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रविवार, 24 मार्च 2024

4075 ..इस होली में दिखेगी चालीस का हीरो और पिचहत्तर की प्रेमिका जोगी रा सा रा रा रा

 सादर अभिवादन

यूँ तो ..
चालीस पचहत्तर का मेल नहीं न होता है
पर इस होली में दिखेगी
चालीस का हीरो
और पिचहत्तर की प्रेमिका
जोगी रा सा रा रा रा
आज की रचनाएं



कुर्ता होली खेलता, अंगिया के सँग आज।
रँगा प्यार के रंग में, अपना देश-समाज।1।

रंग-बिरंगे हो रहे, गोरे-श्यामल गाल।
हँसी-ठिठोली कर रहे, राधा सँग गोपाल।





“कढ़ी में आयरन की भरपूर मात्रा होती है.. इसके सेवन से शरीर में हीमोग्लोबिन को बढ़ाने में मदद मिलती है और शरीर भी स्वस्थ रहता है.. कढ़ी बहुत लाभदायक होती है.. इसका सेवन त्वचा संबंधित समस्याओं से निजात दिलाने में मदद करता है…,” मेरी बात पूरी भी नहीं हो सकी,

“बस! बस बस! माँ! बेसन लाने किसी को भेजो! सभी प्रतीक्षा में हैं! और आप कहती हैं ‘अप रूपी भोजन, पर रूपी शृंगार’ हमें उसका हलवा बेहद पसंद है…!”





बच्चे   आँगन   में   खड़े, रंग   रहे   हैं   घोल।
बजा  रहे हैं भागमल, ढम-ढम अपना ढोल।।

कर  में  पिचकारी  लिए, पीकर  थोड़ी  भंग।
देवर  जी   डारन   चले, भौजाई   पर   रंग।।




रंग गहरा ऐसा कि निगाह से रूह में उतर जाए,
छुअन ऐसी हो कि रिसते घाव छूते ही भर जाए,

कुछ जुड़ाव जो दूर रह कर भी जिस्म को जकड़े,
ख़ुश्बू वो कि रगों से बह कर दिल में बिखर जाए,




परबत ले उतरत बिन लगाम के पानी के धार गंगा कस....
टोरत, फोरत , एईठत, रमजत, कूदत, फांदत, अपन मऊज म...
उतरथे ऊपर ले तरी त बोहाके ले जाथे ...संग म सब्बो जिनिस ल
नई देखय नवा, रद्दा, नवा डहर, ओई ह बनाथे नवा रद्दा...
ओकर बेग ल अपने ह  नई थामे सकिस ओई ह गंगा आय
बहदा .....जेकर बेग ओकरे मन ले आर पार रेंग देथे




गोकुल ,वृन्दावन की हो
या होली हो बरसाने की ,
परदेसी की वही पुरानी
आदत  है तरसाने की ,
उसकी आँखों को भाती है
कठपुतली आमेर की |




बड़े सयाने बोलते, करती हानि शराब।
बदनामी तो होत ही, सेहत होत खराब।
जोगीरा सारा रा रा रा
लगे लत जो दारू की, बिक जाए घरबार।
देखो पहुँची जेल में, दिल्ली की सरकार।।
जोगीरा सारा रा रा रा

कल फिर
सादर

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