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शुक्रवार, 13 अप्रैल 2018

1001...आसमांं पर कारवांं सजाते चलो

एक-एक क़दम जमाते चलो
न थको दायरा बढ़ाते चलो
जमीं पर ग़र जगह न मिले
आसमांं पर कारवांं सजाते चलो
--श्वेता

सादर नमस्कार

आप पाठकों को पाँच लिंक मंच से जोड़ने वाले  चर्चाकारों को सादर नमन करते हुये उनका अभिनंदन करते हैं। इनके बहुमूल्य साथ के लिए  आभार का हर शब्द तुच्छ है। 
आपकी सृजनशीलता ज्यादा से ज्यादा साहित्य सुधियों तक पहुँचाने वाले 
हमारे बेशकीमती चर्चाकारों के सम्मान मेंं आज
इनके ब्लॉग से रचनाएँ
तो चलिए आप पाठकों एक माला में पिरोनेवाले हमारे चर्चाकारों के संदर्भ में आप भी जानिये।

🔷 💠 🔷

आदरणीया विभारानी श्रीवास्तव जी

साहित्य जगत में क्रियाशील रहने वाली धीर,गंभीर हमारी विभा दी अपनी लघु कथाओं,हायकु और वर्णमाला पिरामिड के द्वारा समाज को व्यापक एवं सारगर्भित संदेश देती है। प्रत्येक शनिवार को एक ही विषय पर लायी गयी विविधतापूर्ण प्रस्तुति का हम सभी 
बेसब्री से इंतज़ार करते हैं।
उनके ब्लॉग
"सोच के सृजन" से मेरी पसंद की रचनाएँ

क्षणिका
मेरा है , मेरा है , सब मेरा है
इसको निकालो उसको बसाओ
धरा रहा सब धरा पै बंद हुई पलकें
अनेकानेक कहानियाँ इति हुई
लील जाती रश्मियाँ पत्तों पै बूँदें
तब भी न क्षणभंगुर संसार झलके


🔴


हद की सीमांत ना करो सवाल उठ जाएगा
गिले शिकवे लाँछनों के अट्टाल उठ जाएगा
लहरों से औकात तौलती स्त्री सम्भाल पर को
मौकापरस्त शिकारियों में बवाल उठ जाएगा

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आदरणीय दिग्विजय अग्रवाल जी

 पाँच लिंक के मजबूत स्तंभ की तरह है जिसके कंधों पर 
निश्चंत होकर यह वृक्ष प्रतिदिन पुष्पित और पल्लवित है।
काम की व्यस्तता की वजह से इनकी उपस्थिति कम ही हो पाती है परंतु कम शब्दों में  बेबाकी से कहने का अंदाज़ इस कभी-कभार को भी जीवंतता से भर देता है। उनके द्वारा संकलित सभी 
रचनाएँ उद्देश्य परक हैं।
उनके ब्लॉग "किसी के इतने पास न जा" से मेरी पसंद की रचनाएँ




 शेर के बाल को आग के हवाले कर दिया और लक्ष्मी को समझाते हुए कहा कि इंसान शेर से ज्यादा खतरनाक नहीं हो सकता। यदि वह प्यार और धैर्य से शेर को अपने वश में कर सकती है तो पति को क्यों नहीं। लक्ष्मी को अपने पति की बीमारी का इलाज मिल गया था।

🔴

लक्ष्मी.. अपनी मर्जी की मालिक है....विजय विक्रांत


ये सवाल किया तो सेठ ने कहा कि उस के पास दो लड्डू हैं। एक लड्डू 
वो किराए का दे देगा और एक लड्डू से अपने बच्चों का पेट भरेगा। 
क्योंकि रात हो रही थी और मल्लाह को वापिसी सवारी की कोई उम्मीद नहीं थी, 
उस ने सेठ से कहा कि अगर पार जाना है तो दोनों लड्डू देने होंगे। 
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आदरणीया यशोदा अग्रवाल जी

किसी परिचय का मोहताज़ नहीं।
पाँच लिंक का बीजारोपण करने वाली
स्नेही, सहृदय,पारखी दृष्टि और धैर्य की मूर्ति हैं हमारी यशोदा दी।
वर्तमान में ब्लॉगजगत में साहित्यिक अभिरुचि रखने वाली, स्वयं का परिचय एक पाठक के रुप में देती, 
सबसे चिरपरिचित चेहरा है यशोदा दी का। 
जीवन के संघर्षों का जीवटता से सामना करती रही हैं।
 साहित्य के सागर से बेशकीमती मोती चुनकर उनको 
प्रोत्साहित करती हुई सच्ची साहित्य साधना में लीन रहती हैं। 
सुगढ़ प्रस्तुति में सदैव नया का प्रयास करती है 
रचनाकारों का खुले हृदय से स्वागत करती है।
उनकी कलम जब भी चलती है प्रभावशाली 
रचनाओं का प्रादुर्भाव होता हैं।
उनके ब्लॉग धरोहर से मेरी पसंद की रचनाएँ


विडम्बना 
यही है की 
स्वतंत्र भारत में 
नारी का 
बाजारीकरण किया जा रहा है,

प्रसाधन की गुलामी, 
कामुक समप्रेषण 
और विज्ञापनों के जरिये 
उसका.......... 
व्यावसायिक उपयोग 
किया जा रहा है. 

🔴


...आपकी देह के 
इर्द-गिर्द... 
रिश्तेदारों का 
जमावड़ा शुरु हो जाएगा...
कुछ ये जानने की 
कोशिश में रहेंगे कि 
हमें कुछ दे गया या नहीं....
यदि नहीं तो... 



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आदरणीय रवींद्र सिंह यादव जी

सहज,सरल और सौम्य व्यक्तित्व के स्वामी रवींद्र जी के पास ज्ञानवर्द्धक एवं रोचक जानकारियों का ख़ज़ाना है। बात चाहे राजनीति की हो , ऐतिहासिक हो, साहित्यिक हो या किसी समसामयिक संदर्भों में हो उनकी विलक्षणता सदैव प्रभावित करती है।
रवींद्र जी की आलोचनात्मक प्रतिक्रिया सदैव मार्गदर्शन करती है। 
उनकी रचनाएँ समाज का दर्पण है। उनकी समसामयिक हलचलों को समाचार-काव्य में उकेरनी की विधा अपने आप में अनूठी है।
एक संवेदनशील कवि के मनोभावों की 
अनमोल कृतियों के संकलन उनके ब्लॉग  "हिन्दी आभा*भारत से
 मेरी पसंद की रचनाएँ


गुज़रेंगे   लम्हात -ए -ज़िन्दगी  

अपनी   रफ़्तार   लिए ,

तराने  गुनगुनायेगी  ज़ुबां  

बजेंगे  धड़कनों    के  साज़   वहाँ । 

मुंतज़िर  है   कोई  

सुनने   को  मेरे  अल्फ़ाज़   वहाँ ।   

🔴


मिट्टी-पानी का अनुपात 
अभी तय नहीं हो पाया है, 
कभी मिट्टी कम 
तो कभी पर्याप्त पानी न मिल पाया है। 


🔷 💠 🔷

आदरणीया पम्मी सिंह जी

गंभीर छवि रखने वाली पम्मी जी बेहद हंसमुख,परिष्कृत 
विचारों से युक्त और आत्मीय व्यक्तित्व की हैं।
उनकी सुरुचिपूर्ण प्रस्तुति का पाठकों को पूरे सप्ताह इंतज़ार रहता है। 
 पम्मी जी कम शब्दों में भावों की गरिमा का ख़्याल रखते हुये 
रचनाओं में गूढ़ अर्थ गूँथती हैं।
उनकी रचनाएँ अलग से पहचानी जा सकती है। रचनाओं के ज़ज़्बातों को उभारने में उनके पास  उर्दू शब्दावली का समृद्ध भंडार है।
उनके ब्लॉग
" गुफ़्तगू "
से मेरी पसंद की रचनाएँ
लफ़्ज़ जो बयां

कीमियागर है कई अनाम लम्हातों का
तन्हाइयों में रकाबत का रिश्ता भी निखर जाता 


रहगुज़र है तन्हा ,ग़म -ओ- नाशात का

इस अंधे शहर में जख्म फूलों की प्रखर जाता



🔴


लहजे तो इनके असर होने में हैं,
हमनें तो बस आज लिखा है..
इन सफ़हे-आइना पर,

 क़मर आब की जिक्र कर
तुम अपना कल लिख देना
🔷 💠 🔷


आदरणीय कुलदीप सिंह ठाकुर 

हमारे परिवार के अति विशिष्ट व्यक्तित्व,बेहद सौम्य कुलीन विचारों से सुशोभित कुलदीप जी की प्रतिभा संपन्नता अचंभित करती है। 
समाज के ज्वलंत मुद्दों पर कुलदीप जी का  गंभीर और सटीक 
चिंतन सदैव उद्देश्य पूर्ण है।
उनकी प्रस्तुति सदैव समसामयिक और प्रासंगिक होती है। 
उनके विचार ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विषयों पर प्रभावित करते हैं।
कुलदीप जी के ब्लॉग 
"मन का मंथन" 
से मेरी पसंद की रचनाएँ
एक प्रश्न
वो बेटी
ईश्वर से पूछती है,
क्यों भेजा गया
मुझे उस गर्भ में,
जहां मेरी नहीं
बेटे की चाह थी....

🔴


मेरे बचपन के दिनों में,
जब होता था हिमपात,
जलाकर आती-रात तक  आलाव,
बैठते थे सब एक साथ....
याद आती हैं सबसे अधिक
पूस-माघ की वो लंबी  रातें,
दादा-दाती की कहानियां,
बजुरगों की कही  सच्ची बातें....
अब तो  बर्फ के दिनों में भी, 
आलाव नहीं, आग जलती है,

🔷 💠 🔷 


हमारे आदरणीय/आदरणीया चर्चा कारों के सम्मान में कहे गये 
मेरे भावों में कुछ त्रुटि रह गयी हो तो मैं करबद्ध क्षमाप्रार्थी हूँ।
सादर आभार

कृपया अवश्य बताये आप को आज अंक कैसा लगा?
आपसभी पाठकों की प्रतिक्रिया मनोबल में वृद्धि करती है।
आप गुणीजनों की बहुमूल्य सुझावों की प्रतीक्षा में

24 टिप्‍पणियां:

  1. वाह...
    शुक्रिया सखी
    बहुमूल्य अंक दिया आपने आज
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुन्दर आग़ाज। ऊर्जावान, कर्मठ, समर्पित, हलचल के सिपाहियों को सलाम।

    उत्तर देंहटाएं
  3. प्रिय श्वेता --- शुभ मुहूर्त और शुभांक के साथ पांच लिंकों का कारवां एक नये क्षितिज की और अग्रसर हो चला है | अनंत शुभकामनाओं के साथ आपको इस सराहनीय अंक की प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई देती हूँ |इस लिंक से जुडी अपनी सभी स्नेहिल बहनों और अत्यंत शालीन और अति सहयोगी बंधुओं के बारे में जानकर अत्यंत हर्ष हुआ सभी के बारे में हररोज नयी - नयी बातें
    पता चल रही हैं |सभी जी ऊर्जा और अप्रितम जज्बे को हजारों सलाम | सभी रचनाओं का अभी मात्र अवलोकन ही किया है | हमेशा की तरह बेहतरीन और सराहनीय सशक्त रचनाएँ है | इस यात्रा की सफलता की कामना करती हूँ | सस्नेह ----------

    उत्तर देंहटाएं
  4. पिछले सभी अंकों की प्रस्तुति लाजवाब या फिर कहूं कहीं आसमान छूती रही है और आज 1001वां अंक आसमां पर सीधे स्थापित हो गया सभी वरिष्ठ रचनाकारों और संयोजकों का थोडे सिमित पर बहुमूल्य शब्दों मे परिचय और आभार व्यक्त, जैसे किसी गुलदस्ते को किसी ने विभिन्न बेमिसाल फूलों से चुन चुन कर अपनी सारी निष्ठा के साथ सजा दिया आकाश कुसुम सा दुर्लभ अंक बहुत बहुत बधाई प्रिय श्वेता ।
    आपके बारे मे मै थोड़ा लिखने की गुस्ताखी कर रही हूं ।
    श्वेता एक कम उम्र बहुमुखी प्रतिभा की धनी, कोमल हृदय स्नेह का बहता दरिया, घर की सभी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाकर भी ब्लॉग जगत पर जल्दी ही चमकते सितारे सी आभामान आलोकित है और सदा और ऊंचाई पर बढती रहे इसी शुभकामना के साथ
    साभार

    उत्तर देंहटाएं
  5. दी,आपके स्नेहातिरेक से अभिभूत है हम। मन भाव से भर आया। आपकी शुभकामनाएँ सदैव अपेक्षित है दी, सदैव।
    आपका पवित्र आशीष अवश्य फलीभूत होगा।

    सादर
    आभार

    उत्तर देंहटाएं
  6. शुक्रिया श्वेता जी, अभिभूत हूँ इतने सारे शब्दों से..
    निशब्द कर दी..पर आपकी कमी खल गई अपना भी परिचय पंसद देना था। खूबसूरत प्रस्तुति।
    धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  7. श्वेता जी उत्कृष्ठ संकलन है आज का,आप सबों को ढेरों शुभकामनाएं और आभार हम सभी को इतनी उम्दा रचनाओं से परिचित कराने को...

    उत्तर देंहटाएं
  8. हलचल के सभी क़लम के सिपाहियों को साधुवाद
    सभी रचनाकार उत्कृष्ट
    एक -एक क़दम जमाते चलो
    ना थको दायरा बड़ाते चलो
    ना मिले ज़मीं पर जगह
    आसमा पर कारवाँ सजाते चलो
    बेहतरीन संकलन

    उत्तर देंहटाएं
  9. 1001के शुभारम्भ में सभी माननीय चर्चाकारों के विषय में जानकारी प्राप्त कर बहुत अच्छा लगा बेहद शानदार प्रस्तुति करण के साथ सबकी लाजवाब रचनाओं से रूबरू होकर भी थोड़ा अधूरापन सा था सखी श्वेता जी की पहचान के बिना, जिसको परिपूर्णता मिली सखी कुसुम जी की प्रतिक्रिया से......आप सभी को ढ़ेरों शुभकामनाएं एवं बधाइयां...

    उत्तर देंहटाएं
  10. वाह!!श्वेता !!1001 ...अंक ..शानदार शुरुआत !!
    बहुत खूबसूरत प्रस्तुति ...बस ये कारवाँ यूँ ही आगे बढता रहे ...आप सभी वरिष्ठ रचनाकारों को हार्दिक धन्यवाद देती हूँ ...हम सभी को प्रोत्साहित करते रहने के लिए .

    उत्तर देंहटाएं
  11. प्रिय श्वेता जी,
    लाजवाब प्रस्तुति ।यादगार संकलन । हर एक चर्चाकार की अनुभवी रचना ने इस अंक को बहुमूल्य बना दिया है ।आदरणीय कुसुम जी का आभार जिन्होंने आपका परिचय दे इस अंक को पूर्ण किया । इस शुभ संख्या जैसा ही चर्चाकारों की उर्जा, रचनाकारों की रचनात्मकता और पाठकों की सहृदयता से ब्लॉग का भविष्य भी शुभ रहे । शुभकामनाएँ ।
    सादर ।

    उत्तर देंहटाएं
  12. लाजवाब प्रस्तुति ! बहुत सुंदर आदरणीय ।

    उत्तर देंहटाएं

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