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रविवार, 3 मई 2020

1752 ....आज एक ही ब्लॉग से.. कविताएँ

सादर अभिवादन
भाई कुलदीप जी को आवश्यक कोई 
पारिवारिक कार्य निकल आया
तो आज पढ़िए
एक ही ब्लॉग से
और वो ब्लॉग सालों से बंद है
उर्मि जी साउथ आस्ट्रेलिया मे रहती हैं
आनन्द लीजिए विविध रचनाओं का

एक चिड़िया,
उड़ती हुई आयी,
आँगन में !

देखा उसको,
चारों ओर देखते,
आँखें प्यारी-सी !

दाना खिलाया,
मुझे देखती रही,
बड़े प्यार से !


ये कहानी, ये किस्से,
है ज़िन्दगी के ही हिस्से,
फिर भी हम इन्हें,
क्यूँ अपना नहीं पाते?

जितने ये पास आते,
उतने ही हम दूर जाते,
इन किस्सों से सपनों को सजाकर,
जीवन को क्यूँ नहीं सँवारते?


रूठी तन्हाई,
दर्द की बाहें घिरी,
ढूँढें मंज़िल !

मूक ज़िन्दगी,
सब सहे ज़िन्दगी,
फिर भी चले !

अचंभित हूँ,
धडकनें जो मिली,
रूकती नहीं !


रूठे हो मुझसे, बात भले न करना तुम,
सिर्फ़ एक बार सीने से लगालो तुम !

ख़ाक होने से पहले जो पुकारूँ नाम,
सुनके मुझे पास में बुलालो तुम !

वक्त की धारा में बिछड़े हैं हम दोनों,
बनके कश्ती किनारे पे लगालो तुम !


सागर से बिछड़ा दरिया हूँ मैं,
क़ाश कहीं पर फिर मिल जाऊँ,
बादल ने चुराया जिसका पानी,
उस धरा को आज भिगो जाऊँ !

कैसे रहूँ बिन सागर के मैं,
अधूरा सा रहने लगा हूँ उसके बिन,
सागर से संगम कब होगा?
ये आस लिए मैं बिखरी धरा पर !
....
बस
सादर

9 टिप्‍पणियां:

  1. जब तक हालात नहीं सुधरते सभी सुरक्षित रहें, स्वस्थ रहें

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत अच्छी संकलित प्रस्तुति
    सबकी खोज खबर लेकर उन्हें ब्लॉग समाज से जुड़े रहने हेतु प्रेरित करने करने की पहल का हार्दिक स्वागत

    जवाब देंहटाएं
  3. वाह!खूबसूरत प्रस्तुति ।

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति.

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर रचनाएं और बेहतरीन प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  6. आश्चर्य है लोग इतने सुंदर ब्लॉग बनाते हैं और भूल भी जाते हैं !!!! सुंदर रचनाएँ , सुंदर प्रस्तुती आदरणीय दीदी |

    जवाब देंहटाएं

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