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रविवार, 3 मार्च 2024

4054 दोबारा नही ठग पायेगा .

सादर अभिवादन

मार्च
इस माह
जन-जनार्दन को
फुरसत नहीं मिलती
बच्चों की परीक्षाएं
ईद और होली के साथ
चुनावी हलचल ...
आज की रचनाएँ



बढ़ाने महिला दिवस का गौरव
इसी माह को जाता है श्रेय
रमज़ान के आगाज़ का  
फिर आएगा झूमता गाता
रंगीन पर्व मदमाती होली का
कहते हैं मंगल से जुड़ा है
गुलाबी रंगत लिए यह महीना





क्योंकि
प्रेम
रेखा गणित की
रेखाओं में
नहीं उलझना चाहता
वह तो
दो रेखाओं का
घेरा बनाकर
इसके भीतर
बैठना चाहता है




कदरदान तो आयेंगे ही बाकी को फुर्सत न मिलेगी।
जहॉं जमेंगे पीने वाले साकी को फुर्सत न मिलेगी।




इन दोनो पथिकों में अंतर बहुत बड़ा है
एक चाहता मुक्ति एक बन्धन में पड़ा है।
त्यज जग पहले राही ने मोक्ष मार्ग अपनाया
अपना मोह माया दूजेने जग में रुदन मचाया



हमने रात नहीं देखी
रात के लुभावने रेखाचित्र देखे
उसने कहा-
“कभी मिलना हो रात्रि से
तब तुम ठहर जाना
शीतलता की गोद
उजाले का प्रमाण है वह।”
रात का भान भूल चुकी  मैं



वक़्त के साथ कुछ रिश्ते छूटे है,तो नए बन भी जायँगे...
पर नए रिश्तो में पुराने रिश्तो में ठगा गया है
उसका दर्द भी होगा,अब शायद उस शिद्दत से 
रिश्तो को निभाने में कही कमी भी रह जाए...
..............
कल फिर
सादर

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर सराहनीय संकलन।
    खरोंच को स्थान देने हेतु हार्दिक आभार।
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. सुप्रभात ! सराहनीय रचनाओं का संकलन, 'मन पाये विश्राम जहां' को स्थान देने हेतु आभार यशोदा जी !

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर रचनाओं को सहेजा है
    साधुवाद

    सभी रचनाकारों को बधाई
    मुझे सम्मलित करने का आभार

    जवाब देंहटाएं

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