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रविवार, 24 जनवरी 2021

2018 ,,पाँचवीं बार तो मैं बोल ही पड़ूँगी

सादर अभिवादन
भाई कुलदीप जी व्यस्त हैं
आज मैं हूँ न
रचनाएँ देखिए

अब नहीं 
लद्दाख ,जम्मू 
और हम कश्मीर देंगे|
अब यहीं बैठे 
गगन की 
गर्जना को चीर देंगे |


ताज़ी हवा अन्दर तभी आएगी,
जब बासी बाहर निकलेगी,
घर की सेहत को सुधारना है,
तो बासी हवा का निकास ज़रूरी है.


देखो. इतने समय बाद चल रही हो. कुछ कहें तो चुप रहना.
उसने घूर कर पति की ओर देखा-  
यह बात उन्हें क्यों नहीं कहते. तुम जानते तो हो. 
एक दो बार में तो मैं किसी को कुछ कहती ही नहीं.
कोई बात नहीं तीन-चार बार भी सुन लेना.
यह नहीं होगा. 
पाँचवीं बार तो मैं बोल ही पड़ूँगी. 
कहो तो चलूँ या रहने दूँ.
उनको कैसे कह सकता हूँ...


बहुत साजिश हैं, 
अबकी पिछली दफा से 
कई गुना अधिक संगीन चक्रव्यूह है...
उसे भेदना सीख लो...
वरना हर युग में तुम यूं ही 
साजिश के शिकार होते रहोगे। 
तुम्हारा कोई दोष भी नहीं है 
लेकिन ये भी समझ लो कि 
अब कोख में ही सर्वज्ञ हो जाना जरुरी है, 
कोख में नींद नहीं लेनी है जागना है, 
जागते रहना है, सीखना है 
दुनिया के उन सभी कूटनीतिक प्रपंचों को 
जिनसे तुम्हें दोबारा लड़ना होगा।


कोई ज़रूरी नहीं कि हर चीज़ का विनिमय हो, 
उधार ले जाने वाले शख़्स से पूर्व परिचय हो,
उसने जाते हुए मुझे कुछ यूँ देखा कि उसे मैं,
हद ए नज़र तक ख़ामोश देखता ही रह गया, 
आवश्यक नहीं, इस हार में उसकी विजय हो,
...
बस
कल शायद फिर
सादर


9 टिप्‍पणियां:

  1. हार्दिक आभार |सभी अच्छे लिंक्स |

    जवाब देंहटाएं
  2. सस्नेहाशीष असीम शुभकामनाओं के संग छोटी बहना
    उम्दा लिंक्स चयन

    जवाब देंहटाएं
  3. सुंदर प्रस्तुति.मेरी रचना को शामिल करने के लिए आभार

    जवाब देंहटाएं
  4. वाह
    बहुत अच्छी प्रस्तुति
    साधुवाद
    प्रिय यशोदा अग्रवाल जी 🙏

    हार्दिक शुभकामनाएं,
    सस्नेह,
    डॉ. वर्षा सिंह

    जवाब देंहटाएं
  5. विभिन्न रंगों से सजा हुआ पांच लिंकों का आनंद मुग्धता बिखेरता हुआ, मुझे जगह देने हेतु असंख्य आभार आदरणीया यशोदा जी - - नमन सह।

    जवाब देंहटाएं

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