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बुधवार, 8 जुलाई 2026

4797.. सांप-सीढ़ी सी ज़िंदगी...

 ।।प्रातःवंदन।।

अलि रचो छंद !

आज कण-कण कनक कुंदन,

आज तृण-तृण #हरित चंदन,

आज क्षण-क्षण चरण वंदन

विनय अनुनय लालसा है।

आज वासन्ती उषा है।

अलि रचो छंद !

 सोहनलाल द्विवेदी 

बुधवारिय प्रस्तुतिकरण के क्रम को आगे बढाते हुए..

उसने अपनी याद जरा सी 

जब नयनों में नींद नहीं थी 

उसका ही तो ख़्वाब बसा था, 

सुमधुर स्मृतियों के पत्तों से 

मन का आँगन पूर्ण भरा था !

✨️

मौसम मौसम... लवली मौसम..."

अस्सी के दौर की लोकप्रिय फिल्म थोड़ी सी बेवफाई फिल्म का प्रसिद्ध गीत "मौसम मौसम... लवली मौसम..." लिखते समय गुलज़ार साहब निश्चित ही शिमला या ऐसे ही किसी पहाड़ी इलाके से गुजरे होंगे क्योंकि मौसम को महसूस किए बिना उसे शब्दों में उतारना तभी संभव है जब आपने उसका पूरा लुत्फ़ उठाया हो । बहरहाल, यह गीत इन दिनों शिमला की फिज़ाओं पर बिल्कुल सटीक बैठता है..

✨️

एक जुलाई

आ गई है

एक जुलाई की

बादल भरी

उमस से भरपूर सुबह।

छोटे बच्चे

अपनी मस्तियों को

लगा चुके हैं तह ..

✨️

लूडो के सांप-सीढ़ी सी ज़िंदगी...

कभी-कभी ज़िंदगी सांप-सीढ़ी के खेल जैसी होती है।

एकबारगी दो-तीन चाल में

हम सांपों से बचकर,

छोटी-बड़ी सीढ़ियां चढ़कर

लाल होने तक पहुंच जाते

और रख चुके हैं

बीते जून ..

✨️

।।इति शम।।

धन्यवाद 

पम्मी सिंह ' तृप्‍ति '..✍️

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