पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद एक और निवेदन आप सभी से आदरपूर्वक अनुरोध है कि 'पांच लिंकों का आनंद' के अगले विशेषांक हेतु अपनी अथवा अपने पसंद के किसी भी रचनाकार की रचनाओं का लिंक हमें आगामी रविवार तक प्रेषित करें। आप हमें ई -मेल इस पते पर करें dhruvsinghvns@gmail.com तो आइये एक कारवां बनायें। एक मंच,सशक्त मंच ! सादर

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सोमवार, 27 फ़रवरी 2017

591...यूँ कहिये - एक अनकहे भय में गुजरती है

सादर अभिवादन
आज धर्म संकट खड़ा हो गया  था
शनि की रात बारह बजे तक देवी जी जाग गई
रविवार की प्रस्तुति जो बनानी थी
सो सुबह मैंनें कहा कि आराम करिए
और भाई कुलदीप जी को कहा 
कि कुछ रचनाओं के लिंक डेशबोर्ड में रख दें
प्रस्तुति में बना दूँगा
सो देखिए मिली-जुली पसंद....

बोलने से घबराहट होती है
किस शब्द को कैच किया जाएगा
किसका पोस्टमार्टम होगा
कोई ठिकाना नहीं
न चुप्पी में चैन
न बोलने में चैन
पूरी उम्र समझौते में
यूँ कहिये -
एक अनकहे भय में गुजरती है
यदि आप ज़रा सा भी
दूसरों का ख्याल करते हैं तो  ....


केन्द्र में मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने में अभी तीन महीने बाकी हैं। अभी से सन 2019 के चुनाव को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। राष्ट्रीय सवाल दो तरह के हैं। एक, राजनीतिक गठबंधन के स्तर पर और दूसरा मुद्दों को लेकर। सबसे बड़ा सवाल है कि नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ क्या कहता है? लोकप्रियता बढ़ी है या घटी?

सुनने में आपको भले ही यह बहुत अजीब लगे कि आखिर फेसबुक के द्वारा हमे लोन कैसे मिल सकता है. फेसबुक कोई बैंक थोड़े ही ना है जो हमे लोन देगा। फेसबुक भले ही बैंक ना हो लेकिन ऑनलाईन लोन  दिलाने में फेसबुक आपकी पूरी हेल्प करेगा। आइये अब देखते है कि आखिर हमे किस तरह फेसबुक के द्वारा ऑनलाईन लोन मिलेगा

सर्वत्र धन का, पद का, पशु का
साम्राज्य है,
यह कैसा स्वराज्य है?
धन, पद, पशु
भारत-भाग्य-विधाता हैं,


अपने बुनियादी अधिकारों के लिये नहीं लड़ सकते ? सबसे होशियार माने जाने वाले इंसान की सोच इतनी तंग और छोटी क्यों होती है माँ ? 
तुम बताओ माँ क्या कहीं कोई जगह ऐसी है जहाँ हम इस आतंकी इंसान के अत्याचारों से बच कर सुकून से रह सकें ? जहाँ यह स्वार्थी 
इंसान अपनी ज़रूरतों के लिये हमारी शांत सुकून भरी ज़िन्दगी में
खलल न डाल सके और मैं चैन से तुम्हारी गोद में सो सकूँ ?

बूझती अली अली उरि चलि गली गली सखी कलियाँ सँवार के होली में..,
कहँ छुपे मनहरिया  केसरिया साँवरिया  दुअरिया ढार के होरी में..,
अहो चाले है मराल कनक केसरी करताल,
स्याम राग संग धरे रंग थाल थाल,

दें इज़ाज़त दिग्विजय को
चलते- चलते एक अश़आर पेश है

एक मोअम्मा है, समझने का न समझाने का








6 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर प्रस्तुति। सलाम आप लोगों की लगन को ।

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  2. बहुत अच्छी हलचल हलचल प्रस्तुति !

    उत्तर देंहटाएं
  3. सार्थक लिंक्स एवं सुन्दर प्रस्तुति ! मेरे सृजन को आज यहाँ स्थान देने के लिए आपका हृदय से आभार कुलदीप जी !

    उत्तर देंहटाएं

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