।।शुभ सुबह।।
"मैं मजदूर हूँ जिस दिन न लिखूं उस दिन मुझे रोटी खाने का अधिकार नहीं"
उपर्युक्त प्रेमचंद जी की पंक्तियाँ जिंदगी को दिखाती है, बनाती है, समझाती है।
सर्वप्रथम (31जुलाई) हिंदी साहित्य के कालजयी , अमर पुरोधा, महाप्राण, कथाकार,
सम्पादक, संवेदनशील लेखक, समीक्षक मुंशी प्रेमचंद जी को
हलचल परिवार जन्मदिवस पर कोटि -कोटि प्रणाम करता है।
सम्पादक, संवेदनशील लेखक, समीक्षक मुंशी प्रेमचंद जी को
हलचल परिवार जन्मदिवस पर कोटि -कोटि प्रणाम करता है।
साथ ही एक साहित्यिक संस्था में प्रस्तुत कहानी "पूस की रात"ऑडियो में सुने।
आज की सुबह सजी खूबसूरत शब्दों से...तो फिर गौर फरमाएं ..✍
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ब्लॉग वाग्वैभव से..गज़ल
खिलखिलाएँगे ये बच्चे तितलियाँ हो जाएँगे
जब तलक जिन्दा जड़ें हैं फुनगियाँ आबाद हैं
वरना रिश्ते रफ्ता-रफ्ता नातवां हो जाएँगे
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ब्लॉग अजित गुप्ता का कोना से..
लोग अंहकार की चादर ओढ़कर खुशियाँ ढूंढ रहे हैं, हमने भी कभी यही किया था लेकिन जैसे ही चादर को उठाकर फेंका, खुशियाँ झोली में आकर गिर पड़ीं। जैसे ही चादर भूले-भटके हमारे शरीर पर आ जाती है, खुशियाँ न जाने कहाँ चले जाती हैं! अहंकार भी किसका! बड़प्पन का। हम बड़े हैं तो हमें सम्मान मिलना ही चाहिये! ..
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ब्लॉग सुधिनामा से..


तृषित तन मन
दूर सजन
मुग्ध वसुधा
उल्लसित गगन
सौंधी पवन
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ब्लॉग वीरबहुटी से ..क्षणिकाएं


यादों संग उड़ता जाये
ख्वाब नहीं तीखी पीड़ा है
क्या क्या आज कुरेदा जाये !
व्यथा कलम जब चले कागज पर
सिर्फ अश्क ही लिख पाये
गड मड हो जाये भाव कलम के
मन चातक सा चिचियाये !
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ब्लॉग ठहराव पर ठहर कर गज़ल का आनंद ले


कुछ नए ज़ख्मों से राब्ता हो जाएगा
उसको भी तासीरे-उल्फ़त देगी बदल
बेवफ़ा हो तो बावफ़ा हो जाएगा
सीख ली उसने मौसम की अदा
हँसते-हँसते ही वो खफ़ा हो जाएगा
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चलते - चलते श्रद्धांजलि
सुर सम्राट मोहम्मद रफी
(जन्म 24 दिसम्बर 1924 मृत्यु 31 जुलाई 1980)
को हमारे रचनाकारों की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि
"इस रंग बदलती दुनिया में इंसान की नीयत..."
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हम-क़दम के तीसवें क़दम
का विषय...
...........यहाँ देखिए...........
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हम-क़दम के तीसवें क़दम
का विषय...
...........यहाँ देखिए...........
।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह..✍
