सादर अभिवादन
पी.ओ.के. की चर्चा है जोरो पर
कुछ चित्र दिखा रहा हूँ
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और भी है , ब्लॉग में जाकर देखिए
मेरी पसंदीदा रचनाए
एक जुनून सा छाया रहा दौर-ए-जवानी
तेज धार में दरिया के मयार का पता ही नहीं चला
तसव्वुर में तेरा चेहरा रख यू लिया
कंकड़ पत्थर और खार का पता ही नहीं चला
अनेकों बार Autism, Dyslexia, Progeria, Paraplegia, Alzheimer, Amnesia, Schizophrenia जैसी अनेक बीमारियों पर, जिनका नाम भी आम लोगों ने सुना नहीं होता, फिल्में बनी हैं ! इन चलचित्रों ने इन बिमारियों के प्रति लोगों को जागरूक भी किया है ! यदि ऐसी फिल्मों की और देखा जाए तो एक बेहद दिलचस्प जानकारी सामने आती है कि इस तरह की फिल्मों में सबसे ज्यादा बार मुख्य किरदार अमिताभ बच्चन ने निभाया ही नहीं बल्कि बहुत शिद्दत से उस पात्र को जिया भी है...............!
ज़िन्दगी और मौत के दरमियाँ
बहोत कुछ बह जाता है
आख़िर में सुनसान
रास्ते के सिवा
कुछ भी
नहीं
होता, सूख जाते हैं सभी सजल
है अधूरे और पुराने
गीत हृदय में लिखे है
पंखुड़ी से प्रीत करते
भ्रमर भी गुंजित दिखे है
वहां का कश्मीर ,भारत के कश्मीर से ज्यादा खूबसूरत है ,
वहां हिंगलाज मंदिर है। वो हिन्दुओ के 51 शक्तिपीठों में से एक है ।
जहाँ सती माता का सर काट के गिरा था।
वहीं पर वेदों की रचना हुई थी।
जिसे सप्तसैंधव प्रदेश कहते है। वहां सात नदियां थी।
सादर समर्पित
सादर वंदन








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