सादर अभिवादन
अगस्त माह से एक अभिनव कार्यक्रम
लघुकथा लिखिए ....
कम शब्दों में .. बड़ी बात कह डालने का अवसर ..
एक अलक (अति लघु कथा ) लिख डालिए झटपट--
शब्द विशेष है "कल्पना"
तो आइए अपनी कल्पना को साकार कीजिए
हमें प्रेषित करें, माध्यम है ब्लॉग संपर्क फार्म
आपके द्वारा लिखी रचनाएं प्रकाशित की जाएगी
साथ ही आदरणीय विभा दीदी के द्वारा त्रैमासिक प्रकाशित होने वाली
एक दिन वह नदी किनारे अपने घर के बाहर खड़ा था, उसने देखा कि नल से पानी की बूंद टपक कर जमीन पर गिरी और बर्फ बन गई ! उधर नदी का पानी बेकार बह कर बर्बाद हुआ जा रहा था ! उसके दिमाग में एक विचार आया कि यदि इस पानी को किसी तरह जमा दिया जाए तो लद्दाख में पानी की किल्लत दूर हो सकती है !
उसने अपनी योजना का खाका तैयार किया और गांव वालों को साथ ले, उसे मूर्त रूप देने में जुट गया ! सबने मिल कर वहीं के मिटटी-पत्थरों का उपयोग कर, छोटी-छोटी नहरें बना, नदी के पानी का रास्ता बदल उसे पास की छायादार घाटी में बांध बना संग्रहित कर दिया ! कड़ाके की सर्दी में वह पानी जम कर, बर्फ के विशाल ढेर में बदल वहां स्थित हो गया ! इस तरह इंसान ने प्रकृति से होड़ ले, पहाड़ की छोटी से काफी नीचे अपना एक कृत्रिमिक ग्लेशियर बनाने में सफलता पा ली !
रात के इस दूसरे पहर में
दिखा एक चौपाया
जो देखते ही देखते
खड़ा हो गया तो पांवों पर
दौड़ गई सिहरन मेरुदंड पर
टूट गई नींद
तो पाया कि
सपने के बाहर भी
एक बियाबान जंगल है
चार दीवारों के बंद कमरे में
जिसमें कौंधते हैं
परिचित-अपरिचित चेहरों के
गड्ड-मड्ड होते डरावने चेहरे
पहले होर्डिंग का जन्म
पहले होर्डिंग का जन्म
यकीनन
पहले झूठ के साथ हुआ होगा।
और सतरंगी पहला झूठ
शायद
भाषा के आविष्कार के साथ
जन्मा होगा।
नहीं समझोगे ,,,
जिसने गले लगाया, वो हम थे,
लिबास बदलने से बदल नहीं जाता
फ़क़त कोई किरदार 'परचेत',
तुम जानते हो, तमाशा खडा करने मे
वरना हम क्या किसी से कम थे?
सादर समर्पित
सादर वंदन

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