पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद एक और निवेदन आप सभी से आदरपूर्वक अनुरोध है कि 'पांच लिंकों का आनंद' के अगले विशेषांक हेतु अपनी अथवा अपने पसंद के किसी भी रचनाकार की रचनाओं का लिंक हमें आगामी रविवार तक प्रेषित करें। आप हमें ई -मेल इस पते पर करें dhruvsinghvns@gmail.com तो आइये एक कारवां बनायें। एक मंच,सशक्त मंच ! सादर

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सोमवार, 8 मई 2017

661...मेरे सफेद बाल हो गये हैं अब खुद मेरे लिये आज एक बवाल

सादर अभिवादन...
कल का अंक देखा..
पसंद आया...सोचता हूँ नतीजा
अच्छा ही मिलेगा..गर ये सफल हो गया..
और यह सफल तभी होगा 
जब हमारे पाठक इसमें सहभागी बनेंगे..

भाई कुलदीप 15 मई तक अवकाश पर हैं
पिताश्री को भूल तो नहीं सकते 
और भूलने का प्रयास भी व्यर्थ है..
मन को हलका करने के लिए लिखना - पढ़ना ज़रूरी है...


देखे आज की पसंदीदा रचनाएँ....

आज पहली बार..
मंज़िल तो वही है  वहीं है  
पहुँचने की राह बदलनी बाकी है  
देखना है यहाँ सांसें कितनी बचीं  
कुछ और दूर चलना बाकी है । 

जो कुछ टूटा फूटा बिखरा हुआ सा था 
वो सभी तो मेरा अपना था, किसे 
स्वीकार करें और किसे त्याग 
करें, कहाँ मिलता है इस 
दुनिया में मन वांछित 
सुख। हमने भी 
रफ़ू करके 
जीना 
सीख लिया

मुझसे ये मुखौटा न पहना गया 
असली नकली चेहरे न पहचाना गया 
दुःख के दिन जब भी मेरे सामने आये 
तनहा छोड़ के चले गए उनसे रुका न गया 

प्रेम करना
ईमानदार हो जाना है
यथार्थ से स्वप्न तक ..समष्टि तक
फैल जाना है
त्रिकाल तक
विलीन कर लेना है

ठूँठ  होना
आसान नहीं होता

सतत् दोहन से
गुजरना होता है पेड़ को
ठूँठ होने के लिए


सत्ता..........रवीन्द्र  सिंह यादव
जनतंत्र में 
कोई राजा नहीं
कोई  मसीहा नहीं
कोई महाराजा नहीं
बताने आ रहा हूँ मैं,
सुख -चैन से सो रही सत्ता
जगाने आ रहा हूँ मैं। 


मौन संवाद....कमला सिंह 'ज़ीनत'
उम्मीद का घोडा़
जब घायल होता है
सवार के मन में
खोट उतर आता है
घोडा़ लाख घायल हो
दौड़ जारी रखना ही चाहिये उसे


बिकाऊ....ओंकार केडिया
कभी कोई ख़रीददार आएगा,
उसकी ऐसी क़ीमत लगाएगा,
जैसी उसने सोची न होगी,
जो डाल देगी उसे दुविधा में,
तोड़ देगी उसका संकल्प.



समझे कि नहीं...डॉ. सुशील जोशी
उसको इतना उतावला देख
कर मैं धीरे से मुस्कुराया
उसकी तरफ जाकर
उसके कान में फुसफुसाया

पचास साल लगे हैं 
इन बालों को 
सफेद करवाने में

तुझे क्या मजा 
आ रहा है
इनको एक हफ्ते में 
काले करवाने में
मेरी की गई मेहनत
पर पानी फिरवाने में

दें इज़ाज़त दिग्विजय को
सादर












8 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात
    वाह..बेहतरीन
    आभार
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. Super Poems

    Please Vsit My Blog...

    http://rahulhindiblog.blogspot.in/?m=1

    Thank you

    उत्तर देंहटाएं
  3. ढ़ेरों आशीष के संग आभार

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर प्र्स्तुति। आभार दिग्विजय जी 'उलूक' के सफेद बालों पर नजरे इनायत के लिये ।

    उत्तर देंहटाएं
  6. रचनाकारों एवं पाठकों को सृजन के विविध रंग -रूपों का रसास्वादन कराती यह प्रस्तुति पठनीय और प्रसंशनीय है। बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  7. बढ़िया लिंक्स. मेरी रचना शामिल करने के लिए शुक्रिया

    उत्तर देंहटाएं

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