सादर अभिवादन..
आज सत्ताईस मई...
भारत के प्रथम प्रधान मंत्री
माननीय जवाहरलाल नेहरू का निधन
भारत के प्रथम प्रधान मंत्री
माननीय जवाहरलाल नेहरू का निधन
शत-शत नमन
अलग-अलग कहानियाँ
भिन्न-भिन्न दन्त कथाएँ
भिन्न-भिन्न दन्त कथाएँ
किसे मानें और किसे न मानें...
बीति ताहि बिसार दे की तर्ज पर आगे बढ़ें...

मन में कुछ आशंका जन्मीं - "कहीं किसी ने उसे दुत्कार कर भगा तो नहीं दिया? भीड़ देखकर वो दूर तो नहीं चली गयी? नहीं-नहीं!" इतने में भीड़ को किनारे करती बुढ़िया विमलेश को पिलाने अपनी चीनी के पानी वाली पन्नी लेकर आयी। झर-झर बहती आँखों से विमलेश स्ट्रेचर पर लड़खड़ा कर खड़ा हुआ...और बुढ़िया को सैल्यूट करने लगा।

हर रोज की तरह आज भी
शाम ढलते ही
रात आयी
धीरे धीरे
अपनी मुट्ठी बन्द किये
बडी बेसब्री से मिली उससे
कुछ न सूझा
बस गले लगा लिया

छूटा जो हाथ एक बार दुनिया की भीड़ में ।
ग़लती हो अपने आप से तो गिला नहीं करते ।।
आंधियों का दौर है , है गर्द ओढ़े आसमां ।
चातक को गागर नीर हम पिला नहीं सकते ।।

थी इक खुशी की मुझको तलाश,
दर्द इक पल का भी, मुझको गँवारा न था,
यूं ही आँखों से कोई बेकरार कर गया,
बस ढ़ूंढ़ता ही रहा, मैं वो करार,
दर्द का आलम, वो ही बेसुमार दे गया....

‘उलूक’ आज
फिर नोच ले
जितना भी
नोचना है
अपनी
सोच को
उसे भी
पता है
तू जो भी
नोचेगा
अपना ही
अपने आप
खुद ही नोचेगा ।
आज अब अतिक्रमण नहीं न करना है
आदेश दें
यशोदा
आदेश दें
यशोदा
