हृदय से आभार। "एकलव्य"

    उत्तर देंहटाएं
  3. आदरणीय ,यशोदा दीदी मेरी पसंद की रचनाओं को सम्मान एवम् नव अवसर प्रदान करने के लिए हृदय से आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  4. शुभ प्रभात दी
    बहुत अच्छा संकलन

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर हलचल प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  6. खूबसूरत संकलन! मेरी रचना को स्थान देने के लिए हार्दिक आभार ।

    उत्तर देंहटाएं
  7. पाठिका पम्मी दीदी को विश्वमोहन भैया का सादर धन्यवाद एवम सुरुचिपूर्ण संकलन के लिए बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुन्दर सूत्र। सुन्दर प्रस्तुति ।

    उत्तर देंहटाएं

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