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सोमवार, 14 मई 2018

1032.....हम-क़दम का अट्ठारहवाँ कदम

मातृदिवस पर सोशल मीडिया पर माँ के प्रति प्रकट किये गये असीम प्रेम और ममता के संदेशों से 
निकली निर्झरी से गदगद मन सोचने लगा, माँ सबके लिए अनमोल है।  
माँ के रुप में नारी का श्रद्धापूर्वक पूजन किया जाता है।
पर समाज में छुपे मुखोटे लगाते फिरते लोगों में कैसे पहचाने कि इनमें भेड़ कौन और भेड़िया कौन?



ऐसा देखा गया है कि महिला सुरक्षा के लिए बनाये गये तमाम कानून मूक  हो कर तमाशा 
देखते रह जाते है । एक सकारात्मक पहल और संदेश  दिया है इंदौर की एक अदालत ने। तीन  वर्ष की बच्ची के साथ नाबालिग लड़के के द्वारा किये गये 
जघन्य दुष्कृत्य पर इंदौर की अदालत ने 22 दिनों में ही फैसला कर दिया।  
नाबालिग को मृत्युदंड देते हुये जो कहा वो मनन योग्य है, अदालत ने कहा,  
"जिस  तरह से यह जघन्य, वीभत्स और जंगली कृत्य किया गया है इसे देखते हुये कहना पड़ रहा है 
कि यह समाज में गैगरीन रोग की तरह है जिसे ऑपरेशन करके 
अलग न करने पर पूरा समाज सड़ सकता है।"

||  सादर नमस्कार  ||

अब चलिए आज के विशेषांक की ओर-
यह सूचित करते हुये बहुत हर्ष हो रहा है कि  आदरणीय रोहिताश जी की ग़ज़ल 
की पंक्तियों पर हमारे प्रिय रचनाकारों की रचनात्मकता विस्मित करने वाली है।
बेहद सराहनीय और चमकृत रचनाएँ आपके द्वारा लिखी गयींं हैं।

आप भी आनंद लीजिए
प्रतिभावान लेखनी से प्रवाहित साहित्यिक रसधार का।

::विशेष सूचना::

रचनाएँ क्रमानुसार नहीं लगायी गयींं है सुविधानुसार लगायीं गयीं हैं।


आदरणीया डॉ.इन्दिरा गुप्ता जी की कलम से

इंतजार .इजहार .गुलाब .ख्वाब .वफा नशा 
तमाम कोशिशें सबको पाने की सरे आम हुई !

गहरे अल्फाज गहरी थी बातैं गहराई तक बात गई 
गहरे जब उतर के देखा सारी कोशिश बेकार गई

🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

आदरणीया  नीतू ठाकुर जी की कलम से

 इंतजार, इजहार, गुलाब, ख्वाब, वफ़ा, नशा
उसे पाने की कोशिशें तमाम हुई, आजमाइशें सरेआम हुई

अदब, कायदा, रस्में, रवायतें, शराफत, नेकी
हर घडी बेजान हुई, रिश्तों की गहराइयां चुटकियों में तमाम हुई

🌸🌸🌸🌸🌸🌸

आदरणीया  कुसुम कोठारी जी की कमाल की लेखनी से प्रस्फुटित दो रचनाएँ


इजहारे हाल कर बैठे, हाय रे हम ये क्या कर बैठे
दे के सुर्खरु गुलाबों का नजराना, कमाल कर बैठे।

छुपा छुपा था दिल का हाल, सरेआम कर बैठे
इंतजार रहता बेसब्री से उनका, ये भी ऐलान कर बैठे ।

वफा का आलम था दिल मे, वो वफा आम कर बैठे
छुपा था अब्र मे चांद, हटा  चिलमन दीदार कर बैठे।


💠🔷💠
शाहजहां ने बनवाकर ताजमहल
याद मे मुमताज के, 
डाल दिया आशिकों को परेशानी मे।

आशिक ने लम्बे "इंतजार" के बाद 
किया "इजहारे" मुहब्बत


🌸🌸🌸🌸🌸🌸

आदरणीया आँचल पाण्डेय जी का कलम से

इज़हार-ए-मोहब्बत ए खुदा तेरे नाम की सरेआम की
इबादत-ए-इश्क में होकर फ़ना मेरी रूह भी बस तेरे नाम हुई

इंतजार,इज़हार,गुलाब,ख्वाब,वफ़ा,नशा
ए खुदा तुझे पाने की सरेआम कोशिशें तमाम हुई

🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

आदरणीया साधना जी की लेखनी से

मेरे सपनों की इस पोटली में
प्यार के इज़हार के नाम पर 
 एक सुर्ख गुलाब की वो चंद 
सूखी बिखरी पाँखुरियाँ थीं 
जो तुम तक कभी पहुँच ही न पाईं
और थे चंद आधे अधूरे ख़त 
जिन्हें तुमने कभी पढ़ा ही नहीं !
पोटली में और था 
एक नशा, एक इंतज़ार
 एक हताशा एक खुमार  
और थी वफ़ा के नाम पर एक कसक
अपने प्यार के यूँ सरेआम 
रुसवा हो जाने की तीखी कसक 

🌸🌸🌸🌸🌸🌸

आदरणीय आशा जी की कलम से

चुना एक फूल गुलाब का
 प्रेम के इजहार के लिए
      काँटों से भय नहीं होता
स्वप्न में  गुलाब देख
 अजब सा सुरूर आया है  
वादे  वफा का नशा
 इस हद तक चढ़ा है कि
उसे पाने कि कोशिश  तमाम हुई है

🌸🌸🌸🌸🌸🌸


आदरणीया  सुधा सिंह जी के उद्गार

तमाम कोशिशें उन्हें पाने की गोया नाकाम हुई
रातें कटती हैं करवटों में मेरी तो नींदें हराम हुई

न वो इकरार करते हैं न ही इनकार करते हैं
उल्फत में क्यू जफा ही मेरे नाम हुई

दिल की तड़प भी उन्हें दिखी नहीं या - खुदा
उनकी बेवफ़ाईयां ही क्यों मेरा ईनाम हुई

🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

आदरणीया  मीना शर्मा जी की 
कलम से पल्लवित शानदार बेहतरीन ग़ज़ल
पैग़ाम
दिल धड़कता है तो सुन लेते हैं पैगाम उनका,
वो कहानी जो इक आगाज़ थी, अंजाम हुई !

हमने उस पल को कैद, कर लिया है पलकों में
जब मिले उनसे, मगर खुद से ही पहचान हुई !

कैसे सीखे कोई, अश्कों को रोकने का हुनर
बूँद दरिया से समंदर हुई,  तूफान हुई !

🌸🌸🌸🌸🌸🌸
आदरणीया पूनम मोहन जी की लेखनी से निसृत
नयन थीं सब एक सी
पर अंदाजे नजर तमाम हुईं।।

बेबाक सी है हर एक तमन्ना
गुस्ताखियों में दिल बदनाम हुईं।।

इंतजार,इजहार,गुलाब,ख्वाब,वफ़ा,नशा
उसे पाने की कोशिशें तमाम हुईं सरेआम हुईं।

🌸🌸🌸🌸🌸🌸

आदरणीया सुप्रिया पाण्डेय जी की लिखी रचना
My photo
उसकी  ख्वाहिश ऐसी लगी दिल गुलिस्तां को,
की अपनी सारी ख्वाहिशें कत्लेआम हुई...

दिल खोलकर कर दिया इज़हारे मोहब्बत हमने भी,
क्या हुआ जो बेमतलब की बनाई इज़्ज़त बदनाम हुई...

🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

आदरणीया  पम्मी सिंह जी की कलम से प्रसवित 
एक विचारणीय वजनदार,अभिव्यक्ति

ख्वाबों की जमीन तलाशती रही
अर्श पे दर्ज एहकाम की तलाश में कितनी रातें तमाम हुई

इंतजार, इजहार, गुलाब, ख्वाब, वफा, नशा
उसे पाने की कोशिशें तमाम हुई सरेआम हुई

कुछ तो रहा गया हममें जो जख्म की बातों पर मुस्कराते है
हर सुब्ह संवरता है मानों खिजां में भी फूलों की ऐहतमाम  हुई

🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

आदरणीया रेणु जी की लाज़वाब अभिव्यक्ति
दी थी दावते -इश्क तुम्ही ने  -
 भेज गुलाब उमीदो के ,
 फिर  क्यों बैठ, सरे महफ़िल 
नाम मेरा बदनाम किया  !!!!
-0-
आप सभी की लेखनी से प्रसवित आज का अंक
आपको कैसा लगा कृपया अपनी बहूमूल्य प्रतिक्रिया के द्वारा हमारा मनोबल अवश्य बढ़ाए।
हमक़दम का अगला विषय जानने के लिए

कल का अंक देखना न भूले।


-श्वेता सिन्हा

28 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात....
    रचना बनाई नहीं जाती
    रचनाएं जन्म लेती है
    कब किस टॉपिक पर लेती है,
    ये कोई नहीं जान सकता।
    बढ़िया सृजन...
    शुभकामनाएँ
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. अद्वितीय संकलन
    सस्नेहाशीष संग शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  3. बेहतरीन रचनाओं का उम्दा संकलन
    शानदार प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर अठारहवाँ कदम। सुन्दर प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  5. प्रथम तो आभार कबूल कीजिये .....
    हर रचना अपने में एक अलग तंज लिये है
    सोचने और समझने का नया ढंग लिये है
    अति मोहक उठा है कदम अट्ठारवां
    उन्नीसवे की आस लगी है !
    सुप्रभात

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत खूबसूरत अट्ठारहवाँ कदम ....सभी रचनाएँ बेहद खूबसूरत !!!

    उत्तर देंहटाएं
  7. सभी उम्दा व खूबसूरत रचनाओं का आधार मेरे एक शेर को बनवाने का मैं "हम कदम" मुहिम का शुक्रगुजार हूं।
    साधना जी वैद की रचना पढ़कर बहोत अच्छा लगा।

    एक शेर में से कितनी अनोखी रचनाएं बन कर आई हैं।


    कई रचनाओं में मेरे मैंने पाया कि मेरे शेर को ज्यों का त्यों लिखा गया है या थोड़ी सी भाषा बदल दी गयी गई...ये थोड़ा कॉपी पेस्ट का मामला हो जाता हैं।
    रचनाकारों के लिए ये कतई जरूरी नहीं होता कि वो दिए गए टॉपिक को हु-ब-हु अपनी रचनाओं में कॉपी कर ले..टॉपिक का भावार्थ लिया जाना चाहिए।
    कॉपी करने से मौलिकता नष्ट हो जाती है।
    और मौलिकता नष्ट होने का मतलब है नए विचारों की फसल कभी नहीं काटी जा सकती।

    आभार।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. यह कमेंट किसी भी प्रकार के बहस का मुद्दा नहीं होना चाहिए। या किसी को हतोत्साहित करने लिए नहीं लिखा गया था।
      लेखकों से बस अनुरोध है कि वो अगर किसी दूसरे लेखक की कोई पंक्ति कॉपी करें तो वो उस पंक्ति को डबल इन्वेटेड या उस पंक्ति को अंडरलाइन करें या उसके पंक्ति का फॉन्ट चेंज करके लिखे..फिर ये कॉपी के अंतर्गत नहीं आएगा ये फिर quotation का मामला हो जाता है और मौलिकता भी बरकरार रहती है।

      बाकी आप सब मुझ से बेहतर जानते है।

      😊😀

      हटाएं
    2. आदरणीय रोहितास जी,सर्वप्रथम तो यह स्पष्ट नहीं था कि संपूर्ण पंक्तियाँ जस की तस लेकर रचना करनी है या आपकी पंक्तियों से शब्द लेकर अपनी रचना में गूँथकर नई रचना करनी है। यानि ये निर्णय हमकदम ने हम रचनाकारों पर ही छोड़ दिया था। अब जब सभी को मालूम ही था कि रचनाएँ आपकी पंक्तियों पर की जा रही हैं तो उन पंक्तियों को रेखांकित या बोल्ड अक्षरों में करने का सवाल किसी के मन में आया ही नहीं होगा। मैं अपनी रचना के बारे में इतना कह सकती हूँ कि आपकी पंक्तियाँ कुछ समय बाद इस रचना से हटा दूँगी और तब भी मेरी रचना पर कोई असर नहीं पड़़ेगा। होना भी यही चाहिए। किसी भी लेखक की पंक्तियाँ उसकी अपनी कृति हैं जिन्हें जस का तस, बिना लेखक को श्रेय दिए ले लेना मैं भी सही नहीं मानती हूँ।

      हटाएं
    3. आप बात को समझते हैं

      आभार

      हटाएं
  8. हर रचनाओं का खूबसूरत अंदाज- ए- बयान
    मेरी रचना को स्थान देने के लिए श्वेता जी को धन्यवाद।
    सुंदर प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सुन्दर लिंक संकलन ..

    उत्तर देंहटाएं
  10. सभी चयनित रचनाकारों का हार्दिक अभिनन्दन एवं उन सभी के लिए अनंत अशेष शुभकामनाएं ! मेरी रचना को भी यह सम्मान मिला हृदय से आपकी आभारी हूँ ! अगले कदम का इंतज़ार एअहेगा ! सादर सस्नेह !

    उत्तर देंहटाएं
  11. प्रिय श्वेता, इस असाधारण, बेहद सुंदर प्रस्तुति हेतु बहुत बहुत बधाई। इस बार विषय भी आसान नहीं था फिर भी कितनी सुंदर बेहतरीन रचनाएँ आई हैं। लगभग सभी रचनाएँ एक बार पढ़ ली हैं। किसी भी रचना पर टिप्पणी लिखने से पहले उसे दो तीन बार पढ़ना आवश्यक समझती हूँ जो दो तीन दिन में ही हो पाता है। मेरी रचना को शामिल करने हेतु सादर, सस्नेह आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  12. हम-क़दम अब वयस्क हो गया है. सृजन की राह में अपने निशान स्थापित यह प्रयास अब ख़ासा लोकप्रिय हो चला है. सुन्दर प्रस्तुतिकरण के लिये आदरणीया श्वेता सिन्हा जी को बधाई. सभी रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनायें.

    उत्तर देंहटाएं
  13. प्रिय श्वेता --- नज़ाकत भरे अल्फाज़ों से सजा बेहतरीन अंक | जिस दिन से लक्ष्य रखा गया था देख रही थी पहले दिन G प्लस पर शायद कोई रचना आई ही नही | फिर धीरे - धीरे बज़्म सजने लगी एक से बढ़कर एक रचनाएँ आई | मुझे लगता है रोहितास भाई को भी परीक्षा परिणाम जितनी उत्सुकता रही होगी पूरे सप्ताह |पांच लिंकों का ये विशेष अंक भावनाओं के नये रंगों का सृजन करता है | दो पंक्तियों को आधार बना सृजन कितना उम्दा रहा ये कोई लिखने की बात नहीं | बहुत अभिनव और बहुरंगी सृजन | सबने अपनी पूरी प्रतिभा झोंक दी रचनाओं में | सभी रचनाएँ उम्दा और सराहनीय रहीं | पर आदरणीय साधना जी और कुसुम बहन की हास्य रचना ने बहुत पभावित किया | साधना बहन की रचना में सपने मुक्त आकाश में उड़ खिलखिलाते हैं | कुसुम बहन ने आज के '' डिमांडी'' प्रेम पर कुठाराघात करते हुए एक खुद्दार प्रेमी के माध्यम से यथार्थ का ज्ञान कराया जहाँ इतनी अपेक्षाएं हो वहां प्रेम कैसा ? | मेरी रचना को भी स्थान मिला | हार्दिक आभारी हूँ -- पञ्च लिंकों के निरंतर सहयोग के लिए | आपको सुंदर भूमिका के लिए बधाई देती हूँ | दोहराती हूँ माएं बेटियों के लिए और अपने लिए सावधान रहें उन संदिग्ध लोगों से जो कहीं ना कहीं हर हाल में संदिग्ध होते ही हैं | उनकी पहचान जरूरी है | और कानून सख्त होंगे तो लोगों में जरुर डर व्याप्त रहेगा |सबसे बड़ी बात हम अपने सनातन संस्कार ना भूलें बच्चों को खासकर बेटों को जरुर शिक्षित और दीक्षित करने की जरूरत है | लिखना जल्दी चाहती थी पर आजकल शहर में बिजली खून के आसूं रुला रही है | चाहकर भी जल्दी लिख नहींपायी | कभी - कभी तो सोचकर ही रह जाती हूँ |

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. प्रिय मीना बहन की बात से सहमत हूँ -- उनकी तरह मैं भी मात्र एक बार पढ़ टिप्पणी नहीं कर पाती हूँ समय लगता है |

      हटाएं
    2. स्नेह आभार रेनू बहन ।

      हटाएं
  14. विलंबित टिपण्णी के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ, देर से आई हूं सो सब पढ़ा, रोहितास जी आपकी लिखी पंक्तियाँ तो इस साप्ताहिक विषय आधार थी,पहली बार शब्द से अलग दो पंक्तियों के आधार था,विडम्बना थी इसके भाव समिलित करने हैं या पंक्तियों को शामिल करना है मैंने भी आपकी लिखी पंक्ति को मुख्य पंक्ति के आधार पर इस्तेमाल किया है अपनी लयबद्ध तरीके का अनुसरण करते हुए मैं नोट डालना भूल बहु गयी अपने ब्लॉग पर पर अभी लेबेल कर दूंगी की मुख्य पंक्तियाँ आपकी लिखी हैं उसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ,
    स्वेता जी सादर आभार आपने मेरी रचना समिल्लित की , पहली बार जब ये शीर्षक देखा था तो एक पल को लगा लिख न पाउंगी पर कोशिश की और हलचल सदा से मेरी प्रोत्शाहन करता रहा है इसके लिए मैं हृदयतल की गहराई से आभार व्यक्त करती हूं..
    रोहिताश जी एक और बात आप सौभग्यशाली हैं जो आपकी लिखी पंक्तियाँ आधार बनी और सबमे प्रयाश किया मैं भी कामना करती हूं कि यहां तक पहुंचूं कभी,
    क्योंकि लेखन अभिव्यक्ति की क्षमता सबमे होती है कमोबेस बस किसी किसी की पंक्तियाँ होठो पर रह जाने की क्षमता रखती है...

    उत्तर देंहटाएं
  15. टिप्पणी भेजने में हुई देरी के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ 🙇
    आदरणीय रोहीताश जी के शेर को आधार मानकर लिखना आसन ना था पर फ़िर भी सभी रचनाकारों की कलम ने क्या खूबसूरत रंगो से सजाकर अपनी रचनाएँ प्रस्तुत की है सभी को ढेरों शुभकामनाएँ
    मेरी रचना को भी मान देने के लिए हृदयतल से आभार
    शुभ दिवस सादर नमन

    उत्तर देंहटाएं
  16. श्वेता आपकी प्रस्तुति की सदा ही कायल हूं बहुत समय परक विषय और समस्याओं को आप अपनी लेखनी से सजा कर सलीके से पेश करते हो।
    बहुत सुंदर प्रस्तुति ।
    प्रायः सभी रचनाओं का पठन कर लिया पर प्रतिक्रिया का समय नही निकाल पा रही हूं सभी रचनाऐं अपने आप मे पूर्ण है आधार पंक्तियों के लिये रोहितास जी को सादर बधाई कि उनका एक शेर कितनी रचनाओं का सृजन प्रेरणा बना प्रतिभाओं का अंत नही है बस सभी का ढंग अलग है
    सभी रचनाकारों को बहुत बहुत बधाई मेरी दोनो रचनाओं को सामिल करने का सादर आभार ।
    रेणू बहन की स्नेह सिक्त टिप्पणी के लिये ढेर सा आभार

    उत्तर देंहटाएं
  17. बेहतरीन संकलन। अफसोस कि अस्वस्थता के कारण मैं इसबार कोई रचना नहीं दे सका।

    उत्तर देंहटाएं
  18. Kusum Kothari15 मई 2018 को 4:50 pm
    श्वेता आपकी प्रस्तुति की सदा ही कायल हूं बहुत समय परक विषय और समस्याओं को आप अपनी लेखनी से सजा कर सलीके से पेश करते हो।
    बहुत सुंदर प्रस्तुति ।
    प्रायः सभी रचनाओं का पठन कर लिया पर प्रतिक्रिया का समय नही निकाल पा रही हूं सभी रचनाऐं अपने आप मे पूर्ण है आधार पंक्तियों के लिये रोहितास जी को सादर बधाई कि उनका एक शेर कितनी रचनाओं का सृजन प्रेरणा बना प्रतिभाओं का अंत नही है बस सभी का ढंग अलग है
    सभी रचनाकारों को बहुत बहुत बधाई मेरी दोनो रचनाओं को सामिल करने का सादर आभार ।

    Independence day speech

    उत्तर देंहटाएं

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