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शनिवार, 19 अगस्त 2017

764... लघुकथा


आप सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष


कोई भी स्वचालित वैकल्पिक पाठ उपलब्ध नहीं है.

डॉ. सतीशराज पुष्करणा


आज जानते-पढ़ते हैं कुछ लघुकथाएँ


फार्मूलाबद्ध लेखन से परे युगल की लघुकथाएँ



बागड़ ही जब खेत को खाने लगे तो आस किससे की जाए ?
इस बात को वे पैनेपन के साथ उभारते हैं।
आश्रय शीर्षक लघुकथा में बलात्कृता को
सुरक्षित आश्रय में रख  दिया जाता है, किन्तु वह वहाँ भी महफूज नहीं रह पाती है।
अंततः  आश्रय स्थल ही उसका मृत्यु स्थल सिद्ध होता है।
उनकी एक और लघुकथा ‘’ पुलिस ‘’
रक्षकों के ही भक्षक बन जाने की भयावह स्थिति का बयान है ।



लघुकथा


"आपका पोता जूता ठीक करवा कर ले गया था,
उसके बकाया तीस रुपये देने थे आपको।"
 रमन ने पचास का नोट बढ़ाते हुए कहा।

"अच्छा, तो वह आपका बेटा है बाबू जी!"
 उसने पचास का नोट पकड़ कर ऊपर की जेब से बकाया पैसे निकाले
तो कई सौ-सौ के नोट नीचे जा गिरे।


लघुकथा



शुरू-शुरू में मेरा मन खेल में नहीं लग रहा था क्योंकि
मेरा पूरा ध्यान तो परेशानियों की ओर ही लगा थाI
लेकिन ज्यों–ज्यों खेल आगे बढ़ा मुझे खेल में मज़ा आने लगा I
खेलते-खेलते मेरा ध्यान परेशानियों की तरफ से
कब हट गया मुझे पता ही नहीं चलाI  दिन कब ढल गया
मुझे इस बात का भी पता नहीं चलाI अँधेरा घिरते देख
बालक गेंद लेकर अपने-अपने घर की तरफ दौड़ गयेI



लघुकथा


‘‘माँ जी…माँ जी, चाय तैयार हो गई गई है, उठिए ना!’’
माँ जी टस से मस न हुईं, वे अब भी मौन थीं।
माँ जी के शरीर की तरह उनका मौन भी
इस कड़कड़ाती ठण्ढ में जम चुका था।



लघुकथाएँ


मुझे गुस्सा आ गया बच्चे के पास गया और दो थप्पड़ जड़ दिए
और कहा "मुफ्त की कुल्फी खाते शर्म नही आती" ?
वह बोला : "मुफ्त की कहाँ ? इसके बदले थप्पड़ खाने के लिए
तो आपके पास खड़ा था वरना भाग ना जाता"?


लघुकथाएँ



भाषाओं के साहित्य में कथा का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है.
कथा कहना और सुनना मानव स्वभाव का अभिन्न अंग है.
अलिफ-लैला की कहानियाँ हों या सिंदबाद की, पोटली बाबा के लतीफे हों
या जातक और पंचतंत्र की नीति कथाएँ, सब बेमिसाल हैं.
 मौखिक और लिखित कथा के सुदीर्घ इतिहास के अगले चरण के रूप में,
आज के दौर में कथासाहित्य की नई विधा के तौर पर लघुकथा
अपनी पहचान बना चुकी है. ध्यान रहे कि आकार की दृष्टि से
 ‘लघु’ होना ही लघुकथा की पहचान नहीं है.


><><


व्यस्तता तो एक बहाना है

फिर मिलेंगे




14 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात दीदी
    सादर नमन
    लघुकथा विशेषांक
    भा गया मन को
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. शुभप्रभात..
    एक शब्द विशेष पर प्रस्तुति बहुत बढिया..
    आभार।

    जवाब देंहटाएं
  3. लघु कथा विषयक सुन्दर हलचल प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  4. सुंदर प्रेरक उद्देश्यपरक लघुकथाओं से सुसज्जित आज का लघुकथा विशेषांक। सभी चयनित कथाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएं। आभार सादर। आदरणीय विभा दीदी स्वयं अनेक शिक्षाप्रद एवं प्रेरक लघु कथाओं का सृजन कर चुकी हैं। बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  5. कथाओं को छोड़ दें तो प्रयास अच्छा रहा।

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति विभा जी के सुन्दर अन्दाज के साथ कुछ अलग।

    जवाब देंहटाएं
  7. दिल को छू जाने वाली लघुकथायें. बहुत अच्छी प्रस्तुति.

    जवाब देंहटाएं
  8. सुंदर प्रस्तुति । सभी लघुकथाएँ बहुत अच्छी हैं। शुक्रिया विभा दीदी कुछ अलग व नया पढ़ने को मिला ।

    जवाब देंहटाएं
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