पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद एक और निवेदन आप सभी से आदरपूर्वक अनुरोध है कि 'पांच लिंकों का आनंद' के अगले विशेषांक हेतु अपनी अथवा अपने पसंद के किसी भी रचनाकार की रचनाओं का लिंक हमें आगामी रविवार तक प्रेषित करें। आप हमें ई -मेल इस पते पर करें dhruvsinghvns@gmail.com तो आइये एक कारवां बनायें। एक मंच,सशक्त मंच ! सादर

समर्थक

रविवार, 12 फ़रवरी 2017

576... अब कैसे कहूं ? ?

नमस्कार  दोस्तो  

सुप्रभात  
आज प

मेरी कविता में तुम

उन तमाम पन्नों पर
 लिखे हुए हजारों शब्दों में
मेरी एक भी कविता शामिल नहीं है
क्योंकि उनमें कहीं
मैंने,
तुम्हारा नाम नहीं लिखा है

पिता

पिता, कभी-कभी जी करता है 
कि कोई ज़ोर से डांटे,
पूछताछ करे,टोकाटाकी करे,
कहे कि आजकल तुम्हारे 
रंग-ढंग ठीक नहीं हैं.
घर से निकलूं तो कहे,
जल्दी वापस आ जाना,
देर से लौटूं तो कहे,
मेरी बात ही नहीं सुनते,
बिना कहे जाऊं तो पूछे,
कहाँ गए थे,

गुड़िया (बाल कविता )




मेरी गुड़िया रंग रंगीली
बेहद प्यारी छवि  उसकी
दिन रात साथ  रहती
मुझे बहुत प्यारी लगती |
है  बहुत सलीके वाली
होशियारी विरासत में मिली
पढाई में सब से आगे
सभी की दुलारी है
अभी से है चिंता  


जंगलों का हत्यारा सम्मानित सिकन्दर है !

                                              आधुनिकता की दौड़ में
                                              सब लगे हुए हैं 
                                              एक अंतहीन ,दिशाहीन होड़ में !
                                              धकिया कर एक-दूजे को ,
                                              सब चाहते हैं एक-दूजे से आगे
                                              निकल जाना ,
                                              ईमानदारी को सूखी रोटी के बजाय
                                              बेईमानी की मलाई  खाना !  



अब कैसे कहूं???

दोनों ने
किया था वादा
हमेशा साथ साथ चलने का,
फिर
मैंने किया भरोसा
और चलती रही आंखें मूंदे
प्रेम के अंधत्व में,
एक ठोकर लगी


अब  दीजिए आज्ञा 
धन्यवाद 
विरम  सिंह  

10 टिप्‍पणियां:

  1. वाह,,,,,
    शुभ प्रभात
    बढ़िया रचनाएँ
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर हलचल प्रस्तुति .

    उत्तर देंहटाएं
  3. बढ़िया हलचल. मेरी रचना शामिल करने के लिए शुक्रिया.

    उत्तर देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...