पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

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बुधवार, 2 अगस्त 2017

747..पन्नों पे तख़य्युल के अक्सों..


२ /० ८ /२ ० १ ७ 
ॐ रवये नम :

मांगल्यं सुप्रभात 

आज अगस्त महीने का दूसरा और  
हफ्ते का तीसरा दिन यानि बुधवार 

की  श्री गणेश इन सुपंक्तियों  से..

                    
चंद शब्द  के  साथ 
पन्नों पे तख़य्युल के अक्सों को उकेर कर देखों  ,
 इन अल्फाज़ों का कमाल है
जो कई जिन्दगी के इक  सार लिख जाता.. 
तो चलिए ..
अब निग़ाह डालते  हैं  आज की लिंको की ओर.. 

ब्लॉग कशिश  से आदरणीय " कैलाश शर्मा जी " द्वारा रचित संवेदनशील रचना..




अश्क़ आँखों में थम गया होगा।


आज खिड़की नहीं कोई खोली,

कोइ आँगन में आ गया होगा।



ब्लॉग नईसोच  से आदरणीया " सुधा देवरानी जी " द्वारा रचित खूबसूरत रचना..


तुम तो तुम हो न ........अप्राप्य को हर हाल मेंं प्राप्त करना तुम्हारी फितरत भी है, और पुरुषार्थ भी......

जब तक अलभ्य है, अनमोल है.......उसे पाना ही तो है तुम्हारा सपना, तुम्हारी मंजिल.......

प्राप्त कर लिया ,बस...जीत गये...... ....अब क्या.......कुछ भी नहीं


ब्लॉग अल्लम्...गल्लम्....बैठ निठ्ठ्लम्...      से आदरणीय " आनन्द पाठक जी" द्वारा रचित व्यंगात्मक रचना..
इसी अन्तरात्मा की --तमा --तमा---  की आवाज़ पर तो सारा राजनीतिक फ़िल्मी  ड्रामा होता है } और फिर -"सारा जहाँ है  निकम्माबताया जाता है।

इस अन्तरात्मा की आवाज़" का  प्रथम प्रयोग और उपयोग सबसे पहले मैनें किया था जब मैं इन्टरमीडियेट क्लास में था।अगर मेरे इस कथन पे किसी को सन्देह हो तो शोध कर सकता



आदरणीया " मालती मिश्रा " जी द्वारा रचित विचारशील लेख..
बुराई और झूठ की संख्या बहुत अधिक होती है। इसका साक्षात्कार
 तो बार-बार होता रहता है। हम देश में सुरक्षित रहकर स्वतंत्रता पूर्वक
 अपना जीवन जीते हैं तो हमें अभिव्यक्ति की आज़ादी, सहिष्णुता-असहिष्णुता,
दलित-अधिकार, अल्पसंख्यक आदि सबकुछ दिखाई देता है, हम सभी
 विषयों पर खुलकर चर्चा करते हैं या यूँ कहूँ कि बिना समझे
 अपना मुँह खोलते हैं। हमारे बोल देश-विरोधी हैं या समाज विरोधी
 इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। परंतु ऐसे ही लोगों को पकड़ कर
 सरहद पर खड़ा कर देना चाहिए जो सेना के मुकाबले विद्रोहियों
देशद्रोहियों के अधिकारों की पैरवी करते हुए मानवधिकार का हवाला देते हैं।

ब्लॉग मेरे हिस्से की धूप से  आदरणीया " सरस जी " द्वारा रचित विचारशील रचना..
                                        


सभी रिश्तों
उनसे जुड़ी संवेदनाओं 
और उपजते प्रश्नचिन्हों
को ताक पे रखकर

आज की प्रस्तुति बस यहीं तक 
विचारों की अभिव्यक्ति पाठकों और रचनाकारों के बीच सूत्रधार है 
सो सूत्र बनाए रखे..
इति शम 
धन्यवाद
पम्मी  



चलिए ये तो हुई आज़ की बातें, कल रवीन्द्र जी की प्रस्तुति

18 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात पम्मी बहन
    मनभावक रचनाएँ पढ़वा रही हैं आप
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. शुभ प्रभात !
    सही कहा आपने पम्मी जी
    तख़य्युल के अक्सों (कल्पना के प्रतिबिम्बों) को
    पन्नों पर उकेरना सार्थक सृजन है
    जिसमें समाये होते हैं एहसासों के महासागर।
    उम्दा सूत्रों का संकलन है आज का अंक।
    सभी चयनित रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाऐं !
    पम्मी जी को बधाई एक सार्थक प्रस्तुति के लिए।
    सुपंक्ति में वक़्त के स्वभाव का उल्लेख प्रभावी है।
    शुक्रिया कल का ज़िक्र करने के लिए।
    आभार सादर।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही अच्छी प्रस्तुति। सुप्रभात।

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर संकलन ,अच्छी रचनायें

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुंदर लिंकों से सजी आज की सुंदर पम्मी जी।

    उत्तर देंहटाएं
  6. सदैव की भाँति इस बार भी सुंदर संकलन एवं प्रस्तुति के लिए बधाई पम्मी जी। सभी रचनाकारों को भी बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  7. व्यस्तता के क्षणों में पम्मीजी के द्वारा परोसे गए इन "तख़य्युल के अक्सों " को निहारने में ठेठ टटकापन महसूस होता है। सभी नगमानिगारों को बधाई। रविंद्रजी को खास आदाब 'तख़य्युल के अक्सों ' के मतलब से रु ब रु कराने के लिए।

    उत्तर देंहटाएं
  8. सुंदर प्रस्तुतिकरण..पठनीय सूत्रों से परिचय कराने के लिये आभार पम्मी जी..

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  10. सुन्दर प्रस्तुति करण ...उम्दा संकलन....
    मेरी रचना को स्थान देने के लिए हार्दिक धन्यवाद पम्मी जी....

    उत्तर देंहटाएं
  11. आदरणीय पम्मी जी आज का अंक आपके सफल प्रस्तुति से सफल हुआ। आपकी प्रस्तुति सबसे नराली !भावों के साथ सुन्दर लिंक जो मन को छूते हैं आभार ,"एकलव्य"

    उत्तर देंहटाएं
  12. बेहतरीन रचनाओं से संजोया हुआ अंक ! विविधता से परिपूर्ण करने हेतु शुक्रिया पम्मीजी ।

    उत्तर देंहटाएं
  13. स्याही के सुर्खे-रंग को तहे-दस्त पे हिना कर देखो..,
    तख्खयूल के अक़्स को फिर सफ़हे-आइना कर देखो.....

    उत्तर देंहटाएं
  14. सुंदर संकलन, मेरी सुविचार
    को सम्मिलित करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद |

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत सुन्दर और रोचक संकलन...आभार

    उत्तर देंहटाएं

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