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शुक्रवार, 10 जुलाई 2026

4799 ..तुम्हारी पलकों पर अब वे ख़्वाब रखेंगे

 सादर अभिवादन  


ये तुम्हारा भरम है कि वे गुलाब रखेंगे
मंज़िल से ठीक पहले वे सैलाब रखेंगे


हक़ीक़त कहीं तुमसे रूबरू न हो जाए
तुम्हारी पलकों पर अब वे ख़्वाब रखेंगे
--वर्मा जी

मेरी पसंदीदा रचनाएं




मोरी अरज तोसे
चुन चुना खाइयोमाच
अरजिया रे खाइयाँ ना तू नैना मोरे
खाइयाँ ना तू नैना मोहे

पिया के मिलन की
आस खाइयो ना तू नैना
मोहे पिया के मिलन की आस





बुज़ुर्ग सीढ़ी क्या कहे अपनी दास्तान 
रोती है ज़ार-ज़ार हो जब सूना मकान
बेफ़िक्र उत्सुक हो चढ़ जाते हैं सीढ़ी 
भूतल को सँभलकर उतरते हैं सीढ़ी 





चींटियाँ एक-दूसरे को डुबो नहीं रही थीं। उन्होंने अपने शरीरों से एक जीवित द्वीप बना लिया था  एक छोटा सा, चलता-फिरता बेड़ा। कुछ नीचे रहकर दूसरों का सहारा बनी हुई थीं, और
फिर वे बारी-बारी से अपनी जगह बदल रही थीं ताकि हर किसी को आराम मिल सके।





मेरा प्रेमी अपने बगीचे से 
मुझे काजू और बादाम भेजता है
और मैं उन्हें गौर से देखती हूँ, 
यह सोचकर कि धरती की कोख से 
फसल उगाने का एहसास कैसा होता होगा
मिट्टी में सने मेरे हाथ 
रस्सी बनकर 'अच्छाई' को खींचते हैं 
और माफ़ी माँगते हैं धरती से ।





हाथ पकड़ नित संबल देते
उड़ने को तब अम्बर देते 
जब भी थी जीवन की झंझा
का सखि साजन, ना सखि मंझा।।

**
बाहुपाश में जकड़े जाते,
स्वप्न लोक की सैर कराते।
बिन उसके सूनी है रतिया,
का सखि साजन ,ना सखि तकिया।।

सादर समर्पित
सादर वंदन

4 टिप्‍पणियां:

  1. सुप्रभात!! एक से बढ़कर एक रचनाओं की खबर देते लिंक्स

    जवाब देंहटाएं
  2. शुक्रिया मुझे भूमिका में शामिल करने के लिए
    सुन्दर लिंक्स
    साधुवाद

    जवाब देंहटाएं

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