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रविवार, 27 मई 2018

1045.....नोच ले जितना भी है जो कुछ भी है तुझे नोचना तुझे पता है

सादर अभिवादन..
आज सत्ताईस मई...
भारत के प्रथम प्रधान मंत्री
माननीय जवाहरलाल नेहरू का निधन
शत-शत नमन
अलग-अलग कहानियाँ
भिन्न-भिन्न दन्त कथाएँ
किसे मानें और किसे न मानें...
बीति ताहि बिसार दे की तर्ज पर आगे बढ़ें...

मन में कुछ आशंका जन्मीं - "कहीं किसी ने उसे दुत्कार कर भगा तो नहीं दिया? भीड़ देखकर वो दूर तो नहीं चली गयी? नहीं-नहीं!" इतने में भीड़ को किनारे करती बुढ़िया विमलेश को पिलाने अपनी चीनी के पानी वाली पन्नी लेकर आयी। झर-झर बहती आँखों से विमलेश स्ट्रेचर पर लड़खड़ा कर खड़ा हुआ...और  बुढ़िया को सैल्यूट करने लगा। 


हर रोज की तरह आज भी 
शाम ढलते ही
रात आयी 
धीरे धीरे
अपनी मुट्ठी बन्द किये
बडी बेसब्री से मिली उससे
कुछ न सूझा
बस गले लगा लिया 


मेरी फ़ोटो
छूटा जो  हाथ एक बार दुनिया की भीड़ में ।
ग़लती हो अपने आप से तो गिला नहीं करते ।।

आंधियों का दौर है , है गर्द ओढ़े आसमां ।
चातक को गागर नीर हम पिला नहीं सकते ।।


थी इक खुशी की मुझको तलाश,
दर्द इक पल का भी, मुझको गँवारा न था,
यूं ही आँखों से कोई बेकरार कर गया,
बस ढ़ूंढ़ता ही रहा, मैं वो करार,
दर्द का आलम, वो ही बेसुमार दे गया....


‘उलूक’ आज 
फिर नोच ले 
जितना भी 
नोचना है 
अपनी 
सोच को 
उसे भी 
पता है 
तू जो भी 
नोचेगा 
अपना ही 
अपने आप 
खुद ही नोचेगा । 

आज अब अतिक्रमण नहीं न करना है
आदेश दें
यशोदा







12 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात...
    बहुत ही अच्छी रचनाएँ
    सादर...

    उत्तर देंहटाएं
  2. सस्नेहाशीष व शुभकामनाओं के संग सुंदर संकलन की हार्दिक बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  3. शुभ प्रभात !
    बहुत खूबसूरत प्रस्तुति ।
    मुझे इस संकलन में शामिल करने के लिए हार्दिक आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  4. शुभ प्रभात ! आज की इस संकलन में मुझे भी शामिल करने के लिए हार्दिक आभार। हमेशा की तरह बेहतरीन प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  5. आदरणीय सर
    सुप्रभातम्।
    सुंदर प्रस्तुति आज के अंक की। सभी रचनाएँ बहुत अच्छी लगी।
    आभार
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  6. सुप्रभात ...बहुत ही खूबसूरत प्रस्तुति । सभी रचनाएँ एक से बढकर एक । रचनाकारों को हार्दिक बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  7. सही कहा सखी दी छोडना बेहतर है पानी मे पत्थर मारने से केवल हलचह होती है पानी की थाह कभी नही मापी जा सकती बिना औपचारिकता के जल्दी विषय पर आना आपकी अप्रतिम विशेषता....सुंदर लिंकों का चयन सभी रचनाकारों को बधाई ।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. हलचह को हलचल पढ़े कृप्या।

      हटाएं
  8. सुन्दर रविवारीय अंक। आभार 'उलूक' के नोचने को जगह देने के लिये।

    उत्तर देंहटाएं
  9. सुन्दर और सहज भाव लिये हर रचना सखी यशोदा जी आपका रचनाओं का चयन सर्वदा उत्तम 👌👌👌👌👌👌👌

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  11. बेहतरीन प्रस्तुतिकरण सुन्दर पठनीय लिंक्स...

    उत्तर देंहटाएं

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