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बुधवार, 1 अगस्त 2018

1111...हाथों में गुब्बारे थामे शादमां हो जाएँगे..


।।शुभ सुबह।।

"मैं मजदूर हूँ जिस दिन न लिखूं उस दिन मुझे रोटी खाने का अधिकार नहीं"

उपर्युक्त प्रेमचंद जी की पंक्तियाँ जिंदगी को दिखाती है, बनाती है, समझाती है।
सर्वप्रथम (31जुलाई) हिंदी साहित्य के कालजयी , अमर पुरोधा, महाप्राण, कथाकार, 
सम्पादक, संवेदनशील लेखक, समीक्षक मुंशी प्रेमचंद जी को 
हलचल परिवार जन्मदिवस पर कोटि -कोटि प्रणाम करता है।
साथ ही एक साहित्यिक संस्था में प्रस्तुत कहानी "पूस की रात"ऑडियो में सुने।



आज की सुबह सजी खूबसूरत शब्दों से...तो फिर गौर फरमाएं ..✍
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ब्लॉग वाग्वैभव से..गज़ल
खिलखिलाएँगे ये बच्चे तितलियाँ हो जाएँगे
जब तलक जिन्दा जड़ें हैं फुनगियाँ आबाद हैं
वरना रिश्ते रफ्ता-रफ्ता नातवां हो जाएँगे 
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ब्लॉग अजित गुप्‍ता का कोना से..

लोग अंहकार की चादर ओढ़कर खुशियाँ ढूंढ रहे हैं, हमने भी कभी यही किया था लेकिन जैसे ही चादर को उठाकर फेंका, खुशियाँ झोली में आकर गिर पड़ीं। जैसे ही चादर भूले-भटके हमारे शरीर पर आ जाती है, खुशियाँ न जाने कहाँ चले जाती हैं! अहंकार भी किसका! बड़प्पन का। हम बड़े हैं तो हमें सम्मान मिलना ही चाहिये! ..
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ब्लॉग सुधिनामा से..
तृषित तन मन 
दूर सजन 

मुग्ध वसुधा 
उल्लसित गगन 
सौंधी पवन
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ब्लॉग वीरबहुटी से ..क्षणिकाएं
यादों संग उड़ता जाये 
ख्वाब नहीं तीखी पीड़ा है 
क्या क्या आज कुरेदा जाये ! 
                  
व्यथा कलम जब चले कागज पर 
सिर्फ अश्क ही लिख पाये 
गड मड हो जाये भाव कलम के 
मन चातक सा चिचियाये  ! 
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ब्लॉग ठहराव पर ठहर कर गज़ल का आनंद ले
कुछ नए ज़ख्मों से राब्ता हो जाएगा
उसको भी तासीरे-उल्फ़त देगी बदल
बेवफ़ा हो तो बावफ़ा हो जाएगा
सीख ली उसने मौसम की अदा
हँसते-हँसते ही वो खफ़ा हो जाएगा
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चलते - चलते श्रद्धांजलि 
सुर सम्राट मोहम्मद रफी
 (जन्म 24 दिसम्बर 1924  मृत्यु 31 जुलाई 1980) 
को हमारे रचनाकारों की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि
"इस रंग बदलती दुनिया में इंसान की नीयत..."

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हम-क़दम के तीसवें क़दम
का विषय...
...........यहाँ देखिए...........



।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह..✍


18 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात सखी
    बेहतरीन प्रस्तुति
    आज ट्रेजडी क्वीन मीना कुमारी
    का 85 वां जन्म दिन है
    मीना जी को उनके मां-बाप ने छोड़ दिया था अनाथ आश्रम के बाहर,
    इस वजह से कहलाईं 'ट्रेजेडी क्वीन'
    आदरांजली
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत सुंदर रचना नमन सदी के माहान कलम के सिपाही को

    जवाब देंहटाएं
  3. कलम के सिपाही से आवाज के जादूगर तक! बहुत सुन्दर संकलन।

    जवाब देंहटाएं
  4. बढ़िया हलचल। बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  5. बेहतरीन संकलन
    उम्दा रचनाएँ
    मेरी रचना के चयन के लिए हार्दिक आभार

    जवाब देंहटाएं
  6. बेहतरीन प्रस्तुति ।
    सभी रचनाकारों को बधाई

    जवाब देंहटाएं
  7. वाह!!खूबसूरत प्रस्तुति । सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई ।

    जवाब देंहटाएं
  8. सुप्रभात पम्मी जी,
    बेजोड़ भूमिका कालजयी क़लम के सिपाही से लेकर रफी साहब को दी गयी सुराज्जलि बेहद सुंदर। बहुत ही अच्छी रचनाएँ है सारी।
    सादर।

    जवाब देंहटाएं
  9. बेहतरीन प्रस्तुति ।नमन कलम के सिपाही को,सभी रचनाकारों को बधाई...

    जवाब देंहटाएं
  10. सुंदर प्रस्तुति सभी रचनाकारों को बहुत बहुत बधाई

    जवाब देंहटाएं

  11. "मैं मजदूर हूँ जिस दिन न लिखूं उस दिन मुझे रोटी खाने का अधिकार नहीं"

    खुबसूरत अंक , प्रेरणादायक काफी कुछ

    जवाब देंहटाएं
  12. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  13. बेहतरीन ब्लॉग हलचल ...मेरी रचना शमिल की आभार ...😁

    जवाब देंहटाएं
  14. बहुत सुन्दर संकलन आज का ! मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार पम्मी जी !

    जवाब देंहटाएं
  15. बेहतरीन लिंक्स एवम प्रस्तुतिकरण ....

    जवाब देंहटाएं
  16. कोटि कोटि शोषित लोगों की पीड़ा को लिखने वाले कलम से योद्धा और साहित्य के पुरोधा आदरणीय मुंशी प्रेमचंद को शत शत नमन !!!!!!!!!!! बेहतरीन प्रस्तुती के साथ मुहम्मद रफ़ी का गाया सुंदर गीत मुझे भी पसंद है -- सस्नेह आभार पम्मी जी | जीवन की व्यस्तता में ऐसे मधुर गीत विस्मृत से हो गये थे | सभी रचनाओं के रचनाकारों को सस्नेह बधाई और आपको सराहनीय अंक के लिए हार्दिक शुभकामनायें | सस्नेह --

    जवाब देंहटाएं

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