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रविवार, 12 अगस्त 2018

1122.....मेघों से घिर गया अम्बर सारा

पहाड़ा याद है न
11 एकम 11
11 दूनी 22
बस इसी तरह हमारी उम्र बढ़ती जा रही है
और....कमर का झुकाव बढ़ता जा रहा है
नज़र कमजोर?..कोई बात नहीं
चश्मा तो है न...पर कमर..इसका क्या करें
चलिए देखते हैं इसका भी इलाज होगा किसा के पास..
-*-*-*-

"  मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया
  हर फ़िक्र को धुएं में उड़ाता चला गया
  बरबादियों का सोग़ मनाना फ़िज़ूल था
  बरबादियों का जश्न मनाता चला गया
  जो मिल गया उसी को मुक़द्दर समझ लिया

-*-*-*-

बात करने से बात बन जाती है
राह कोई न कोई निकल आती है
दूरी रिश्तों में बढ़ जाए ऐसा न हो
हाथ से सब निकल जाए ऐसा न हो
खोल दो सब गिरह जो दरम्यान है

-*-*-*-

तुम अँग्रेजी बुल-डॉग 
और हम 
पन्नी-खाती गायें 
चरण चाट कर, पूँछ हिलाकर 
तुम- 
महलों में सोते 
हम दर-दर अपनी लाशें 
अपने कंधों पर ढोते 
जनता का गीत......जय चक्रवर्ती

-*-*-*-


Photo
लौट के आऊँ न आऊँ पर मुझे विश्वास है
जोश, मस्ती और जवानी, है अभी तक गाँव में

दूर रह के गाँव से इतने दिनों तक क्या किया   
ये कहानी भी सुनानी, है अभी तक गाँव में 
ये कहानी भी सुनानी है....दिगम्बर नासवा

-*-*-*-


मन्त्रमुग्ध सब झूल रहे थे 
वसुन्धरा से अम्बर की ओर पींगे भर रहे थे “
तभी .......
“अम्बर ने “वसुन्धरा”को जब निहारा 
मेघों से घिर गया अम्बर सारा “
मेघों ने सुन्दर - सुन्दर आकृतियाँ बनायीं 
सावन के झूले.....ऋतु आसूजा


-*-*-*-
चलते-चलते ये गीत सुनिए
और आदेश दीजिए
यशोदा को



15 टिप्‍पणियां:

  1. बेहतरीन संकलन एवं प्रस्तुति यशोदा दी । मेरी रचना को सम्मिलित करने के लिए आपका सादर आभार 🙏 सभी चयनित रचनाकारों को बधाई

    जवाब देंहटाएं
  2. सुंदर हलचल
    व्याकुल पथिक जी के आलेख से प्रभावित हुआ।

    जवाब देंहटाएं
  3. 🌹बहुत ही उम्दा संकलन👏👏👏👏👏🌹

    जवाब देंहटाएं
  4. हमेशा की यह ब्लॉग आज भी सुंदर रचनाओं से सजा हुआ है। मेरे विचारों का स्थान देने के लिये आपका सादर आभार यशोदा जी। साथ ही रोहिताश जी को भी ,जिन्हें मेरे विचार अच्छे लगे हैं।

    जवाब देंहटाएं
  5. वआआह...
    बेहतरीन प्रस्तुति
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  6. सुन्दर संकलन ... और जबरदस्त गाना ... अपने समय का मशहूर गीत ...
    आभार मेरी ग़ज़ल को स्थान देने के लिए आज की सुहानी हलचल में ...

    जवाब देंहटाएं
  7. सुन्दर संकलन ... और जबरदस्त गाना ... अपने समय का मशहूर गीत ...
    आभार मेरी ग़ज़ल को स्थान देने के लिए आज की सुहानी हलचल में ...

    जवाब देंहटाएं
  8. सुंदर प्रस्तुति सभी रचनाकारों को बहुत बहुत बधाई

    जवाब देंहटाएं
  9. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं

  10. बेहतरीन संकलन यशोदा दी । सभी चयनित रचनाकारों को बधाई।
    आभार।

    जवाब देंहटाएं
  11. बहुत सुंदर संकलन बहतीं रचनाएँ व रचनाकार

    जवाब देंहटाएं
  12. बहुत उम्दा रचनाओं से सजी सुंदर प्रस्तुति सभी रचनाकारों को बधाई ।

    जवाब देंहटाएं
  13. शानदार प्रस्तुति। खूबसूरत रचनाएं।
    सभी रचनाकारों को बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  14. बहुत अच्छी प्रस्तुलि। सभी खूबसूरत रचनाएँ और सुंदर सा मनभावन गीत। सावन के झूले पड़े.... यहाँ शहर में कहाँ झूले पड़ें यशोदा दी, लोकल ट्रेन के झूले पड़ते हैं कामकाजी महिलाओं को। बचपन के झूलों की याद जरूर आती है।

    जवाब देंहटाएं

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