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बुधवार, 20 मई 2020

1769...खबरों का सिलसिला कायम है..



।। भोर वंदन ।।
मैं बेपनाह अँधेरों को सुब्ह कैसे कहूँ
मैं इन नज़ारों का अँधा तमाशबीन नहीं

बहुत मशहूर है आएँ ज़रूर आप यहाँ
ये मुल्क देखने लायक़ तो है हसीन नहीं
 दुष्यंत कुमार
ऐसा लग रहा है मजदूरों-कामगारों की परेशानियां यथावत जारी है हर नया दिन नई दुश्वारियों 
के साथ..खबरों का सिलसिला कायम है। विशेष  एहतियात और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ चलते चले.. क्योंकि रूकने का नाम जिंदगी तो नहीं..इसी क्रम में बढ़ते हुए नज़र डालें आज की लिंकों पर..✍
⚜️⚜️



तुम्हारे वादों को 
आवाजों को
सिरे से खारिज कर 
अपने मजबूत पांव में
बांधकर आत्मनिर्भरता
हम तो लौट रहें हैं अपने गांव..

⚜️⚜️




ब्लॉग ख़याल है पन्ने..ज़हन एक किताब

नहीं!
न आलस है, न डर
न ही लचीलेपन की कमी।
यह है-एक नया #एहसास
नया इसलिए कि कभी चखा ही न था हमने इसका स्वाद
यह सन्तुष्टि है #अंतर्मन की,
यह अनचाही भाग-दौड़ से मिला तनिक विश्राम है,.

⚜️⚜️



कंटक पथ पर चलने वाले
भरते ऊँची उड़ान
राह रोकती खड़ी आँधियाँ
वे छूते आसमान

पाषाणों के बीच दबा ज्यों
बीज बना दुख हरता
शौर्य बड़े साहस के कारज
बीज एक लघु करता
फोड़ धरा को निकले बाहर
ये सृष्टि का वरदान
राह रोकती खड़ी आँधियाँ..

⚜️⚜️




कल कल बहती नदिया के तट पर एक बड़े से खुले सभागार में बड़े पैमाने पर वार्षिक समारोह का आयोजन किया गया था।उस कार्यक्रम में गरिमा भी आज अपना कथक नृत्य पेश कर रही थी। सूर्य अस्ताचल पर था।  नीचे नदिया का  नयनाभिराम सुंदर किनारा औऱ ऊपर  अथाह विस्तृत नीला वितान । 
सबकुछ कितना मनमोहक था

⚜️⚜️



ब्लॉग छान्दसिक अनुगायन
 के साथ आज की प्रस्तुति यहीं तक..

सधे हुए 
होंठ मगर 
हाथों से छूट  गई |

कल मुझको 
सुनना 
ये वंशी तो टूट गई |

कल शायद 
झीलों में 
नीलकमल खिल जाये ,
पत्तों में 
छिपी हुई 
मैना भी मिल जाये ,
छटपटाते 
प्यास से 
व्याकुल हिरन के प्रान |

और नदियों 
के किनारे 
शब्द भेदी बान |
जल रहे हैं 
वन ,नशीली 
आँधियों के दिन ,
हवा जूड़े
खोलकर के
ढूँढती है पिन..
⚜️⚜️
हम-क़दम का नया विषय

यहाँ देखिए
⚜️⚜️

।। इति शम ।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह ‘तृप्ति’ ..✍

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपका बहुत बहुत आभार |सभी लिंक्स बहुत अच्छे |

    जवाब देंहटाएं
  2. वाह!!सुदर प्रस्तुति ।

    जवाब देंहटाएं
  3. वाह बेहतरीन रचना संकलन एवं प्रस्तुति सभी रचनाएं उत्तम रचनाकारों को हार्दिक बधाई मेरी रचना को स्थान देने केलिए सहृदय आभार आदरणीया पम्मी जी🙏🙏

    जवाब देंहटाएं

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