पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

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सोमवार, 22 मई 2017

675...‘पिता जी को तो बस परिवार के हालात दिखाई देते थे...


जय मां हाटेशवरी...

आज 22 दिन हो गये....
पिता जी के बिना इस संसार में....
"न रात दिखाई देती थी,
न दिन दिखाई देते थे,
‘पिता जी  को तो बस परिवार के
हालात दिखाई देते थे..."



खाली पन्ने और मीनोपोज
सफेद पन्ने
खाली छोड़ना
भी मीनोपोज
की निशानी होता है
तेरा इसे समझना
सबसे ज्यादा
जरूरी है
बहुत जरूरी है ।

कहानी- ...लेकिन भाभी का क्या? -
शिल्पा को लगा कि उसकी नणंद अपनी माँ को समझाएगी कि ''माँ, आप ऐसा क्यों सोचती है? हरदम तो बनाती है ना भाभी आप दोनों की पसंद का खाना! अभी आपकी तबियत, आने-जाने वाले और भाभी का खुद का पैर...इसलिए शायद बना नहीं पाई होगी।'' लेकिन नणंद ने सास की हां में हां मिलाया। सास को समझाने के बजाय आग में घी डालने का काम किया।
शिल्पा अवाक रह गई! आज उसकी शादी को बीस साल हो रहे है। उसने हमेशा माँ-बाबूजी की पसंद-नापसंद का पूरा-पूरा ख्याल रखा है। सिर्फ़ माँ-बाबूजी ही क्यों उसने तो हमेशा ही कोशिश की है कि परिवार के हर सदस्य का जहां तक संभव हो सके पूरा ख्याल रखे। यहां तक कि इस चक्कर में कभी-कभी उसके अपने बच्चों के तरफ़ अनदेखी हो जाती।

आतंकवादी
धर्म जो भी मिला उन्हें एक क़िताब की तरह मिला-
क़िताब एक कमरे की तरह,
जिसमें टहलते रहे वे आस्था और ऊब के बीच
कमरा-- खिड़कियाँ जिसमें थीं ही नहीं
कि कोई रोशनी आ सके या हवा
कहीं बाहर से
बस, एक दरवाज़ा था,
वह भी जो कुछ हथियारख़ानों की तरफ़ खुलता था

 हृदय विदारक मौत
चीजों से सामान तक
सामान से कबाड़ तक का जीवन
फिर
मौत से पहले ही शव परीक्षण
और
हृदय विदारक मौत
एक रिश्ते की
जिसकी आत्मा
मुक्ति की चाह में
अब भी भटक रही है कहीं,... प्रीति सुराना

‘महाबली’ प्रधानमंत्री के तीन साल -
केंद्र की एनडीए सरकार के काम-काज को कम के कम तीन नजरियों से देख सकते हैं। प्रशासनिक नज़रिए से,  जनता की निगाहों से और नेता के रूप में नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत पहचान के लिहाज से। प्रशासनिक मामलों में यह सरकार यूपीए-1 और 2 के मुकाबले ज्यादा चुस्त और दुरुस्त है। वजह इस सरकार की कार्यकुशलता के मुकाबले पिछले निजाम की लाचारी ज्यादा है। मनमोहन सिंह की बेचारगी की वजह से उनके आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि देश पॉलिसी पैरेलिसिस से गुजर रहा है। अब आर्थिक सुधार 2014 के बाद ही हो पाएंगे।

भाग्यशाली
शायद इसीलिये उनके मन में
अजस्त्र प्रेम की एक निर्मल धारा
सदैव प्रवाहित होती रहती है !
आज इसी बात का अफ़सोस है कि
हम देख सुन क्यों पाते हैं !
जो देख सुन न पाते तो
शायद हम भी उतने ही सुखी होते !
धन्यवाद।







8 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात.....
    अच्छी रचनाएँ
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. दुःख की इस घड़ी में आपको व आपके समस्त परिवार को मेरी हार्दिक संवेदना अर्पित है कुलदीप जी ! आपके श्रद्धेय पिताजी के लिए सादर नमन ! ईश्वर अवश्य ही उनको अपने चरणों में स्थान देंगे ! आप धैर्य रखें ! आज की हलचल में मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  3. बेहतरीन संकलन ! सार्थक प्रयास आदरणीय, हृदय से स्वागत है ,आभार। "एकलव्य"

    उत्तर देंहटाएं
  4. कुलदिप जी, ईश्वर आप को एवं आपके पूरे परिवार को यह दु:ख सहने की ताकत दे।
    मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  5. पिता की जगह कोई नहीं ले सकता है कुलदीप जी धैर्य रखिये । आज की प्रस्तुति में 'उलूक' के सूत्र को भी जगह देने के लिये आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  6. मर्मस्पर्शी हलचल प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं

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