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सोमवार, 3 सितंबर 2018

1144....हम-क़दम का चौंतीसवाँ क़दम

श्रीकृष्ण का जन्म युग परिवर्तन सामाजिक,राजनीतिक,आध्यात्मिक मूल्यों को 
नवीन दृष्टि प्रदान करने के लिए हुआ था।
श्रीकृष्ण का चरित्र संपूर्ण सांसारिक और आध्यात्मिक जीवन का अलौकिक,अद्भुत,मनमोहक 
और आकर्षक स्वरूप है। सर्वशक्तिमान होते हुये भी श्रीकृष्ण का कंस के कारागृह में जन्म लेना, 
अजर-अमर होकर भी एक साधारण तीर के लगने पर प्राण त्यागने के प्रसंग तक उनका 
जीवन अविश्वसनीय और विचित्र लीलाओं का अनिर्वाच्य संगम है।

अलौकिक प्रेम को परिभाषित करने वाले कृष्ण,सच्ची मित्रता का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं। 
कृष्ण की बाल लीलाएँ ,राजनीतिक चरित्र, गीता के उपदेश,आज हमारे देश ,समाज,और 
खासकर युवाओं के लिए दिशानिर्देशक है।
कृष्ण को शब्दों में बाँधना असंभव है।


अब चलिए आज के हमक़दम के विषय की ओर।
बैरी,शत्रु, अरि या दुश्मन जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के प्रति 
व्यक्तिगत घृणा,द्वेष या दुराग्रह का भाव रखता है तो उसे बैरी नाम से परिभाषित किया जाता है।

हमेशा की तरह हमारे नियमित रचनाकारों की प्रतिभा संपन्न, मुखर लेखनी से प्रसवित रचनाओं ने बैरी शब्द पर अप्रतिम और सार्थक रचनाओं की इंद्रधनुषी छटा बिखेरी है। 
आइये आप भी रचनाओं का आस्वादन  करिये।
★★★
आदरणीया कुसुम कोठारी जी

किनारे पे बैठ इंतजार किया किये
शाम ढलने तक न आया परदेशी

"बैरी नदिया" उफन उफन बहती रही।

★★★★★

आदरणीया आशा सक्सेना जी

सच्ची मित्रता के  लिए
मन मारना पड़ता है
उसे बरकरार रखने के लिए
बैर भाव पनपने में तो देर नहीं होती
पर बैर मिटाने में वर्षों लग जाते हैं
तब भी दरार कहीं रह जाती हैl
★★★★★

आदरणीया सुप्रिया पाण्डेय जी
आओ खामोश बैठे कुछ देर
बैरी निंदिया
एकटक देख रहे हैं छत की ओर 
ये बैरन नींद भी न आती,
तुम्हारी यादों की दस्तक है,
जो नींद को दरवाजे के उस पार खड़ा कर रखा है
किसे कहूँ बैरी तुम्हारी यादों का 
मेरी नींद को...

★★★★★

आदरणीया साधना वैद जी
किसे माने वह अपना बैरी
उस माँ को जिसने उसे जीवन दिया
एक कच्ची मिट्टी के ढेर को
आकार दे उसकी सुन्दर मूरत गढ़ी 
सद्शिक्षा और सद्संस्कार दे
उसके व्यक्तित्व को निखारा सँवारा
संसार के सारे सुख और खुशियाँ दीं

★★★★★

आदरणीया अभिलाषा चौहान जी
की दो रचनाएँ

विरहिणी जागे सारी रैन
पिया की याद में तरसे नैन
उमड घुमड़ घटा घिर आई
बिजूरि चमके सारी रैन
बैरी भये सावन के बदरवा
पिया की याद में जरे करेजवा
कैसे आये जिया को चैन

★★★

मन के बैरी पांच भए
मन को अपने वश में किए
काम क्रोध मद लोभ मोह
मन में पनपे उपेक्षा द्रोह
अति कामी व्यभिचार में डूबा
चरित्रहीन उस सम न दूजा
क्रोध समान न बैरी कोय

★★★★★

आदरणीया अनुराधा चौहान जी

ख्वाबों के महल
बहुत बड़े हैं
राह में अजगर
बहुत पड़े हैं
कैसे मंजिल
को में पाऊं
जमाना बैरी बन बैठा

★★★★★

चलते-चलते पढ़िये 
आदरणीया शकुंतला राज जी की लोकभाषा में लिखी  
बेहद मोहक रचना

बैरी भईल ई सावन के महीनवां
न बुझेला जियरा का हाल हो बैरी सजनवां
हर वकत तरसाये तड़फाये ला हो बैरी सजनवां
जब जब लगाईला सिन्दूरवा हो बैरी सजनवां
आवे ला तोहार याद ओ बैरी सजनवां
जब जब लगाईला माथे पर टिकुली हो सजनवां

★★★
एक गीत
सजनवा बैरी हो गये हमार



आपके द्वारा सृजित यह अंक आपको कैसा लगा कृपया 
अपनी बहूमूल्य प्रतिक्रिया के द्वारा अवगत करवाये
 आपके बहुमूल्य सहयोग से हमक़दम का यह सफ़र जारी है
आप सभी का हार्दिक आभार।


अगला विषय जानने के लिए कल का अंक पढ़ना न भूले।
अगले सोमवार को फिर उपस्थित रहूँगी आपकी रचनाओं के साथ

20 टिप्‍पणियां:

  1. इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. शुभ प्रभात प्रिय श्वेता जी बहुत अच्छी प्रस्तुति हमेशा की तरह। रचनाओं को पढकर आनंद आ गया सभी को बधाई। मेरी रचनाओं को सम्मिलित
      करने के लिए आपका धन्यवाद

      हटाएं
  2. श्रीकृष्ण जन्म की शुभ कामनाएँ
    सभी ने काफी से अधिक अच्छा लिखा
    साधुवाद
    और आभार श्वोता को इन सबको
    सिलसिलेवार सेटिग के लिए
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  3. एक जानकारी और प्रेषित करनी है
    कल 4 सितम्बर का भाई कुलदीप जी का जन्म दिन है
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत ही उम्दा प्रस्तुति सभी रचनाकारों को बधाई
    मेरी रचना को स्थान देने के लिए सादर धन्यवाद🌷🌷🌷🌷🌷

    जवाब देंहटाएं
  5. बैरी पर अच्छी-अच्छी रचनायें पढ़ने को मिली
    सुंदर संकलन

    जवाब देंहटाएं
  6. सुप्रभात आप सभी को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं सभी रचनाकारों को बहुत बहुत बधाई सुंदर संकलन बेहतरीन रचनाएं मेरी रचना को हलचल प्रस्तुति में स्थान देकर मेरा उत्साह बढ़ाने के लिए बहुत बहुत आभार श्वेता जी

    जवाब देंहटाएं
  7. सुप्रभात, बहुत सुन्दर प्रस्तुति । सभी रचनाएं अत्यंत सुंदर । कृष्ण जन्माष्टमी के शुभअवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं ।

    जवाब देंहटाएं
  8. बढ़िया लिंक्स से सजा पांच लिंकों का आनंद |मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद |

    जवाब देंहटाएं
  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। मुकेश के एक सुन्दर गीत के साथ।

    जवाब देंहटाएं
  10. सुप्रभात बहुत ही सुंदर प्रतुस्ति मेरी रचना को स्थान देने हेतु सादर आभार ...

    जवाब देंहटाएं
  11. शुभप्रभात.....सुंदर संकलन.....

    जवाब देंहटाएं
  12. बहुत ही खूबसूरती से संयोजन किया है श्ववेता जी ने
    आपकी लगन सराहनीय।
    सभी रचनाकारों को सुंदर लेखन के लिए बधाई एवम् धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  13. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति
    सभी को जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं

    जवाब देंहटाएं
  14. बहुत ही उम्दा प्रस्तुति सभी रचनाकारों को बधाई

    जवाब देंहटाएं
  15. हमेश की तरह या यूं कहूं और भी सुंदर प्रस्तुति, सभी को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं

    जवाब देंहटाएं
  16. नंदलाला के जन्मदिवस के सबको हार्दिक बधाई ! आज उन्हीं के आगमन की तैयारी में समय ही नहीं मिल सका ! अभी देखी हमकदम की रचनाएं ! सभी बहुत सुन्दर सार्थक एवं प्रभावी ! मेरी रचना को सम्मिलीय करने के लिए हृदय से आभार एवं हार्दिक धन्यवाद !

    जवाब देंहटाएं
  17. सभी रचनाएँ लाजवाब और हमेशा की तरह श्वेता जी की बहुत सुंदर प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं

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