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शनिवार, 8 दिसंबर 2018

1240... फौजी


गालों पे नमी
सलामी ले मुस्काई-
सैन्य सम्मान।

सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष
जो बात हम में थी
वो बात ना तुम में है
और
और ना मुझ में है
अबूझ कौन था
समय , परिस्थिति ,मनोभाव

कविता : एक फौजी!!


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><
फिर मिलेंगे...
हम-क़दम
सैंतालिस अंक तो निकल लिए
बारी अड़तालिसवें की है..
विषय है इस बार का
**शहनाई**
कैसी विडंबना है 
मानव जीवन का कि 
कर्म नहीं नियति 
यह तय करती है कि 
किसके नसीब में 
शहनाई है या तन्हाई ,  
खुशी है या गम , 
स्नेह है अथवा पीड़ा .. । 
हाँ, शहनाई की आवाज  
सबको भाती है , 

व्याकुल पथिक (शशि गुप्ता) की प्रस्तुति से ये अंश लाई गई है
उनकी प्रस्तुति में यह गद्य रूप में है

रचना प्रेषण तिथिः 08 दिसम्बर 2018
यानी आज
प्रकाशन तिथि ः 10 दिसम्बर 2018
ब्लॉग सम्पर्क प्रारूप में ही प्रविष्ट प्रेषित करें


11 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर अंक ।
    सभी को प्रणाम

    जवाब देंहटाएं
  2. आदरणीय दीदी,
    सादर नमन
    सदा की तरह बेहतरीन प्रस्तुति
    सादर...

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर कुछ अलग सी प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति,देश की आन और शान के रक्षक फौजियों को हृदय से नमन

    जवाब देंहटाएं
  5. शुभ प्रभात आदरणीय
    बहुत ही सुन्दर हलचल प्रस्तुति 👌,
    देश की आन और शान के रक्षक जवानों को हृदय से नमन |
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  6. हमेशा की भाँति सबसे अलग प्रस्तुति और दी रचनाएँ तो क्या कहें एक जोश भर गया मन में...बहुत ही उम्दा अंक...सराहनीय रचनाएँ हैं दी👌

    जवाब देंहटाएं
  7. Very Nice.....
    बहुत प्रशंसनीय प्रस्तुति.....

    जवाब देंहटाएं
  8. फिर एक अलहदा बेहतरीन प्रस्तुति, नमन।
    सभी रचनाकारों को बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  9. धन्यवाद मेरी रचना शामिल करने के लिए |

    जवाब देंहटाएं

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